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हिमाचल के मिनी इजराइयल ने किया चुनाव का बहिष्कार, लोग बोले-नहीं बनी एक इंच सड़क

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 11, 2019, 6:02 PM IST
हिमाचल के मिनी इजराइयल ने किया चुनाव का बहिष्कार, लोग बोले-नहीं बनी एक इंच सड़क
ग्रामीणों ने उपचुनाव का बहिष्कार कर दिया है.

No Vote-No Development in Dharamshala: लोगों की मानें तो यहां न तो सड़क है न ही स्वस्थ्य का कोई साधन, शिक्षा और स्वरोजगार भी उनका उनके खुद के जुगाड़ से ही चल रही है.

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धर्मशाला. आजादी के बाद अस्तित्व में आई धर्मशाला (Dharamshala) विधानसभा क्षेत्र में भले ही अब तक भाजपा (Bjp) और कांग्रेस (Congress) का वर्चस्व रहा हो और दोनों ही पार्टी के नेता धर्मशाला के समग्र विकास की बात करते हों, लेकिन अंतर्रराष्ट्रीय स्तर पर ख्याती प्राप्त धर्मशाला की जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत है. महज 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले वार्-दो की जनता आज भी मूलभूत सुविधाओं से इस कदर महरूम है कि उन्हें आज भी आदिवासियों सी जिंदगी गुजर-बसर करनी पड़ रही है. यही वजह है कि आज यहां के ग्रामीणों ने उपचुनावों (By-Elections) का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया है.

सैलानियों के लिए चर्चित जगह धर्मशाला
नगर निगम धर्मशाला (Dharamshala Municipal Corporation) के वार्ड नंबर दो में धर्मकोट (Dharamkot) का वो इलाका शामिल है, जिसे मिनी इजराइल का भी तमगा हासिल है. भागसू जिसे पर्यटन क्षेत्र के मानचित्र में भागसू वाटरफॉल के लिए जाना जाता है, यहां हर साल लाखों लोग इस इलाके की खूबसूरती और शांत वादियों के दीदार के लिए पहुंचते हैं. इसके ठीक विपरीत यहां के सियासतदान यहां महज वोट मांगने पहुंचते हैं, उसके बाद यहां की चढ़ाई चढ़ने में उन्हें बेहद मुश्किल प्रतीत होती है. शायद यहीं वजह है कि आज अप्पर भागसू, धर्मकोट, हैणी, रक्कड़, मटेड़, खताड़ी और धुपनाला गांव के सैकड़ों लोगों ने इन दिनों हो रहे उपचुनावों के बहिष्कार करने का मन बना लिया है.

ग्रामीणों ने उपचुनावों का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया है.
ग्रामीणों ने उपचुनावों का बहिष्कार करने का फैसला कर लिया है.


लोगों ने निकाली पदयात्रा
इसके लिए बाकायदा इनकी ओर से पदयात्रा कर रैली भी निकाली गई, ताकि वो अपने मंसूबों से वोट मांगने आने वाले हर उम्मीदवारों और पार्टियों तक अपना मनसा पहुंचा सकें. इन ग्रामीणों की मानें तो आजादी के बाद इन्होंने धर्मशाला की कायापल्ट होती देखी, मगर धर्मशाला के महज़ 15 किलोमीटर के दायरे में अनदेखी के सिवाय और कुछ देखने को नहीं मिला. लोगों की मानें तो यहां न तो सड़क है न ही स्वस्थ्य का कोई साधन, शिक्षा और स्वरोजगार भी उनका उनके खुद के जुगाड़ से ही चल रही है.

धर्मशाला: प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण.
धर्मशाला: प्रदर्शन करते हुए ग्रामीण.

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धर्मशाला में कई सुविधाएं, लेकिन यह इलाका पिछड़ा
धर्मशाला प्रदेशभर का वो शहर है जहां सुविधाओं की लिहाज़ से हर आयाम हैं, यहां अंतर्राष्ट्रीय स्तर के खेल ट्रैक, क्रिकेट स्टेडियम और खुद बौद्ध धर्मगुरू दलाईलामा निवास करते हैं. यहां निर्वासित तिब्बत सरकार की संसद, आजादी के बाद बनने वाली सूबे की पहली नगर निगम का तमगा हासिल है, सूबे की दूसरी राजधानी है, स्मार्ट सिटी के दायरे में भी धर्मशाला का नाम है. दुनिया के मानचित्र में इसे पर्यटन नगरी के नाम से भी ख्याति हासिल है. बावजूद इसके सरकारी स्तर पर यहां की आवाम की अंदरूनी हालत क्या हैं. लोगों का कहना है कि इलाके में एक इंच सड़क नहीं बन पाई है.

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First published: October 11, 2019, 5:03 PM IST
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