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शहीद के मां-पिता बोले- 9 साल से सरकारी मदद का इंतजार, मिट्टी का बर्तन बेचकर चल रहा गुजारा

शहीद पंकज बढियाल के पिता मिट्टी के बर्तन बेचकर गुजारा करते हैं

शहीद पंकज बढियाल के पिता मिट्टी के बर्तन बेचकर गुजारा करते हैं

शहीद पंकज बढियाल के मां-पिता ने तत्कालीन हिमाचल की बीजेपी सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने किसी को आज तक नौकरी नहीं दी है.

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    हिमाचल प्रदेश में धर्मशाला के देहरा में आज शहीद की 9वीं पुण्यतिथि पर जुटे लोग बहुत रोए. इस मौके पर शहीद पंकज बढियाल के मां-पिता का दर्द छलक उठा. उन्होंने तत्कालीन हिमाचल सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया और कहा कि सरकार ने किसी को आज तक नौकरी नहीं दी. गौरतलब है कि शहीद के मां-पिता को मिट्टी का बर्तन बेचकर गुजर-बसर करना पड़ रहा है.

    9 साल पहले हुई थी शहादत

    देहरा के एसडीएम धनवीर ठाकुर के साथ वहां बहुत से लोगों ने शहीद पंकज बढियाल की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया. ग्राम पंचायत धवाला के सनोट गांव का बेटा छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में नक्सलियों से हुई मुठभेड़ में आज के ही दिन 29 जून 2010 को पंकज बढियाल शहीद हो गया था.

    लोगों ने नम आंखों से पंकज को याद किया

    आज के ही दिन छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा में 26 जवान शहीद हुए थे. वहीं आज शहीद पंकज बढियाल के पैतृक गांव में परिजनों, ग्रामीणों, डीएवी स्कूल देहरा व स्थानीय प्रशासन ने नम आंखों से शहीद पंकज बढियाल को याद किया. इसके बाद डीएवी स्कूल देहरा के बच्चों द्वारा देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए गए. इस मौके पर डीएवी स्कूल द्वारा शहीद पंकज की याद में हर वर्ष होने वाले कार्यक्रम के खर्चा उठाने का ऐलान भी किया.

    अभी तक नहीं मिली किसी को भी नौकरी

    देहरा के सनोट गावं में रहने वाले पिता दिले राम बढियाल और माता सत्या देवी आज अपने बेटे की शहादत पर फूट-फूट कर रो रहे हैं. तत्कालीन हिमाचल सरकार के वादाखिलाफी के चलते पिता दिले राम खासे नाराज हैं. बूढ़े मां बाप के पास आज गुजर बसर करने के लिए न तो पेंशन है और न ही उनके परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी मिली है.

    सरकार की घोषणा पर नहीं हुआ आज तक अमल

    आज 9 वर्ष बाद भी सरकार की घोषणा मात्र घोषणा ही रह गई है. शहीद के पिता को मिट्टी के बर्तन बेचकर अपना गुजर बसर करना पड़ रहा है. उनका बड़ा बेटा एक निजी स्कूल में कार्यरत है. उस वक्त बीजेपी की धूमल सरकार थी.

    नक्सलियों के साथ मुठभेड़ में शहीद हुआ था जवान

    शहीद पंकज बढियाल का जन्म 27 जुलाई 1982 को उनके पैत्रिक गांव स्नोट में हुआ था. शहीद की पढ़ाई देहरा के श्रीमती इंदिरा गाँधी वरिष्ठ माध्यमिक स्कूल में हुई थी. बचपन से ही देशभक्ति का जज्बा दिल में लिए चंडीगढ़ में सीआरपीऍफ़ में फरवरी 2003 में भर्ती हो गए. उसके बाद उसकी पोस्टिंग भुवनेश्वर, आसाम, फैजाबाद और फिर छत्तीसगढ़ में हुई जहां दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में पंकज बढियाल शहीद हो गया.

    (देहरा से ब्रजेश्वर साकी की रिपोर्ट)

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