आखिरकार 5 साल से क्यों लटका है धर्मशाला-मैकलोड़गंज रोपवे प्रोजेक्ट?

धर्मशाला में रोपवे का निर्माण लटका हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर)
धर्मशाला में रोपवे का निर्माण लटका हुआ है. (सांकेतिक तस्वीर)

Dharamshala Ropeway: एक तरफ सरकार ये कह रही थी कि इस साल जुलाई महीने में रोप-वे बनकर तैयार हो जायेगा तो वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि इसे फाइनल अप्रूवल साल 2017 में ही मिल गई थी, उसके बाद फाइनल इन प्रिंसीपल अप्रूवल साल 2019 में भी मिली थी.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश की दूसरी राजधानी धर्मशाला (Dharmshala) के पर्यटन (Tourism) स्थलों को पंख लगाने की कवायद यूं तो पांच साल पहले ही शुरू हो चुकी थी और यहां स्मार्ट सिटी के तहत कई ऐसी बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को लोगों के सामने इंट्रोड्यूज़ किया गया था, जिससे न केवल धर्मशाला में पर्यटन को पंख लगते, बल्कि इसकी ख्याति देश और दुनिया में भी और बढ़ती और यहां पर्यटकों (Tourist) की आमद में भी इजाफा होता बावजूद इसके उन बड़ी-बड़ी परियोजनाओं को आज भी पंख नहीं लग पाये हैं. नतीजतन, आज भी अधर में लटकी उन परियोजनाओं को कभी फॉरेस्ट क्लीयरेंस (Forest Clearance) के झोल में फंसा दिया जाता है तो कभी सियासत के समर में शस्त्रों के तौर पर प्रयोग कर लिया जाता है.

2016 में शुरू हुई थी योजना

धर्मशाला से मैकलोड़गंज को जोड़ने वाली करोड़ों की महत्वकांक्षी योजना रोप-वे का भी कमोवेश यही हाल है. साल 2016 में धर्मशाला से शुरू हुई ये परियोजना आज भी कई उतार-चढ़ाव के दौर से गुजर रही है. अधर में लटकी इस परियोजना ने  विगत तीन सालों में सियासतदानों के लिये मोहरे के तौर पर खूब लाभ पहुंचाया है. बावजूद इसके खुद ये अभी तक पूरी नहीं हो पाई है. हालांकि, बीते साल लोकसभा चुनावों के दौरान सत्तासीन सियासदानों ने इसे इस साल के जुलाई माह में लोगों के सपुर्द कर देने तक का वायदा कर रखा था, मगर दुर्भाग्यवश कोरोना ने रोप-वे की रस्सी को खंबों पर चढ़ने ही नहीं दिया. ये महत्वकांक्षी परियोजना पूरी होती या नहीं मगर सियासतदानों के वायदों के मुताबिक जनता से ज्यादा विपक्ष इस साल इस मुद्दे को लेकर सवाल खड़े कर सकता था, बावजूद इसके कोरोना ने उन वायदादारों के लिये ढाल के तौर पर खूब भूमिका निभा दी.



क्या बोले अधिकारी
ऐसे में अब वन विभाग के अधिकारियों ने इस बड़ी महत्वकांक्षी परियोजना को लेकर जो बयान दिया है, वो तो हुक्मरानों की करनी और कथनी की ही पोल खोल दे रहे हैं. एक तरफ सरकार ये कह रही थी कि इस साल जुलाई महीने में रोप-वे बनकर तैयार हो जायेगा तो वहीं दूसरी तरफ वन विभाग के अधिकारी कह रहे हैं कि इसे फाइनल अप्रूवल साल 2017 में ही मिल गई थी, उसके बाद फाइनल इन प्रिंसीपल अप्रूवल साल 2019 में भी मिली थी. बावजूद इसके अभी तक यूज़र एजेंसी इस पूरे मामले को लेकर एंटरटेन ही नहीं कर पाई है, यानी पूरा साल गुजर जाने के बावजूद भी यूज़र एजेंसी वन विभाग के समक्ष एप्रोच करने नहीं पहुंची कि आखिर केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा रोव-वे निर्माण को लेकर किस तरह के नियम और शर्तें जारी की गई हैं.
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