सिरमौर में अच्छे दाम मिलने से खिले लहसुन उत्पादकों के चेहरे, चंबा में आलू की बंपर पैदावार

सिरमौर जिला में लहसुन उत्पादकों को अच्छे दाम मिलने से इनके चेहरे चहके हुए है.

सिरमौर जिला में लहसुन उत्पादकों को अच्छे दाम मिलने से इनके चेहरे चहके हुए है.

Agriculture Update: किसानों ने बताया कि इस बार मौसम की वजह से मक्की व गेहूं की फसल काफी बर्बाद हुई है, लेकिन उनकी आलू की फसल इस बार बंपर फसल मानी जा रही है. जो बीज कृषि विभाग ने मुहैया करवाया था, वह काफी महंगा भी है, इसलिए किसानोंं को थोड़ी रियायत दी जाए.

  • Share this:

चंबा/सिरमौर. हिमाचल प्रदेश में कोरोना काल (Corona) के बीच सिरमौर जिले में लहसुन की फसल के अच्छे दाम मिलने से उत्पादक किसानों के चेहरे खिले और चहके हुए हैं. सिरमौर जिले (Sirmaur Disttrict) का लहसुन बाहरी राज्यो की मंडियों में पहुंच रहा है. पिछले कई साल के मुकाबले ऐसा पहली बार हुआ है, जब लहसुन (Garlic) के दामों में इतनी बढ़ोतरी हुई हो.

दरअसल, हिमाचल प्रदेश में सिरमौर जिला लहसुन के उत्पादन के लिए विशेष रुप से जाना जाता है. खासकर जिले के गिरीपार इलाके में भारी मात्रा में लहसुन का उत्पादन होता है. इस बार क्षेत्र में पिछले कई सालों के मुकाबले लहसुन जहां अच्छी पैदावार हुई है. वहीं, दाम भी अच्छे मिल रहे हैं. इस बार किसानों को कोरोना काल के 100 से 150 रुपए प्रति किलो और लहसुन के दाम मिल रहे है, जिससे लहसुन उत्पादक खुश नजर आ रहा है और इस कठिन समय के बीच किसानों के लिए यह बड़ी ही राहत देने वाली बात है.

लोकल मंडी में सस्ता, बाहर महंगा

किसानों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर लहसुन 90 से 100 रुपए प्रति किलो, जबकि दिल्ली,कलकत्ता सहित अन्य राज्यों की मंडियों में लहसुन 150 से 160 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. सिरमौर जिला का हरिपुरधार, शिलाई, डलयानु, टिम्बी आदि ऐसी क्षेत्र हैं, जहां बहुत अधिक मात्रा में लहसुन का उत्पादन किया जाता है.

चंबा में खेतों से आलू निकालते हुए लोग.

मक्की से निराशा, लेकिन आलू से लौटी रौनक, 3 गुना ज्यादा पैदावार

चम्बा जिले में मौसम की वजह से मक्की और गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. लेकिन जिले में आलू की बंपर पैदावार हुई है. जो पिछले से लगभग 3 गुना ज्यादा मानी जा रही है. बाजार में भी किसानों को उनकी मेहनत का अच्छा दाम नहीं मिल रहा है. किसानों ने बताया कि इस बार मौसम की वजह से मक्की व गेहूं की फसल काफी बर्बाद हुई है, लेकिन उनकी आलू की फसल इस बार बंपर फसल मानी जा रही है. जो बीज कृषि विभाग ने मुहैया करवाया था, वह काफी महंगा भी है, इसलिए सरकार को चाहिए कि थोड़ी रियायत दी जाए.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज