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मणिमहेश यात्रा: डल झील के लिए पवित्र छड़ी रवाना, लोगों ने लिया आशीर्वाद

राधा कृष्ण मंदिर पहुंचने पर वहां के प्रबंधन ने पवित्र छड़ी का फूल ‌वर्षा के साथ स्वागत किया.

राधा कृष्ण मंदिर पहुंचने पर वहां के प्रबंधन ने पवित्र छड़ी का फूल ‌वर्षा के साथ स्वागत किया.

Manimahesh Yatra: छड़ी चम्बा से रवाना हो चुकी है और यह परंपरा करीब 1000 साल से चली आ रही है. दशनामी अखाड़ा से पैदल यह मणिमहेश पहुंचती है. उसके बाद पवित्र डल झील में स्नान कर छड़ी वापस दशनामी अखाड़ा में पहुंच जाती है.

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चंबा. हिमाचल प्रदेश की शिव भूमि चम्बा की विश्व विख्यात मणिमहेश यात्रा के लिए दशनामी अखाड़ा से मणिमहेश के लिए निकलने वाली छड़ी राधा कृष्ण मंदिर जुलाहकड़ी से मणिमहेश डल झील के लिए रवाना हुई. देर शाम लक्ष्मी नारायण मंदिर से मुख्य बाजार से होते हुए यह छड़ी राधा कृष्ण मंदिर पहुंची, जहां पर रात्रि विश्राम किया गया. बम-बम भोले के जयकारों के साथ साधु-संत मुख्य बाजार से होते हुए राधा कृष्ण मंदिर पहुंचे. उनके साथ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे. इस बीच लोगों ने नतमस्तक होकर पवित्र छड़ी का आशीर्वाद लिया. राधा कृष्ण मंदिर पहुंचने पर वहां के प्रबंधन ने पवित्र छड़ी का फूल ‌वर्षा के साथ स्वागत किया, जहां पर एसडीएम चम्बा ने छड़ी की पूजा-अर्चना कर उसे वहां पर स्थापित किया गया.

मणिमहेश का रूट मैप. (साभार चंबा प्रशासन)

अब यह छड़ी यहां से पैदल मणिमहेश डल झील के लिए रवाना हो गई है. रास्ते में चार जगह पर रात्रि विश्राम कर राधा अष्टमी के दिन इस छड़ी को पवित्र डल झील में डुबकी लगवाने के बाद ही वहां पर बड़ा स्नान शुरू होगा. मंगलवार को जब छड़ी को लक्ष्मी नारायण मंदिर से रवाना किया गया तो वहां पर साधु-संतों और प्रशासन के बीच कम्युनिकेशन गैप के की वजह से हल्का सा विवाद हुआ, लेकिन एसडीएम चंबा ने मौके पर पहुंचकर इस विवाद को समाप्त कर दिया. स्थानीय विधायक पवन नैयर ने बताया कि पवित्र छड़ी यात्रा मणिमहेश के लिए रवाना हो चुकी है. राधा अष्टमी के दिन छड़ी को पवित्र डल झील में स्नान करवाया जाएगा. उन्होंने कहा कि थोड़ा सा प्रशासन और साधु महात्माओं के बीच में कम्युनिकेशन गैप की वजह से विवाद हुआ, लेकिन उसे जल्द सुलझा लिया गया. उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से यह यात्रा सीमित लोगों के बीच निकाली गई, लेकिन अगली बार बड़ी ही धूमधाम से छड़ी यात्रा निकाली जाएगी.

राधा कृष्ण मंदिर पहुंचने पर वहां के प्रबंधन ने पवित्र छड़ी का फूल ‌वर्षा के साथ स्वागत किया.

क्या बोले एसडीएम

एसडीएम चम्बा नवीन तंवर ने बताया कि मणिमहेश यात्रा के लिए दशनामी अखाड़ा से छड़ी रवाना हो चुकी है. पहले जुलाहकडी के राधा कृष्ण मंदिर में विश्राम के बाद यह पैदल पड़ाव दर पड़ाव आगे बढ़ती जाएगी और राधा अष्टमी के दिन छड़ी को स्नान कर वापिस दशनामी अखाड़ा पहुंचाया जाएगा. उन्होंने कहा कि कोविड के सभी नियमों का पालन किया जा रहा है. ज्यादा लोग इस यात्रा में शामिल नहीं किए गए हैं. क्योंकि कॉविड वजह से एहतियात बरतना जरूरी है. छड़ी दार महंत यतीन्द्र गिरी ने बताया कि छड़ी चम्बा से रवाना हो चुकी है और यह परंपरा करीब 1000 साल से चली आ रही है. दशनामी अखाड़ा से पैदल यह मणिमहेश पहुंचती है. उसके बाद पवित्र डल  झील में स्नान कर छड़ी वापस दशनामी अखाड़ा में पहुंच जाती है.

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