हैप्पी बर्थ-डे टू शांता कुमार: पंच से हिमाचल के सीएम की कुर्सी का सफर

News18 Himachal Pradesh
Updated: September 12, 2019, 12:03 PM IST
हैप्पी बर्थ-डे टू शांता कुमार: पंच से हिमाचल के सीएम की कुर्सी का सफर
शांता कुमार दो बार हिमाचल के सीएम रहे हैं.

शांता कुमार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह खाद वह उपभोक्ता मामले के मंत्री बने. साल 1999 से 2002 तक वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रायल के मंत्री भी शांता कुमार को बनाया गया. साल 2008 में उन्हें राज्यसभा के लिए भी चुना गया. इसके बाद वह 2014 में कांगड़ा से सांसद बने.

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धर्मशाला.हिमाचल प्रदेश की सियासत की बात जहां होगी, शायद ही हो कि वहां शांता कुमार का जिक्र ना हो. हो भी, क्यों ना, शांता कुमार (Shanta Kumar) हिमाचल के दो बार के सीएम रहे हैं. केंद्रीय राजनीति में भी इनकी अच्छी पैठ रही है. अब शांता कुमार ने भले ही सक्रिय राजनीति से सन्यास ले लिया है, लेकिन हिमाचल (Himahal Pradesh) और कांगड़ा की सियासत में अब भी परदे के पीछे और चाणक्य की भूमिका में शांता कुमार नजर आते रहते हैं.

पहले गैर कांग्रेसी सीएम
शांता कुमार का जन्म 12 सितंबर 1934 को जगन्नाथ शर्मा और कौशल्या देवी के घर हुआ. पंडित के घर पैदा होने वाले शांता कुमार को आज हिमाचल के अलावा पूरा देश जानता है. शांता कुमार हिमाचल के दो बार के सीएम और इसके अलावा उन्हें हिमाचल में पहले गैरकांग्रेसी सीएम बनने का गौरव भी हासिल है.

शिक्षा: प्रांरभिक शिक्षा के बाद शांता कुमार ने जेबीटी की पढ़ाई की और एक स्कूल में टीचर लग गए. लेकिन आरएएस में मन लगने की वजह से दिल्ली चले गए. वहां जाकर संघ का काम किया और ओपन यूनिवसर्सिटी से वकालत की डिग्री हासिल की.

राजनीतिक करियर: शांता कुमार ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत पंच के चुनाव से की. शांता कुमार ने 1963 में पहली बार गढ़जमूला पंचायत से जीते थे. उसके बाद वह पंचायत समिति के भवारनां से सदस्य नियुक्त किए गए. बाद में 1965 से 1970 तक कांगड़ा जिला परिषद के भी अध्यक्ष रहे. शांता कुमार पांच बार सांसद रहे हैं, इसमें एक बार वह राज्यसभा के लिए चुने गए हैं.

Shanta Kumar
पीएम मोदी के साथ शांता कुमार. (FILE PHOTO)


जेल गए और लड़ा चुनाव
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सत्याग्रह और जनसंघ के आंदोलन में भी शांता कुमार ने भाग लिया और जेल की हवा भी खाई. 1971 में शांता कुमार ने पालमपुर विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा और कुंज बिहारी से करीबी अंतर् से हार गए. एक साल बाद प्रदेश को पूर्णराज्य का दर्जा मिल गया और 1972 में फिर चुनाव हुए शांता कुमार खेरा से विधानसभा पहुंचे.

आपातकाल का दौर
साल 1977 में आपातकाल के बाद जब विधानसभा चुनाव हुए तो जनसंघ की सरकार बनी और शांता कुमार ने कांगडा के सुलह विधानसभा से चुनाव लड़ा और फिर प्रदेश के मुखिया बने. लेकिन सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. इसके बाद 1989 में पहली बार काँगड़ा लोकसभा के चुनाव जीते और सांसद बने. साल 1990 में वह फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1992 में बाबरी मस्जिद घटना के बाद शांता कुमार एक बार फिर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके.

केंद्र में रहे मंत्री
शांता कुमार अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में  खाद वह उपभोक्ता मामले के मंत्री बने. साल 1999 से 2002 तक वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रायल के मंत्री भी शांता कुमार को बनाया गया. साल 2008 में उन्हें राज्यसभा के लिए भी चुना गया. इसके बाद वह 2014 में कांगड़ा से सांसद बने.

ये काम किए
शांता कुमार ने अंत्योदय जैसी योजना शुरू की. इसमें गरीब परिवारों को सस्ता राशन, पानी को लोगो के घर -घर तक पहुंचाया. प्रदेश के पानी पर रॉयल्टी लगाई गई, हिमाचल प्रदेश में हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट लगाए, नो वर्क-नो पे जैसे सख्त फैसला भी लिया. शांता कुमार ने आपातकाल के दौरान जेल में किताबें भी लिखी है. वह एक नेता होने के साथ वह एक अच्छे लेखक भी हैं. उन्होंने एक दर्जन से अधिक किताबें भी लिखी हैं.

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First published: September 12, 2019, 11:15 AM IST
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