कांगड़ा में चरस तस्करी में दोषी को 11 साल की सजा, 1 लाख रुपये जुर्माना

हिमाचल में नशे का कारोबार.
हिमाचल में नशे का कारोबार.

Drugs in Himachal: मकान पर छापामारी की तो बैड बॉक्स के अंदर गत्ते के डिब्बे में एक किलो 200 ग्राम चरस बरामद की. इसके अलावा, शेविंग किट से 20 हजार रुपये बरामद किए.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में एक चरस तस्कर (Drugs Peddlers) को 11 साल की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने दोषी पर एक लाख रुपये जुर्माना भी ठोका है. जुर्माना ना देने की सूरत में दो साल का अतिरिक्त सश्रम कारावास (Jail) काटना होगा.

क्या है मामला

जिला न्यायावादी कांगड़ा राजेश वर्मा के मुताबिक, सात जुलाई, 2016 को दोपहर डेढ़ बजे के करीब एएसआई देस राज अपनी टीम सहित 32-मील में गश्त कर रहे थे. इस दौरान उन्हें गुप्त सूचना मिली कि भाली निवासी लाताद्दीन अपने रिहायशी मकान में चरस बेचने का धंधा कर रहा है. पुलिस ने पंचायत प्रधान व उपप्रधान की मौजूदगी में जब लाताद्दीन के रिहायशी मकान पर छापामारी की तो बैड बॉक्स के अंदर गत्ते के डिब्बे में एक किलो 200 ग्राम चरस बरामद की. इसके अलावा, शेविंग किट से  20 हजार रुपये बरामद किए. मामला विशेष न्यायाधीश की अदालत पहुंचा. इस केस की पैरवी पहले उप जिला न्यायावादी संदीप अग्निहोत्री और बाद में उप जिला न्यायावादी एलएम शर्मा ने की. केस में कुल 16 गवाह पेश हुए, जिसमें दो गवाह बचाव पक्ष के थे. दोष सद्ध होने पर भाली निवासी को 11 साल का सश्रम कारावास व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है.



एक अन्य मामले में भी सजा
जिला एवं सत्र न्यायाधीश जेके शर्मा की अदालत ने अपने सगे भाई को गोली मारने की कोशिश करने पर गगल निवासी नरेश कुमार को धारा 308 आइपीसी के तहत दोष सिद्ध होने पर कारावास व जुर्माने की सजा सुनाई है. फैसले के मुताबिक जितने समय तक जेल में रहा उस अवधि तक की सजा व 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. इसमें दोषी कारावास की सजा भुगत चुका है. 13 जून, 2010 को सुबह 8 बजकर 40 मिनट पर भूपिंद्र सिंह अपने भाई विरेंद्र कुमार, माता कमला देवी और ट्रैक्टर चालक भूपेंद्र कुमार के साथ बिजाई करने के लिए खेतों में पहुंचे, जोकि नरेश कुमार के घर के सामने है. तब उसी का सगा भाई नरेश कुमार अपने घर के बरामदे में आया. जब भूपिंद्र सिंह व उसके परिवार ने बिजाई के साथ खेतों में पड़े बांसों को हटाना जारी रखा तो नरेश कुमार सीधा कमरे में गया और दो नाली टोपीदार बंदूक निकाल तानकर फायर करने की कोशिश की तो भूपिंद्र सिंह अपने बचाव में खेतों के साथ बने शौचालय की आड़ ले ली थी.
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