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धर्मशाला नगर निगम के पूर्व मेयर और पूर्व EO के खिलाफ विजिलेंस ने दर्ज की FIR

धर्मशाला नगर निगम के पूर्व मेयर और पूर्व EO के खिलाफ विजिलेंस ने दर्ज की FIR

पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी (ईओ) महेश दत्त शर्मा के खिलाफ विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी (ईओ) महेश दत्त शर्मा के खिलाफ विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

Dharamshala News: धोखाधड़ी और राज्य सरकार के राजस्व को चूना लगाने के इस मामले में पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी के खिलाफ अंडर सेक्शन 420, 120बी आईपीसी और तत्कालीन ईओ महेश दत्त शर्मा के खिलाफ अंडर सेक्शन 420, 120बी आईपीसी और 13 (2) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि इन पूर्व मेयर और तत्कालीन ईओ के खिलाफ वर्ष 2018 में नगर निगम के 11 पार्षदों ने एक शिकायत सौंपी थी. पार्षदों की शिकायत पर विजीलेंस ने इस मामले की जांच की, जिसमें इन दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला नगर निगम और तत्कालीन नगर परिषद धर्मशाला के भवन को रेंट में लेकर उसे बाद में निजी बैंक व फाईनेंस कंपनी को किराए में देने और मोटी कमाई करने के मामले में पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी और तत्कालीन कार्यकारी अधिकारी (ईओ) महेश दत्त शर्मा के खिलाफ विजिलेंस ने एफआईआर दर्ज कर ली है.

विजिलेंस ने इस मामले की जांच पूरी करने के बाद इन दोनों के खिलाफ स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला के थाना में धोखाधड़ी और सरकारी राजस्व को चूना लगाने के चलते विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इससे पूर्व, मामले की जांच पूरी करके जांच रिपोर्ट को विजिलेंस मुख्यालय शिमला भेज दी गई थी. रिपोर्ट में दोनों आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करने की मंजूरी सरकार से मांगी गई थी. इसकी पुष्टि स्टेट विजिलेंस एंड एंटी करप्शन ब्यूरो उत्तरी क्षेत्र धर्मशाला के एएसपी बलबीर सिंह जसवाल ने की है.

 सरकार को लगाया चूना

उन्होंने बताया कि धोखाधड़ी और राज्य सरकार के राजस्व को चूना लगाने के इस मामले में पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी के खिलाफ अंडर सेक्शन 420, 120बी आईपीसी और तत्कालीन ईओ महेश दत्त शर्मा के खिलाफ अंडर सेक्शन 420, 120बी आईपीसी और 13 (2) पीसी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि इन पूर्व मेयर और तत्कालीन ईओ के खिलाफ वर्ष 2018 में नगर निगम के 11 पार्षदों ने एक शिकायत सौंपी थी. पार्षदों की शिकायत पर विजीलेंस ने इस मामले की जांच की, जिसमें इन दोनों के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई है.

क्या हैं आरोप और कैसे की गड़बड़ी

पूर्व महापौर देवेंद्र जग्गी पर आरोप है कि वर्ष 2005 में नगर परिषद धर्मशाला की अंडर कंस्ट्रक्शन भवन को उन्हें लीज पर देने के लिए 29 अगस्त 2005 को हाउस ने प्रस्ताव पारित किया. हालांकि, प्रस्ताव में यह तय हुआ था कि उन्हें यह भवन 30 लाख सिक्योरिटी और 30 हजार प्रति माह 25 वर्षों के लिए लीज पर दिया जाए, लेकिन बाद में ईओ की मिलीभगत से नए टर्मस एंड कंडीशंस बनाकर और बिना नगर परिषद की मंजूरी के ही इस भवन को देवेंद्र जग्गी को हैंडओवर कर दिया गया. भवन पर कब्जा लेने के बाद देवेंद्र जग्गी ने प्रथम मंजिल को निजी बैंक आइसीआईसीआई तथा दूसरी मंजिल को बजाज एलांयस इंश्योरेंस कंपनी को लीज आउट कर दिया. किराए पर देने के बाद 14 दिसंबर 2006 से लेकर 31 दिसंबर 2019 तक देवेंद्र जग्गी ने आईसीआईसीआई से एक करोड़ 21 लाख 46 हजार 469 जबकि बजाज एलांयस से एक जनवरी 2009 से 31 दिसंबर 2019 के बीच 39 लाख 47 हजार 971 रुपये बतौर किराया लिया.

यानी उन्होंने एक करोड़ 60 लाख 94 हजार 620 रुपये इन दोनों कंपनियों से बतौर रेंट लिया है, जबकि जग्गी ने खुद नगर परिषद को महज 18 लाख 38 हजार 869 रुपये ही रेंट के तौर पर अदा किए, जिससे सरकार के राजस्व को बड़ा चूना लगाया गया है. इस मामले में पूर्व महापौर और ईओ के खिलाफ विजीलैंस द्वारा एफआईआर दर्ज करने के बाद अब दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. गौरतलब है कि तत्कालीन ईओ महेश दत्त अब सेवानिवृत हो चुके हैं.

Tags: Dharamshala News, Himachal Police, Himachal pradesh

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