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तिब्बती-बौद्ध धर्म का ठिकाना है धर्मशाला, पर्यटन के लिहाज से भी है महत्वपूर्ण

धर्मशाला दलाई लामा का निवास स्थल और निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी है

धर्मशाला दलाई लामा का निवास स्थल और निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी है

धर्मशाला बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा का निवास स्थल और निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी है. भारत सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के अंतर्गत धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होने वाले सौ भारतीय शहरों में चुना गया है

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    धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) की शीतकालीन राजधानी धर्मशाला (Dharamshala) है. यह कांगड़ा जिले का मुख्यालय है, और कांगड़ा नगर से सोलह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. धर्मशाला के मैक्लॉडगंज उपनगर में केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के मुख्यालय हैं, और इस कारण यह दलाई लामा का निवास स्थल और निर्वासित तिब्बती सरकार की राजधानी है. भारत सरकार के स्मार्ट सिटीज मिशन के अंतर्गत धर्मशाला को स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित होने वाले सौ भारतीय शहरों में चुना गया है.

    मान्यता है कि नगर का नाम धर्मशाला शब्द से उत्पन्न हुआ है. यह शहर वर्ष 1849 में कांगड़ा में स्थित सैन्य छावनी के लिए अस्तित्व में आया. वर्ष 1855 में धर्मशाला को कांगड़ा जिले का मुख्यालय घोषित किया गया था. धर्मशाला में सिविलियन और छावनी क्षेत्र की बढ़ती चहल-पहल को देखते हुए यहां सुविधाएं लोगों को मुहैया करवाने के लिए नगर परिषद बनाने का विचार बना था. वर्ष 1905 और 1986 के भूकंप से धर्मशाला शहर को काफी नुकसान पहुंचा था. 1926 से 1947 के बीच यहां इंटर कॉलेज सहित महाविद्यालय खुला. वहीं वर्ष 1935 में धर्मशाला में सिनेमा हाल भी खुला. बढ़ते समय के साथ-साथ सामाजिक सुधारों के साथ संगीत, साहित्य और कला के क्षेत्र में भी धर्मशाला पीछे नहीं रहा. 1960 से तिब्बती बौद्ध गुरु दलाई लामा का मुख्यालय भी धर्मशाला में स्थित है.

    इतिहास
    कांगड़ा क्षेत्र में अंग्रेजों के आगमन से पहले धर्मशाला और इसके आसपास के क्षेत्रों में दो हजार तक कटोच राजवंश का शासन था. वर्ष 1810 में सिख राजवंश के महाराज रणजीत सिंह और कटोच राजा संसार सिंह कटोच के मध्य हुई ज्वालामुखी की संधि के बाद कटोच केवल कांगड़ा क्षेत्र में स्थानीय जागीरदार रह गए. 1848 में क्षेत्र पर अंग्रेजों ने कब्जा जमा लिया था. 1849 में कांगड़ा जिले के अंदर एक फौजी छावनी के लिए धौलाधार पर्वत की ढलानों पर एक स्थान को चुना गया, जहां एक हिंदू धर्मशाला स्थित थी.

    जलवायु
    धर्मशाला नगर की जलवायु उप-उष्ण कटिबंधीय है. यहां का औसत तापमान दस डिग्री सेल्सियस से 35 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. यहां जनवरी का महीना सबसे ठंडा और जून सबसे गर्म माह होता है. मॉनसून के दौरान अधिकतर बारिश जुलाई से सितंबर माह में होती है. यहां कभी-कभार बर्फ भी गिरती है बर्फ की ढकी धौलाधार श्रंखला, हरे-भरे जगंलों से परिपूर्ण यहां का पर्यावरण, सुहावना मौसम और घाटी का विस्तृत एवं विहंगम दृश्य धर्मशाला के दृश्य को अत्यंत मनमोहक बना देता है.

    पर्यटन स्थल
    धर्मशाला तिब्बती शरणार्थियों का निवास-स्थान है. यह नगर ऐतिहासिक डल झील, खनियारा और कंजार महादेव मेले के लिए जाना जाता है. भागसूनाग, कुणाल पत्थरी और चिन्मन्या जैसे हिंदुओं के मंदिर यहां या शहर के पास स्थित हैं. चामुंडा देवी, कांगड़ा का बृजेशवरी, ज्वालामुखी और चिंतपूर्णी मंदिर भी नगर के पड़ोस में स्थित है. इन धार्मिक स्थलों के अलावा यह पालमपुर, शोभा सिंह आर्ट गैलरी, अंदरेटा और बैजनाथ के पर्यटन स्थलों के लिए भी आधार शिविर का कार्य करता है.

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