कोरोना से पहले पति की मौत, फिर बेटे का निधन; परिवार में बची केवल सास-बहू

पति और बेटी की मौत के बाद केवल अब परिवार में सास और बहू ही बची है.

पति और बेटी की मौत के बाद केवल अब परिवार में सास और बहू ही बची है.

Coronavirus in Kangra: हिमाचल प्रदेश के गांवों में भी कोरोना ने लोगों की जान लेना शुरू कर दिया है. गांवों में बदहाल अस्पताल, डॉक्टर्स की कमी और अन्य असुविधाओं के कारण मरीज को अस्पताल पहुंचे में चार से पांच घंटे लगते हैं. ऐसे में वह रास्ते या घर में ही दम तोड़ देता है.

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पालमपुर. हिमाचल प्रदेश के गांवों में भी अब कोरोना कहर बनकर टूट रहा है. ग्रामीण इलाकों में काफी संख्या में लोग संक्रमित हो रहे हैं. कांगड़ा (Kangra) के पालमपुर से झकझोरने वाली खबर है. यहां पहले महिला के पति की कोरोना ने जान ले ली फिर, बेटे का भी निधन हो गया. तीन महीने में परिवार बिखर गया. दोनों कमाने वाले लोगों की जिंदगी कोरोना ने छीन ली.

जानकारी के अनुसार, पालमपुर के भंवारना क्षेत्र के समाना गांव में अब इस परिवार में केवल सास और बहू ही बची हैं. संतोष और रुचि बताती हैं कि कैसे कोरोना ने उनके परिवार को उनसे छीन लिया. संतोष कहती हैं उनके पति राकेश को बुखार के बाद छाती में इन्फेक्शन हो गया था और टांडा मेडिकल कॉलेज में सात दिन इलाज के बाद उनकी मौत हो गई.

संतोष का बेटा अनिल गुलेरिया (39) प्रिटिंग प्रेस में डिजाइनर था और पांच मई को कोरोना संक्रमित हो गया. पांच दिन इलाज के बाद उसकी भी धर्मशाला कोविड अस्पताल में मौत हो गई. अब परिवार में 33 साल की बहू और वहीं बची हैं. दोनों कमाने वाले चले गए हैं.

गांवों में होने लगी मौतें
हिमाचल प्रदेश के गांवों में अब कोरोने से मौतें होने लगी हैं. गांव में अस्पतालों की हालत बदहाल है. डॉक्टर्स नहीं हैं. वहीं, ऑक्सीजन की फैसिलिटी नहीं है. मरीज को अस्पताल पहुंचे में चार से पांच घंटे लगते हैं. ऐसे में मरीज रास्ते या घर में दम तोड़ देता है. सरकार की नाकामियां जनता पर भारी हैं.गांव के कई निवासियों ने कहा कि राज्य सरकार को ऐसे परिवारों की मदद करने और कोविड पीड़ितों को अनुग्रह राशि देने के लिए एक नीति बनानी चाहिए.

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