भारतीय ज्ञान विनाशकारी भावनाओं से निपटने के लिए उपयोगी: दलाई लामा
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भारतीय ज्ञान विनाशकारी भावनाओं से निपटने के लिए उपयोगी: दलाई लामा
दलाई लामा इनदिनों ऑनलाइन अपने अनुयायियों को संबोधित करते हैं.

दलाई लामा (Dalai Lama) ने कहा कि जब तक हम बुद्धत्व प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक हममें से प्रत्येक छात्र कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहते हैं.

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धर्मशाला. बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा (Dalai Lama) कोरोनाकाल (Corona Crisis) में दुनियाभर में मौजूद अपने अनुयायियों को ऑनलाइन आध्यात्मिक और सामाजिक प्रवचन देकर प्रेरित कर रहे हैं. बौद्ध धर्मगुरू ने कहा है कि भारतीय ज्ञान हमें अपनी विनाशकारी भावनाओं से निपटने के बारे में बताता है. 20वीं शताब्दी में महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) ने राजनीतिक संघर्ष के रूप में अहिंसा के अभ्यास को बढ़ावा दिया. उन्होंने अपने बाद आए कई लोगों को इससे प्रभावित किया जैसे कि आर्कबिशप डेसमंड टूटू, नेल्सन मंडेला और मार्टिन लूथर किंग.

दलाई लामा धर्मशाला के मैक्लोडगंज स्थित अपने आवास से ग्लोबल एसोसिएशन ऑफ फिजिशियन ऑफ इंडियन ओरिजिन (जीएपीआईओ) और योग स्कॉलर्स पीजीआईएमईआर के प्रोफेसर डॉ अक्षय आनंद के साथ वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से चर्चा कर रहे थे.

दलाई लामा ने कहा कि जब तक हम बुद्धत्व प्राप्त नहीं कर लेते, तब तक हममें से प्रत्येक छात्र कुछ नया सीखने के लिए तैयार रहते हैं. जहां तक स्वास्थ्य का संबंध है, यह न केवल हमारे शरीर से संबंधित है, बल्कि हमारे दिमाग और भावनाओं से भी संबंधित है. करुणा और परोपकार की भावना से हमें मानसिक शांति मिलती है.



उन्होंने कहा कि हमें भावनात्मक स्वच्छता के सिद्धांतों को अपनाने की आवश्यकता है. प्राचीन भारतीय ज्ञान के साथ आधुनिक शिक्षा के संयोजन से लाभ मिलता है. हर कोई एक शांतिपूर्ण दुनिया में सुखी जीवन जीना चाहता है, लेकिन एक ही समय में हमें बहुत सारी समस्याओं का सामना करना पड़ता है जो कि हमारी अपनी रचना है. उन्हें कम करना हमारे ऊपर है. भारत में हमारे पास अहिंसा और करुणा की प्राचीन परंपराएं रही हैं.
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