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    देश के पहले परमवीर चक्र विजेता हिमाचली मेजर सोमनाथ शर्मा को CM ने दी श्रद्धांजलि

    मेजर सोमनाथ शर्मा. (FILE PHOTO)
    मेजर सोमनाथ शर्मा. (FILE PHOTO)

    Major Somnath Sharma: देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर इलाके के ढाढ गांव के रहने वाले थे. जन्म 31 जनवरी 1923 को उनका जन्म हुआ था. मेजर अमरनाथ शर्मा पिता सेना में डॉक्टर थे.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 3, 2020, 12:11 PM IST
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    धर्मशाला. देश के पहले परमवीर चक्र विजेता (Paramvir Chakra) और हिमाचल प्रदेश के वीर सपूत को आज देश याद कर रहा है. दरअसल, देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा (Major Somnath Sharma) की आज पुण्‍यतिथि है और प्रदेश-देश आज उन्‍हें श्रद्धांजलि दे रहा है. सूबे के मुखिया जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) ने मेजर सोमनाथ शर्मा को या‍द किया.

    सीएम ने किया याद
    सीएम ने ट्वीट कर सोमनाथ शर्मा के शब्‍दों को याद किया. सीएम ने ट्वीट किया कि ‘मैं एक इंच पीछे नहीं हटूंगा और तब तक लड़ता रहूंगा, जब तक कि मेरे पास आखिरी जवान और गोली है.’’ वीरभूमि हिमाचल के वीर सपूत, 1947 भारत-पाकिस्तान के युद्ध में पराक्रम दिखाने वाले, प्रथम परमवीर चक्र से सम्मानित शहीद मेजर सोमनाथ शर्मा की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि.

    कौन थे सोमनाथ शर्मा
    देश के प्रथम परमवीर चक्र विजेता मेजर सोमनाथ शर्मा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के पालमपुर इलाके के ढाढ गांव के रहने वाले थे. जन्म 31 जनवरी 1923 को उनका जन्म हुआ था. मेजर अमरनाथ शर्मा पिता सेना में डॉक्टर थे. इस वजह से उनकी रग-रग में भी देशभक्ति और बहादुरी का जज्बा था. मेजर सोमनाथ शर्मा का जन्म जम्मू में हुआ था. दोस्तों में ‘सोम’ के नाम से मशहूर सोमनाथ बचपन से ही अपने पिता और मामा से प्रभावित थे और शुरू से ही सेना में जाना उनके जीवन का लक्ष्य रखा था. शेरवुड कॉलेज, नैनीताल में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद सोमनाथ ने देहरादून के प्रिन्स ऑफ वेल्स रॉयल मिलिट्री कॉलेज में दाखिला लिया. मेजर सोमनाथ ने अपने सैनिक जीवन की शुरूआत 22 फरवरी, 1942 में की वहां इन्होंने चैथी कुमायूं रेजिमेंट में बतौर कमीशंड ऑफिसर प्रवेश लिया. वीरता की परीक्षा युद्ध है यह इनके जीवन में पूरी तरह से चरितार्थ हुआ.



    माता-पिता के लिए प्रेरणादायी पत्र
    मेजर सोमनाथ शर्मा ने अपने माता-पिता को 1941 में पत्र लिखा था जो कि हर युवा के लिए प्रेरणादायक है. उन्होंने लिखा था कि ‘‘मैं अपने सामने आए कर्तव्य का पालन कर रहा हूँ। यहाँ मौत का क्षणिक डर जरूर है, लेकिन जब मैं गीता में भगवान कृष्ण के वचन को याद करता हूँ तो वह डर मिट जाता है. भगवान कृष्ण ने कहा था कि आत्मा अमर है, तो फिर क्या फर्क पड़ता है कि शरीर है या नष्ट हो गया. पिताजी मैं आपको डरा नहीं रहा हूँ, लेकिन मैं अगर मर गया, तो मैं आपको यकीन दिलाता हूँ कि मैं एक बहादुर सिपाही की मौत मरूँगा.‘‘
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