अपने 84 वें जन्मदिन पर दलाई लामा ने कहा-'कम से कम 100 साल तक जीने की गारंटी है'

धर्मशाला के मैक्लोडगंज स्थित बौद्ध मंदिर में धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन धूमधाम और पूरे उत्साह के साथ मनाया गया.

News18 Himachal Pradesh
Updated: July 6, 2019, 1:48 PM IST
अपने 84 वें जन्मदिन पर दलाई लामा ने कहा-'कम से कम 100 साल तक जीने की गारंटी है'
धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन धूमधाम और पूरे उत्साह के साथ मनाया गया
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Updated: July 6, 2019, 1:48 PM IST
धर्मशाला के मैक्लोडगंज स्थित बौद्ध मंदिर में धर्मगुरु दलाई लामा का जन्मदिन धूमधाम और पूरे उत्साह के साथ मनाया गया. दलाई लामा के 84वें जन्मदिन के अवसर पर मुख्य मंदिर में आयोजित कार्यक्रम में कांगड़ा के सांसद किशन कपूर भी शामिल हुए. उन्हें इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया था. तिब्बत प्रधानमंत्री डॉ लाबसांग सांगे और सांसद किशन कपूर ने केक काटकर धर्मगुरु दलाई लामा को उनके जन्मदिन पर बधाई दी. अपने जन्मदिन समारोह में उपस्थित हुए दलाई लामा ने कहा कि वह कम-से-कम 100 साल तक जीवित रहेंगे, इसकी गारंटी है.  उन्होंने कहा कि यह उनका दृढ़ संकल्प है. उन्होंने कहा, 'मेरी आयु 100 वर्ष के आसपास होगी.'

तिब्बतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में दलाई लामा का आशीर्वाद लिया

दलाई लामा ने कहा कि वह हमेशा ही भावुक लोगों और धर्म के लिए प्रार्थना करते हैं. उन्होंने कहा कि वह तिब्बतियों समेत अन्य लोगों की मदद करने में सक्षम रहे हैं. उन्होंने कहा कि वह अधिक समय तक जीवित रहेंगे तब वह अधिक-से-अधिक संवदेनशील प्राणियों और बुद्ध के शिक्षण की सेवा कर सकेंगे. जन्मदिन समारोह के दौरान तिब्बतियों ने पारंपरिक वेशभूषा में दलाई लामा का आशीर्वाद प्राप्त किया. विदेश से आए पर्यटकों ने भी दलाई लामा के दर्शन किए और उनके दीर्घायु होने की कामना की.

6 वर्ष की उम्र से ही मठ की शिक्षा दी जाने लगी

बता दें कि14वें दलाई लामा तेनजिन ग्यात्सो का जन्म 6 जुलाई 1935 में तिब्बत के आमदो क्षेत्र के तक्तसर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था. इनका असली नाम ल्हामो दोंडुब है. जब वह 2 साल के थे तब इन्हें 13वें दलाई लामा थुबतेन ग्यात्सो का अवतार माना गया. फिर कुछ समय बाद ही उन्हें 14वां दलाई लामा घोषित कर दिया गया. महज 6 वर्ष की उम्र से ही दलाई लामा को मठ की शिक्षा दी जाने लगी थी.

14वें दलाई लामा के रूप में वह 29 मई 2011 तक तिब्बत के राष्ट्राध्यक्ष रहे थे. इस दिन उन्होंने अपनी सारी शक्तियां तिब्बत की सरकार को दे दी थी और अब वह सिर्फ तिब्बती धर्मगुरु हैं. वर्ष 1949 में चीन ने तिब्बत पर हमला किया और इस हमले के एक वर्ष बाद यानी वर्ष 1950 में दलाई लामा से तिब्बत की राजनीतिक विरासत को संभालने के लिए अनुरोध किया गया.

सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन
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दलाई लामा के जन्मदिन समारोह के दौरान कलाकारों ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुतियां भी दी. कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार के वर्तमान और पुराने करीब 300 सदस्यों ने भाग लिया.  बीते शुक्रवार 5 जुलाई को मैक्लोडगंज के बौद्ध मंदिर में 14वें दलाई लामा के दीर्घायु होने के लिए विशेष प्रार्थना सभा का भी आयोजन किया गया था. इस प्रार्थना सभा में दलाई लामा और निर्वासित पूर्व प्रधानमंत्री प्रों सामदोंग रिंपोछे उपस्थित थे.

इस अवसर पर प्रो. रिंपोछे ने कहा कि प्रार्थना सभा में सेंट्रल तिब्बतियन प्रशासन में सालों से काम कर रहे लोगों ने भाग लिया. प्रो. रिंपोछे ने कहा कि हम सभी की प्रार्थना है कि हमारे धर्मगुरु दलाई लामा स्वस्थ रहें और वह दीर्घायु हों.

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First published: July 6, 2019, 1:32 PM IST
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