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    'शर्म आती है कि CU के मुद्दे को एक दशक में नहीं सुलझा पाये', सरकार और अधिकारियों पर जमकर बरसे अनुराग ठाकुर

    केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई. (फाइल फोटो)
    केन्द्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी के मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताई. (फाइल फोटो)

    अनुराग ठाकुर (Anurah Thakur) ने कहा कि आज प्रदेश के नुमाइंदा होने के नाते उन्हें शर्म आती है कि बीते एक दशक से राज्य के इतने बड़े संस्थान के मुद्दे को वो हल नहीं करवा पाये.

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    धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में आयोजित दिशा बैठक में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर (Anurah Thakur) दिल्ली से वर्चुअली शामिल हुए. इस बैठक में पहली बार उनका रौद्र रूप देखने को मिला. अनुराग ठाकुर ने बैठक में शरीक हुये कांगड़ा के सांसद, विधायक और आला अधिकारियों को सेंट्रल यूनिवर्सिटी (Central University) के मुद्दे पर सख्त लहजे में नाराजगी जाहिर करते हुए जमकर लताड़ा. साथ ही पिछली सरकारों पर भी जमकर बरसे. इतना ही नहीं मौजूदा सरकार को भी केंद्रीय वित्त मंत्री ने इस मुद्दे को लेकर ख़ूब खरी-खोटी सुनाई.

    केंद्रीय राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सैंट्रल यूनिवर्सिटी के मुद्दे को प्रदेश की सरकार द्वारा गंभीरता से नहीं लेने और लैंड ट्रांसफर करवाने में की गई लेटलतिफी पर जमकर भड़ास निकाली. उन्होंने कहा कि आज प्रदेश के नुमाइंदा होने के नाते उन्हें शर्म आती है कि बीते एक दशक से प्रदेश के इतने बड़े संस्थान के मुद्दे को वो हल नहीं करवा पाये. इसके चलते प्रदेश के हजारों छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है. जब तक ये मुद्दा हल नहीं हो जाता तब तक छात्रों के साथ इसी तरह से खिलवाड़ होता रहेगा.

    इतना ही नहीं अनुराग ठाकुर ने बैठक में मौजूद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के उपकुलपति कुलदीप कुमार अग्निहोत्री की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा कि उन्होंने भी इस मुद्दे को सिरियसली नहीं लिया, जबकि वो उन्हें बहुत अनुभवी समझते रहे हैं.




    अनुराग ठाकुर ने सख़्त लहज़े में कहा कि सेंट्रल यूनिवर्सिटी उनका ड्रीम प्रोजेक्ट है और वो अपने ड्रीम प्रॉजेक्ट के साथ किसी को भी खिलवाड़ नहीं करने देंगे. इसलिये त्योहारी सीज़न होने के चलते वो उन्हें एक माह भर का वक़्त देते हैं कि इस मुद्दे के हल के लिये दिन रात एक कर दिया जाये. और उन्हें इसकी रिपोर्ट सौंपी जाए. अन्यथा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है. उन्होंने कहा कि अगर त्योहारी सीज़न न होती तो मोहलत एक सप्ताह से ज़्यादा की नहीं दी जाती.
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