स्वतंत्रता सेनानी के घर तक 20 साल में 120 मीटर सड़क नहीं बना पाई हिमाचल सरकार

कांगड़ा में स्वतंत्रता सैनानी के घर जाने वाली सड़क का हाल.

काबिलेगौर है कि स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिजनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई प्रस्तावित सुविधाए प्रदान की जाती हैं, जिनमें से घर तक सड़क भी शामिल है.

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धर्मशाला. 20 साल में देश की आजादी (Independence) के लिए कुर्बान होने वाले स्वतंत्रता सैनानी के घर तक सड़क निर्माण नहीं हो सका. मामला हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले का है. सुलह विधानसभा क्षेत्र की कौना पंचायत के भिल्ला गांव के स्वर्गीय भीखा राम के गांव और घर के लिए गुजरने वाले रास्ते (Way) के हालात बद्दतर हैं. कभी आजाद हिंद फौज (Azad Hind Fauj) में रहकर देश की आजादी के लिए लड़ने वाले भीखा राम का परिवार सरकार और प्रशासन के इस सौतेले व्यवहार से नाराज है.

120 मीटर सड़क नहीं बनीं
स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय भीखा राम के घर के लिए महज़ 120 मीटर सड़क प्रस्तावित है. बावजूद इसके लोक निर्माण विभाग कई सालों से इसे अमलीजामा नहीं पहना पा रहा. दरअसल, साल 2000 में तत्कालीन सरकार ने स्वतंत्रता सेनानी भीखा राम के घर के लिए सड़क निर्माण की मंजूरी दे. बावजूद इसके साल दर साल गुजरते गए, लेकिन न तो विभाग के कान पर जूं रेंगी और न ही स्थानीय प्रशासन और सरकार ने सुध ली.

स्वर्गीय भीखा राम. (FILE PHOTO)
स्वर्गीय भीखा राम. (FILE PHOTO)


यह बोली पत्नी
स्वतंत्रता सेनानी के परिजनों ने गुजरे बीस सालों में सरकार और प्रशासन की ऐसी कोई चौखट नहीं, जो सड़क निर्माण के लिए न नापी हो. स्वतंत्रता सेनानी भीखा राम की धर्मपत्नी 87 वर्षीय जयदेवी ने कहा कि वह बुजुर्ग हो चुकी है, बेहद बीमार भी रहती है. उनके पति जब जीवित थे तो उन्होंने अपना यौवन देश के लिए खपा दिया. उनका सपना पूरा तो हुआ लेकिन अच्छे दिन कभी नहीं आए. उनकी स्थिती आज भी किसी गुलामी वाले दिनों से बेहतर नहीं है. मूलभूत सुविधाएं आज भी उनसे कोसों दूर हैं.

काम शुरू हुआ फिर रुक गया
दरअसल, साल 2016 में तत्कालीन विधायक और सीपीएस जगजीवन पाल ने भीखा राम के घर के लिए पीडब्लूडी को कहकर जेसीबी मशीन लगावकर सड़क पक्की करवाने का काम शुरू करवा दिया, लेकिन जैसे ही सरकार बदली सड़क का निर्माण ही रोक दिया गया और स्थिती बद से बद्दतर होकर रह गई.

स्वर्गीय भीखा राम की पत्नी.
स्वर्गीय भीखा राम की पत्नी.


स्वतंत्रता सैनियों के लिए ये सुविधाएं
काबिलेगौर है कि स्वतंत्रता सेनानी और उनके परिजनों के लिए केंद्र और राज्य सरकार की ओर से कई प्रस्तावित सुविधाए प्रदान की जाती हैं, जिनमें से दिल्ली और चंडीगढ़ स्थित हिमाचल भवनों में सांसद और विधायकों की तर्ज पर रहने की सुविधा, 15 हजार रुपये पेंशन, आश्रितों के लिए व्यावसायिक प्रशिक्षण संस्थानों, चिकित्सा महाविद्यालयों, दंत चिकित्सा महाविद्यालयों और आयुर्वेदिक महाविद्यालयों में एक-एक सीट आरक्षित, सरकारी और अर्ध-सरकारी सेवाओं में दो प्रतिशत आरक्षण, स्वतंत्रता सेनानियों एवं विधवाओं को निशुल्क चिकित्सा सुविधा, पोती की शादी में 31 हजार रुपये की सहायता समेत छह माह के भीतर घर तक सड़क प्रदान करना है. बावजूद इसके जमीनी हकीकत सच से कोसों दूर है.

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