Assembly Banner 2021

हिमाचल उपचुनाव: धर्मशाला से भाजपा ने 7, कांग्रेस ने 5 बार मारा है मैदान

हिमाचल में दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं.

हिमाचल में दो सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं.

By-Election in Himachal: समीकरणों के मुताबिक, धर्मशाला में हमेशा ही टक्कर भाजपा-कांग्रेस में रही है, जबकि आजाद को अभी तक इस विधानसभा क्षेत्र से कामयाबी नहीं मिली, लेकिन एक दफा कांग्रेस को बतौर आजाद प्रत्याशी बृजलाल ने ज़रूर कांटे की टक्कर दी थी.

  • Share this:
धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश में पच्छाद (Pacchad) और धर्मशाला (Dharamshala) उपचुनाव (By-Election) में जीत का परचम लहराने के लिए कांग्रेस (Congress) और भाजपा (BJP) दोनों ही एड़ी-चोटी का जोर लगा रहे हैं. दोनों ही सीटों पर मुकाबला रोचक माना जा रहा है. उपचुनाव के लिए महज 11 दिन शेष रह चुके हैं, ज्यों-ज्यों चुनावों की तारीख नजदीक आती जा रही है, चुनावी समीकरण भी उतने ही रोचक होते जा रहे हैं. धर्मशाला में जहां दो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और भाजपा ने दो युवा उम्मीदवारों पर दांव लगा रखा है. 5 ऐसे आजाद प्रत्याशी भी मैदान में ताल ठोक चुके हैं.

189 मतों से हुई थी हार
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र (Dharamashala Assembly Seat) से अब तक भाजपा सात बार मैदान मार चुकी है. जबकि सूबे में सर्वाधिक सत्ता में रहने वाली कांग्रेस पार्टी अभी दो पारियां पीछे ही चल रही है.पंजाब से अलग होते ही जब चुनाव आयोजित किए गए तो धर्मशाला विधानसभा चुनावों में रोमांचक मुकाबला हुआ. इन चुनावों में कांग्रेस के आरके चंद ने जहां 4351 वोट हासिल किए, वहीं भारतीय जन संघ के नेता एन सिंह ने भी कड़ी टक्कर देते हुए 4162 मत हासिल किए, इस बीच महज़ 189 मतों से हार व जीत देखेने को मिली.

भाजपा के किशन कपूर के सांसद बनने से धर्मशाला सीट खाली हुई है.
भाजपा के किशन कपूर के सांसद बनने से धर्मशाला सीट खाली हुई है.

पहली बार जनता दल जीता


साल 1972 के चुनावों में कांग्रेस ने नया चेहरा मैदान में चंद्र वर्कर के तौर पर उतारा. वर्कर को 3032 तो आजाद उम्मीदवार बृज लाल ने 2842 मत हासिल किए. जीत कांग्रेस के हिस्से में गई. साल 1977 में प्रदेश में कांग्रेस विरोधी चुनाव लड़ा गया. इस चुनाव में धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में पहली बार जनता दल ने जीत का तिलक अपने माथे पर लगाया. जनता दल के नेता बृज लाल को 8576 और दूसरे नंबर पर रहे चंद्रवर्कर को 5649 मत ही मिले.

भाजपा का खाता खुला, कपूर ने लगाई हैट्रिक
साल 1982 में भाजपा ने धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र में रिपीट किया. इस चुनाव में भाजपा नेता बृज लाल ने कांगेसी नेता मूल राज पाधा को हराया. साल 1985 के चुनाव में कांग्रेस ने मूल राज पाधा को फिर टिकट थमाया तो वहीं भाजपा ने युवा नेता किशन कपूर को टिकट देकर नया मास्टर स्टोक खेलने का प्रयास किया. इस दौरान भाजपा को सफलता हाथ नहीं लगी, लेकिन अगामी 1990 के विधानसभा चुनावों में एक बार फिर कांग्रेस विरोधी अभियान चला, जिसमें भाजपा के युवा नेता किशन कपूर ने 13663 मतों से बड़ी जीत हासिल की और धर्मशाला से विधायक बने. कपूर ने उस समय के विधायक मूल राज पाधा को हराया. इसके बाद कपूर ने लगातार 1993- 1998 में जीत हासिल कर हैट्रिक लगाई. कपूर ने 1993 में चंद्रेश कुमारी और 1998 में राम स्वरुप को कड़ी शिक्स्त दी.

चंद्रेश को मिली जीत
साल 1998 में किशन कपूर को कैबिनेट में शामिल कर परिवहन व जनजातीय विकास विभाग सौंपा गया. इसके बाद साल 2003 के चुनावों में किशन कपूर के खिलाफ एक बार फिर चंद्रेश कुमारी को कांग्रेस ने मैदान में उतारा. इस बार चंद्रेश कुमारी कपूर के जीत के कारवां को तोडऩे में कामयाब हुई. इस जीत के साथ ही चंद्रेश कुमारी धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की पहली महिला विधायक बनीं.

2012 में कांग्रेस को धर्मशाला सीट पर जीत मिली थी.
2012 में कांग्रेस को धर्मशाला सीट पर जीत मिली थी.


फिर जीते भाजपा के कपूर
धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की विधायक चंद्रेश कुमारी को प्रदेश सरकार में कैबिनेट रैंक दिया गया.साल 2007 में किशन कपूर ने चंद्रेश कुमारी को हराकर एक बार फिर धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र की जनता का विश्वास जीता और चंद्रेश कुमारी को 7616 मतों से हराकर जीत दर्ज की. साल 2012 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने एक बार फिर नए चेहरे पर दांव खेलकर सुधीर शर्मा को धर्मशाला विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी घोषित किया. धर्मशाला की जनता ने सुधीर को 21241 वोट दिए जबकि भाजपा के प्रत्याशी किशन कपूर को महज़ 16241 मतों से ही संतोष करना पड़ा. सुधीर शर्मा पूरे पांच हजार मतों से जीत हासिल कर विधानसभा पहुच गए.

अब सासंद बन गए हैं किशन कपूर
साल 2017 के चुनावों में भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर ने एक बार फिर विजय कायम की. किशन कपूर ने 26050 मत हासिल किए जबकि सुधीर शर्मा को 23053 मत मिल पाए. किशन कपूर 2997 वोटों से जीतकर विधान सभा पहुंचे गए. अब जबकि किशन कपूर लोकसभा चुनाव जीत कर सांसद बन चुके हैं. समीकरणों के मुताबिक, यहां हमेशा ही टक्कर भाजपा-कांग्रेस में रही है, जबकि आजाद को अभी तक इस विधानसभा क्षेत्र से कामयाबी नहीं मिली, लेकिन एक दफा कांग्रेस को बतौर आजाद प्रत्याशी बृजलाल ने ज़रूर कांटे की टक्कर दी थी.

ये भी पढ़ें-कांग्रेस का आरोप-हिमाचल में सत्ता का दुरुपयोग कर उपचुनाव लड़ रही BJP

हिमाचल उपचुनाव: BJP पर आचार संहिता तोड़ने का आरोप, पाइपों से भरे ट्रक पकड़े
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज