Kangra: कोरोना काल में गाय का गोबर बना महिलाओं के लिए जीविका का सहारा
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Kangra: कोरोना काल में गाय का गोबर बना महिलाओं के लिए जीविका का सहारा
कांगड़ा में गाय के गोबर से बन रहे उत्पाद.

Cow Dung use in Kangra: सिद्धि विनायक गौ सेवा समिति के चेयरमैन एवं मास्टर ट्रेनर सुनील शर्मा ने कहा कि बीडीओ देहरा ने बेहतर प्रयास करते हुए स्वयं सहायता समूहों बारे बताया. धूप देसी गाय के गोबर से बनता है और इसमें जड़ी बूटियां भी डाली जाती हैं. लोगों का इन प्राडक्ट के प्रति अच्छा रुझान है.

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  • Last Updated: September 11, 2020, 2:13 PM IST
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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में गाय के गोबर ने महिलाओं की किस्मत बदली है. गाय के गोबर से महिला को स्वरोजगार मिला है. महिलाएं गोबर (Dung) से धूप व अगरबत्ती बना रही हैं. यह पहल राष्ट्रीय आजीविका योजना के तहत देहरा विकास खंड ने की है. देहरा (Dehra) ब्लॉक की ओर से इसके लिए महिलाओं को बकायदा मास्टर ट्रेनर सुनील शर्मा के माध्यम से प्रशिक्षण दिलाया जा रहा है. सिद्धि विनायक गौ सेवा समिति मुहल स्थित गौशाला (Cow Shed) के गोबर को एकत्रित करके धूप व अगरबत्ती बनाने की पहल की गई है, जिसके लिए देसी गाय के गोबर का इस्तेमाल किया जा रहा है.

शुरुआत में कम रूझान
शुरूआत में 2 महिलाओं को ट्रेनिंग दी गई, जबकि वर्तमान में 20 के लगभग महिलाएं प्रशिक्षित होकर इस कार्य में जुटी हैं. देशी गाय के गोबर को 70 फीसदी और गूगल धूप,जटामासी, नखनांठ्ठद्ब, राल धूप, चंदन इत्यादि जड़ी बूटियों का 30 फीसदी मिश्रण बनाकर यह प्राडक्ट तैयार किए जा रहे हैं.

ब्लॉक अधिकारी ने लोगों को प्रेरित किया
बीडीओ देहरा डा. स्वाति गुप्ता ने कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बिकास खण्ड देहरा की यह पहल प्रदेश में अपनी तरह का पहला प्रयास है. ज्वालामुखी की सिद्धि विनायक गौशाला में महिलाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है. प्रयास रहेगा कि इस प्रोजेक्ट को घर-घर पहुंचाया जाए और इनके द्वारा निर्मित धूप व अगरबत्ती की मार्केटिंग की उचित व्यवस्था की जाए. उन्होंने कहा कि यहा पर निर्मित धूप को मन्दिरों में ट्रस्ट के माध्यम से बेच कर लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाया जाएगा. प्रशिक्षित महिला राजकुमारी ने बताया कि हम अन्य महिलाओं के साथ मिलकर देसी गाय के गोबर से धूप व अगरबत्ती बना रहे हैं. इसके लिए प्रशिक्षण प्राप्त किया गया है. गोबर के साथ इसमें जड़ी बूटियां भी मिलाई जा रही हैं. कोरोना काल में यह कार्य रोजगार का साधन बन रहा है.



प्रशिक्षुओं का क्या है मानना
प्रशिक्षु महिला अनुराधा का कहना है कि कोरोना महामारी के दौरान वह बाहर कार्य नहीं कर सकती हैं, इसलिए वह घर पर ही गाय के गोबर से धूप बनाने का प्रशिक्षण ले रही हैं. उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूह के माध्यम से यह कार्य किया जा रहा है और कार्य सीखने के उपरांत अन्य लोगों को भी यह कार्य सिखाया जाएगा, ताकि वह स्वरोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सके उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण के लिए सरकार का आभार व्यक्त करती है.

मास्टर ट्रेनर की क्या है राय
सिद्धि विनायक गौ सेवा समिति के चेयरमैन एवं मास्टर ट्रेनर सुनील शर्मा ने कहा कि बीडीओ देहरा ने बेहतर प्रयास करते हुए स्वयं सहायता समूहों बारे बताया. धूप देसी गाय के गोबर से बनता है और इसमें जड़ी बूटियां भी डाली जाती हैं. लोगों का इन प्राडक्ट के प्रति अच्छा रुझान है.
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