घोषणा के 20 साल बाद भी नहीं पहुंची शहीद के गांव में सड़क

कांगड़ा जिले के देहरा में कारगिल युद्ध में शहीद बिजेंद्र सिंह के नाम पर 8 किलोमीटर की सड़क को 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं बनाया जा सका है.

News18 Himachal Pradesh
Updated: August 15, 2019, 1:15 PM IST
घोषणा के 20 साल बाद भी नहीं पहुंची शहीद के गांव में सड़क
घोषणा के 20 साल बाद भी नहीं पहुंची शहीद के गांव सड़क
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Updated: August 15, 2019, 1:15 PM IST
शहीदों के नाम पर जो घोषणाएं होती हैं, वो सिर्फ घोषणाएं ही बनकर रह जाती हैं. हिमाचल प्रदेश में भी ऐेसे कई जीते जागते उदाहरण देखने को मिल जाएंगे. एक ऐसा ही उदाहरण कांगड़ा जिला के देहरा उपमंडल में भी देखने को मिल रहा है, जहां शहीद के नाम पर 8 किलोमीटर की सड़क को 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी नहीं बनाया जा सका है.

खुद को ठगा सा महसूस कर रहा शहीद का परिवार

हिमाचल प्रदेश के प्रथम कारगिल शहीद बिजेंद्र सिंह के परिवार वाले 20 सालों से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं. शहीद की माता संतोष कुमारी और भाई विजय सिंह को ये अफसोस है कि सड़क के नाम पर उन्हें पिछले 20 वर्षों से ठगा जा रहा है. सड़क को फॉरेस्ट क्लियरेंस के चलते रोक रखा है. घर आने जाने में पूरे गांव को दिक्कत है. परिजनों का कहना है कि सरकार को ऐसी घोषणाएं नहीं करनी चाहिए जो वो पूरी न कर सकें.

मां ने कहा शहीद बेटे के नाम पर बनने वाली सड़क का निर्माण उनकी जिंदगी का है आखिरी सपना
मां ने कहा शहीद बेटे के नाम पर बनने वाली सड़क का निर्माण उनकी जिंदगी का है आखिरी सपना


शहादत के 20 साल बाद भी नहीं हुआ सड़क का निर्माण

शहीद बिजेंद्र सिंह की माता संतोष कुमारी का कहना है कि वैसे तो सरकार ने उनके बेटे की शहादत को याद रखने के लिए की गई लगभग सभी घोषणाएं पूरी कर ली हैं, लेकिन शहीद बेटे के नाम पर बनने वाली सड़क का निर्माण उनकी जिंदगी का आखिरी सपना है, जिसके पूरे होने से उनके गांव के लोगों को सड़क सुविधा मिलने से उनके बेटे की शहादत को सच्ची श्रद्धांजलि मिल पाएगी.

बिजेंद्र सिंह को 23 साल की उम्र में मिली थी शहादत
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गौरतलब है कि जगदीश चंद व संतोष कुमारी के घर जन्में कारगिल युद्ध में वर्ष 1999 में मात्र 23 वर्ष की आयु में शहादत का जाम पीने वाले प्रथम कारगिल शहीद बिजेंद्र सिंह को शासन और प्रशासन भूला चुका है. शहीद बिजेंद्र सिंह का घर कांगड़ा जिला के देहरा उपमंडल की ग्राम पंचायत नोशहरा के नंडलु गांव में है. जब बिजेंद्र सिंह की शहादत हुई थी तो नेताओं से लेकर प्रशासनिक अधिकारियों का घर पर जमावड़ा लग गया था. बगलामुखी बनखंडी से बणे दी हट्टी तक शहीद के नाम पर 8 किलोमीटर सड़क बनाने का ऐलान हुआ, लेकिन 8 किलोमीटर में से 3 किलोमीटर निर्माण हो पाया है, जबकि 5 किलोमीटर सड़क 20 वर्षों से निर्माणाधीन है.

20 सालों से फॉरेस्ट बनी है शहीद की सड़क में रोड़ा

बहरहाल सड़क का निर्माण नहीं हो पाया और बोर्ड लगाकर उसपर लिख दिया गया कि यह शहीद मार्ग है, इसके बाद न तो शासन ने इस तरफ ध्यान दिया और न प्रशासन ने. वहीं ग्रामीणों का कहना है कि यहां कि सड़क पर वाहन चलाना तो पैदल चलना भी मुश्किल है. ग्रामीणों में इस बात को लेकर रोष है कि शहीद के नाम पर जो घोषणा की गई थी उसे 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी पूरा नहीं किया जा सका है.

सड़क के निर्माण को फॉरेस्ट क्लियरेंस के चलते रोक रखा
सड़क के निर्माण को फॉरेस्ट क्लियरेंस के चलते रोक रखा है


शहीद की इकलौती बहन की रूठ गई राखी

शहीद बिजेंद्र सिंह की इकलौती बहन कमला देवी जिसके उसने शहादत से लगभग तीन महीने पहले हाथ पीले कर ससुराल को विदा की थी, उसी बहन की मानसिक हालत उस समय बिगड़ गई जब उस अभागी बहन ने अपने भाई की लाश घर के दरवाजे पर देखी. वो बहन आज भी उसी दरबाजे पर बैठकर अपने भाई का इंतजार करती है और हर साल राखी लेकर अपने फौजी भाई के आने का इंतज़ार कर रही है.

( देहरा से ब्रजेश्वर साकी की रिपोर्ट )

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First published: August 15, 2019, 1:12 PM IST
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