लाइव टीवी

इस गांव में नहीं मनाई जाएगी दिवाली, आज भी पूर्वजों को दिया वचन निभा रहे लोग

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 26, 2019, 6:07 PM IST
इस गांव में नहीं मनाई जाएगी दिवाली, आज भी पूर्वजों को दिया वचन निभा रहे लोग
पालमपुर तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले गांव अटियाला दाई में सदियों से दिवाली नहीं मनाई जाती है.

प्रदेश की पालमपुर तहसील के अंतर्गत पड़ने वाले गांव अटियाला दाई में एक समुदाय में दीपावली को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखता है.

  • Share this:
धर्मशाला. देशभर में दीपावली के त्योहार को लेकर एक ओर जहां तैयारियां अपने चरम पर है. बाजारों में चारों ओर दीप ही दीप नजर आ रहे हैं. वहीं प्रदेश की पालमपुर तहसील (Palampur Block) के अंतर्गत पड़ने वाले गांव अटियाला दाई (Atiyali Dai Village) में एक समुदाय में दीपावली (Dipawali)  को लेकर कोई उत्साह नहीं दिखता है. यहां पर दीपावली को लेकर सदियों पूर्व गांव वालों द्वारा अपने एक पूर्वज को दिए वचन का भय आज भी लोगों को डराता है. हांलाकि, आज की युवा पीढ़ी उस वचन को भूलती जा रही है. इसके बावजूद गांव में तरह तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म रहता है.

इस गांव में भयानक बीमारी फैल गई थी

गांव के बर्जुगों के अनुसार इस गांव में करीब सदियों पहले कोई भयानक बीमारी सभी गांववासियों में फैल गई थी. गांव के एक बूढे को सपना आने पर उसने उस बीमारी से गांव को निजात दिलवाने के लिए दीपावली के दिन गांव वालों से एक गड्ढा खुदवाया और उसमें समाधि ले ली थी. समाधि लेने वाले बुजुर्गों ने गांव वालों से एक वचन लिया था कि इसके बाद कोई यहां पर दीपावली का पर्व मनाएगा तो उसका दिया वचन श्राप बन जाएगा और पूरे गांव में बीमारी फैल जाएगी. उसी समय से इस गांव में उस बीमारी का अंत हो गया. उस अपने पूर्वज के वचन को एक मान्यता के रूप में गांव वालों ने स्वीकार कर लिया और गांव वालों ने दीपावली का पर्व मनाना बंद कर दिया.

अब छोटे बच्चे थोड़ा बहुत पटाखा जला लेते हैं

आज से करीब 15-20 वर्ष पूर्व तक तो गांव में दीपावली के पर्व का कोई नामलेवा भी नहीं मिलता था, लेकिन अब पढ़ी लिखी युवा पीढ़ी और छोटे बच्चे पटाखे थोड़ी-बहुत चला लेते हैं. गांव वालों के अनुसार गांव में बूढ़े बर्जुग अपने पूर्वज को दिए वचन को आज भी याद रखते हैं और उस वचन को श्राप न बनाने की दुहाई देते हैं. आज भी गांव में दीपावली पर्व के आगमन को लेकर कोई साफ-सफाई और रंगोली वगैरह नहीं दिखाई देती है. इस गांव के लोगों में मिठाई आदि को लेकर कोई विशेष उत्साह देखने को नहीं मिलता है.

यह भी पढ़ें: प्रेरणादायक: 22 वर्षों से प्लास्टिक के कचरे से सजावटी सामान बना रही हैं कल्पना

राधा-मीना की रोटियों में क्या खास है, जिसे खाने के बाद ये बड़े नाम हुए दीवाने

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए धर्मशाला से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 26, 2019, 6:00 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...