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पठानकोट एयरबेस हमला: हिमाचली शहीद संजीवन राणा के नाम की घोषणाएं अधूरी, बेटी का दर्द छलका
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Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 2, 2020, 3:42 PM IST
पठानकोट एयरबेस हमला: हिमाचली शहीद संजीवन राणा के नाम की घोषणाएं अधूरी, बेटी का दर्द छलका
पठानकोट हमले में शहीद हुए कांगड़ा के सजीवन राणा की बेटी कोमल.

Pathankot Airbase Terror Attack: सियूंह पंचायत पंचायत प्रधान बिंदु राणा ने कहा कि शहीद के नाम पर की गई घोषणाओं के पूरा न होने के लिए दोनों ही सरकारें जिम्मेवार हैं. यही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों की भी इसमें लापरवाही रही है.

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धर्मशाला. पठानकोट एयरबेस हमले (Pathankot Airbase Terror Attack) में हिमाचल (Himachal Pradesh) के जवान की शहादत (Martyred) को लेकर सूबे के नेता संजीदा नहीं हैं. इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनकी शहादत पर हुई घोषणाएं धरातल पर नहीं उतर पाई हैं.

परिवार ने पूर्व कांग्रेस और मौजूदा भाजपा, दोनों सरकारों के खिलाफ निराशा जताई है.
दरअसल, कांगड़ा (Kangra) के शाहपुर उपमंडल के सियूंह गांव के शहीद संजीवन राणा के नाम पर राजनेताओं की गई घोषणाएं अधूरी की अधूरी हैं. संजीवन राणा पठानकोट एयरबेस में जनवरी 2016 को हुए आतंकी हमले में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे. गुरुवार को हमले की पांचवीं बरसी है.

ये घोषणाएं हुई थी

शहीद के अंतिम संस्कार में पहुंचे नेताओं ने कई घोषणाएं की थी, जिन्हें आज तक अमलीजामा ही नहीं पगाया गया है. ना तो शहीद के नाम पर छत्तड़ी कालेज का नामकरण किया गया है और ना ही शहीद की याद में पार्क बना और न ही उसमें प्रतिमा लगाने की बात सिरे चढ़ पाई है. शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होने पहुंचे तत्कालीन परिवहन मंत्री जीएस बाली ने श्मशानघाट की बदहाली और रास्ते की दुर्दशा को देखते हुए उसी समय शमशानघाट निर्माण के लिए 3 लाख रुपये देने की घोषणा की थी. श्मशानघाट के लिए आया पैसा साथ लगती पंचायत को चला गया.

परिवार का आरोपशहीद के परिवार सदस्यों का आरोप है श्मशानघाट भी सही ढंग से नहीं बन पाया है. ऐसे में, कैसे कहा जा सकता है कि शहीद के नाम हुई घोषणा पूरी हुई है. शहीद के नाम पर बनाए गए बस स्टॉप पर लगाए गए बोर्ड से भी शहीद का नाम तक मिट चुका है. पूर्व सांसद शांता कुमार ने शहीद के नाम पर टयूबवेल और हैंडपंप लगाने के लिए राशि स्वीकृत की थी, लेकिन जमीन उपलब्ध न होने के चलते उस पर भी काम नहीं हो पाया है.

Pathankot Airbase Terror Attack-2
कांगड़ा: बस स्टॉप पर लगाए गए बोर्ड से भी शहीद का नाम तक मिट चुका है.


यह बोली शहीद की बेटी कोमल
शहीद संजीवन राणा की छोटी बेटी कोमल ने कहा कि उनके पिता की शहादत के समय राजनेताओं ने परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, छत्तड़ी कालेज का नामकरण शहीद के नाम पर करने, पार्क बनवाने और श्मशानघाट बनवाने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक कोई काम नहीं हो पाया है. उनका कहना था कि राजनेताओं द्वारा घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन उन्हें अमलीजामा नहीं पहनाया जाता. उनकी बड़ी बहन नौकरी के लिए प्रयास कर रही है.

दोनों ही सरकारें जिम्मेवार-प्रधान
सियूंह पंचायत पंचायत प्रधान बिंदु राणा ने कहा कि शहीद के नाम पर की गई घोषणाओं के पूरा न होने के लिए दोनों ही सरकारें जिम्मेवार हैं. यही नहीं, प्रशासनिक अधिकारियों की भी इसमें लापरवाही रही है. शहीद के नाम पर पार्क निर्माण, टयूबवेल और हैंडपंप स्थापना के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है. पंचायत की ओर से भी समय-समय पर प्रशासन को उक्त घोषणाओं को पूरा करने का आग्रह किया जाता है, लेकिन अभी तक उस दिशा में कार्य नहीं हो पाया है.

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First published: January 2, 2020, 3:15 PM IST
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