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धर्मशाला में होटल कारोबारियों पर छाये संकट के बादल, बीते डेढ़ साल में 163 होटल सीज, ये है वजह

डॉक्टर जिंदल ने अपनी डीएम वाली शक्तियों का प्रयोग करते हुये पहले तो इन होटल कारोबारियों को नोटिस सर्व किये और जब जबाव संतोषजनक नहीं मिला तो तुरंत इन होटलों को बंद करवाने के आदेश पारित कर दिये.

डॉक्टर जिंदल ने अपनी डीएम वाली शक्तियों का प्रयोग करते हुये पहले तो इन होटल कारोबारियों को नोटिस सर्व किये और जब जबाव संतोषजनक नहीं मिला तो तुरंत इन होटलों को बंद करवाने के आदेश पारित कर दिये.

Himachal News: जिलाधीश कांगड़ा की मानें तो बैंक की ओर से जिन भी डिफॉल्टर होटल कारोबारियों की सूचि उनके पास आती है उन्हें सरफेसिया एक्ट की सेक्शन- 13 के तहत कार्रवाई करनी पड़ती है. हालांकि उन्हें पहले मामले को सुलझा लेने के लिये 60 दिन की मौहलत दी जाती है और जो इसमें असफल हुआ उनके होटेल्स को सीज किया जाता ह. इस तरह से कांगड़ा में अब तक डेढ सालों में 163 होटलों पर ताले लटकाये जा चुके हैं.

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कांगड़ा. पहले कोरोना और अब हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को लेकर सरकार के उदासीन रवैये ने होटल कारोबारियों की खटिया खड़ी करनी शुरू कर दी है. धर्मशाला जैसी पर्यटन स्थली में महज एक से डेढ़ साल के अदंर सैकड़ों होटलों पर एक साथ ताले लटक गये हैं. आखिर क्या है इसके पीछे की वजह देखिये हमारी ये खास रिपोर्ट. धर्मशाला में जिलाधीश डॉक्टर निपुण जिंदल ने अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुये 163 होटलों पर ताले लटका दिये हैं. और इसके पीछे की बड़ी वजह होटल कारोबारियों द्वारा बैंकों से मोटी रकम लेने के बाद पैसे वापस न करना बताया जा रहा है.

डॉक्टर जिंदल ने अपनी डीएम वाली शक्तियों का प्रयोग करते हुये पहले तो इन होटल कारोबारियों को नोटिस सर्व किये और जब जबाव संतोषजनक नहीं मिला तो तुरंत इन होटलों को बंद करवाने के आदेश पारित कर दिये. नतीजतन बीते डेढ़ साल में धर्मशाला और अप्पर धर्मशाला में अब तक सैकड़ों होटल कारोबारियों के ऊपर गाज गिर चुकी है और 163 होटलों को सीज किया जा चुका है. हालांकि, इन सब कारोबारियों को पहले जिला मजिस्ट्रेट की ओर से 60 दिन की मौहलत दी गई और जब वो उस मौहलत में भी बैंक के साथ लेन-देन करने में अक्षम रहे तो उसके तुरंत बाद इन होटेल्स को सरफेसिया एक्ट की सेक्शन 13 के तहत पूरी तरह से सीज कर दिया गया.

कारोबारियों के खेमें में अब परेशानी का आलम है
जिला मजिस्ट्रेट की इस तरह की कार्रवाई से और यूं एक के बाद एक करके बैंक डिफॉल्टर हो रहे होटल कारोबारियों के खेमें में अब परेशानी का आलम है. होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष अश्वनी बांबा की मानें तो बीते तीन से चार सालों में धर्मशाला कांगड़ा की होटल इंडस्ट्री का पतन शुरू हो चुका है. यहां पर्यटन कारोबार की अपार संभावना के मदेदनजर पहले लोगों ने बैंकों से ऋण उठाकर बड़े-ब़ड़े होटल बनाये. शुरू-  शुरू में कमाई भी ठीकठाक हुई. मगर जब से कश्मीर खुल गया और वहां की सरकारों की ओर से हवाई यात्राएं और किराये भाड़े में पर्यटकों को रियायत दी गई, तब से ज्यादातर लोग कश्मीर जाने लगे हैं.

हिमाचल की वजाय कश्मीर का रुख करने लगा है
इतना ही नहीं उत्ताखंड में भी सरकार पर्यटन को लेकर इतनी संजीदा है कि यहां भी हिमाचल की अपेक्षा हवाई यात्रा बेहद सस्ती है. पर्यटकों के लिये कई तरह की सहूलियत है. मगर हिमाचल में प्राकृतिक धरोहरें तो हैं मगर यहां पर्यटकों के लिये सुगम सहूलियत के नाम पर कोई नीति नहीं है. जिसकी बदौलत पर्यटक अब हिमाचल की वजाय कश्मीर का रुख करने लगा है.

सरकार भी मूक दर्शक बनकर बैठी हुई है
अश्वनी बांबा ने कहा कि रही सही कसर कोरोना ने निकाल दी है. कोरोना की वजह से दो साल तक होटल कारोबार बुरी तरह से प्रभावित हुआ. ऐसे में जिन लोगों ने पर्यटन क्षेत्रों की लिहाज से बैंकों से बड़े- बड़े ऋण उठाकर होटल की बड़ी- बड़ी मंजिले बना लीं, आज उनके पास बैंक का ऋण चुकता करने के लिये भी धन राशि नहीं हैं. ऐसे में लगातार होटल बंद होते जा रहे हैं और होटल कारोबारियों में निराशा के बादल छाते जा रहे हैं. सरकार भी मूक दर्शक बनकर बैठी हुई है.

सेक्शन- 13 के तहत कार्रवाई करनी पड़ती है
वहीं, जिलाधीश कांगड़ा की मानें तो बैंक की ओर से जिन भी डिफॉल्टर होटल कारोबारियों की सूचि उनके पास आती है उन्हें सरफेसिया एक्ट की सेक्शन- 13 के तहत कार्रवाई करनी पड़ती है. हालांकि उन्हें पहले मामले को सुलझा लेने के लिये 60 दिन की मौहलत दी जाती है और जो इसमें असफल हुआ उनके होटेल्स को सीज किया जाता ह. इस तरह से कांगड़ा में अब तक डेढ सालों में 163 होटलों पर ताले लटकाये जा चुके हैं. उन्होंने बताया कि इसी एक्ट की सेक्शन 17 के तहत डिफॉल्टर कारोबारी DRT के समक्ष अपनी अपील भी कर सकते हैं, जिससे उन्हें रियायत मिल सके.

ये प्रोपर्टीज़ बेचते बन पा रही हैं और न रखते
काबिलेगौर है कि धर्मशाला जैसी खूबसूरत पर्यटन स्थली को देखते हुये यहां न केवल स्थानीय स्तर के लोगों ने होटल इंडस्ट्री में इन्वेस्ट कर रखा है बल्कि प्रदेश और प्रदेश के बाहर रहने वालों ने भी स्थानीय लोगों के नाम पर बड़ी- बड़ी प्रोपर्टियां बना रखी हैं, जिसके लिये बाकायदा कई बैंकों से ऋण भी उठाये गये हैं. मगर जब से उत्तराखंड और कश्मीर की सरकारों ने अपने यहां पर्यटन नीति को सुगम बनाने के लये कई अहम और कारगर कदम उठाये हैं तभी से धर्मशाला में पर्यटकों के फुटफॉल में काफी कमी दर्ज की गई है. नतीजतन यहां के होटल कारोबारियों के समक्ष आगे कुंआ पीछे खाई जैसी बनती जा रही है. न ये प्रोपर्टीज़ बेचते बन पा रही हैं और न रखते.

Tags: Himachal pradesh news, Kangra News

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