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कांगड़ा में कोरोना: 108 डॉक्टर, 62 नर्से और 7 चपरासी कोरोना से लड़ रहे जंग

कांगड़ा में करोना का कहर.
कांगड़ा में करोना का कहर.

Corona Virus in Kangra: कांगड़ा में कोरोना से अब तक 5778 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 1339 लोगों में अभी भी कोरोना एक्टिव है जबकि 139 लोगों की मौत भी हो चुकी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 5, 2020, 1:42 PM IST
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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के सबसे बड़े जनपद कांगड़ा (Kangra) में कोरोना किस कदर बेलगाम होता जा रहा है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि यहां आए रोज सौ से भी ज़्यादा कोरोना (Corona Virus) केसीज़ सामने आ रहे है. आलम ये है कि सरकार प्रशासन ने कोरोना के लिये स्टैंड बाय में बना रखे कोविड केयर हॉस्पिटल (Hospital) और सेंटर तो बहुत हैं, मगर उनमे केयर करने वालों की दिन प्रतिदिन कमी होती जा रही है, जिसका ठीकरा कई मर्तबा यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को संभालने वाले स्वास्थ्य विभाग के ऊपर फोड़ा जाता रहा है.

न्यूज 18 ने की पड़ताल
न्यूज़18 ने अपने स्तर पर इस स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें जो खुलासा हुआ है, वो वाकई हैरत कर देने वाला है. क्योंकि जिस स्वास्थ्य विभाग के कांधों पर दूसरी बीमारियों से ग्रसित रोगियों को तंदरुस्त करने समेत कोरोना से लड़ने का जिम्मा मिला है, उसने ख़ुद स्वास्थ्य की व्यवस्था की चूले हिला कर रख दी हैं. आलम ये है कि इस वक़्त कांगड़ा के स्वास्थ्य विभाग में जो भी मैन पावर है उसमें एक तिहाई मैन पावर तो ख़ुद कोरोना से लड़ते-लड़ते उसकी चपेट में आ चुकी है.

कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ गुरदर्शन गुप्ता.

डॉक्टरों समेत स्टाफ हो रहा संक्रमित


फ़िलहाल. कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग में 177 मैन पावर कोरोना की गिरफ्त में है जिसमें से 108 डॉक्टर, 62 के करीब नर्सिंग स्टाफ और अन्य समेत 7 चपरासी कोरोना से जंग लड़ रहे हैं जबकि हर रोज स्वास्थ्य विभाग से कोई न कोई कर्मचारी-अधिकारी कोरोना की गिरफ्त में आ रहा है. आलम तो ये है कि फ़िलहाल CMO कांगड़ा को छोड़ दें तो बाकी उनका कार्यालय भी बैसाखियों के ही सहारे चल रहा है. यानी कांगड़ा में कोरोना के चलते नगर निगम, SP कार्यालय, DC कार्यालय, शिक्षा बोर्ड समेत कई ऐसे कार्यालय हैं, जहां एक साथ दर्जन भर कोरोना पॉजीटिव के मामले सामने आने के बाद संक्रमण लगातार फेल रहा है. CMO कार्यालय एकमात्र ऐसा कार्यालय है, जहां दर्जन भर मामले सामने आने के बावजूद भी उन्हें बन्द करना तो दूर बाकायदा दूसरे डिपार्टमेंट्स के तहत आने वाले कोरोना वॉरियर्स को बचाने की जिम्मेदारियों का बोझ और ज़्यादा डाल दिया गया है.

स्टाफ भी खड़े करने लगा हाथ
आलम ये है कि इस वक़्त कांगड़ा स्वास्थ्य विभाग अपने बचे हुये कर्मचारियों और मैन पावर के साथ अभी भी मैदान में डटा हुआ है बावजूद इसके इन दिनों कोरोना महामारी समेत दूसरी बीमारियों की चपेट में आने वाले मरीजों-तीमारदारों के आक्रोश के मामले भी लगातार सामने आ रहे हैं. ऐसे में अब अंदरखाते स्वास्थ्य महकमे में भी हड़कम्प मचने शुरू हो चुका है और स्टाफ के सदस्य अब हाथ खड़े करके स्ट्राइक तक की चेतावनियां देने शुरू कर चुके हैं, कमोबेश ये स्थिति अकेले कांगड़ा में नहीं, बल्कि समूचे प्रदेश में बनी हुई है. यही वजह है कि अब सरकार को अपने गुप्तचर विभाग की ओर से मिल रही जानकारियों को मद्देनजर रखते हुये आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज और कोविड हॉस्पिटल में कोरोना महामारी से प्रोटेक्ट करने के लिये अतिरिक्त स्टाफ को तैनात करना पड़ रहा है, जिसके तहत अभी हाल में टांडा मेडिकल कॉलेज कांगड़ा और धर्मशाला में 50 के करीब स्टाफ नर्सिज और पैरा मेडिकल स्टाफ की आउटसोर्सिंग करनी पड़ी है.

पूरे जिले का हाल
फिलहाल, कांगड़ा में कोरोना से अब तक 5778 लोग संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 1339 लोगों में अभी भी कोरोना एक्टिव है जबकि 139 लोगों की मौत भी हो चुकी है. कांगड़ा के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ गुरदर्शन गुप्ता की मानें तो यहां स्वास्थ्य सुविधाओं को सुचारू करने में उनका स्टाफ दिन रात एक किए हुये है. उनका एक तिहाई स्टाफ कोरोना से लड़ रहा है बचे हुये लोगों के सहारे सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही हैं. ऐसे में लोगों से भी अपील की जाती है कि वो इस मुश्किल घड़ी में विभाग का दर्द भी समझें और सरकार की गाइडलाइन को फ़ॉलो करते हुये इस महामारी से भी बचें ताकि इस महामारी का खात्मा किया जा सके.
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