हिमाचल प्रदेश: पूर्व विधानसभा अध्‍यक्ष पंडित तुलसी राम का निधन, भरमौर में होगा अंतिम संस्कार

तुुलसी राम का निधन
तुुलसी राम का निधन

पंडित तुलसी राम पिछले कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे. इस कारण कांगड़ा के निजी अस्‍पताल में भर्ती किया गया था.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 17, 2020, 12:18 PM IST
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कांगड़ा. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के पूर्व अध्‍यक्ष पंडित तुलसी राम (Pandit Tulsi Ram) का 78 साल की उम्र में रात 11 बजे निधन (Death) हो गया. वह कांगड़ा के बालाजी अस्‍पताल (Balaji Hospital) में उपचाराधीन थे. तुलसी राम भरमौर के विधायक रह चुके हैं व अभी काफी समय से पालमपुर में ही रह रहे थे. बताया जा रहा है वह कुछ समय से अस्‍वस्‍थ चल रहे थे, इस कारण कांगड़ा के निजी अस्‍पताल में उपचाराधीन किया गया था, जहां सोमवार रात को उनकी मौत हो गई.

वहीं पंडित तुलसी राम के निधन से सम्पूर्ण ब्राह्मण कल्याण परिषद सदमे में है. ब्राह्मण कल्याण परिषद ने 78 साल की आयु में पंडित तुलसी राम के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया है. ब्राह्मण कल्याण परिषद के चेयरमैन पंडित वेद प्रकाश ने कहा कि पंडित तुलसी राम जी एक उच्चकोटि के राजनेता होने के साथ साथ विद्वान पंडित भी थे. वेदप्रकाश ने कहा कि पंडित जी परिषद में स्लाहदाता के तौर पर अपनी अहम भूमिका निभाया करते थे, परिषद के उत्थान में उनका भी हमेशा से अहम योगदान रहा है जिसे कभी नहीं भुलाया जा सकता.

बता दें कि पण्डित तुलसी राम की जीवन यात्रा भगवान भोलेनाथ मणिमहेश की पाक पवित्र स्थली चौरासी धाम भरमौर से शुरू हुई थी, तुलसी राम गद्दी समुदाय से ताल्लुक रखते थे, जब गद्दी समुदाय और उनके लोग बेहद ही कठिन दौर से गुजर रहे थे तब पण्डित जी से ये सब नहीं देखा गया और उन्होंने अदालती कामकाज से सेवानिवृति लेते हुये राजनीति में आना मुनासिब समझा और उस वक़्त जनसंघ दल से अपनी राजनीतिक सफर की शुरुआत करते हुये अपने प्रतिद्वंद्वी कांग्रेस नेता ठाकुर सिंह भरमौरी को शिकस्त देकर विधानसभा की चौखटें लांघते रहे.



कांगड़ा के एक निजी हॉस्पीटल में अंतिम सांस ली
लम्बे संघर्ष के बाद साल 2007 से साल 2012 तक उन्हें हिमाचल प्रदेश की विधानसभा का अध्यक्ष बनने का मौका मिला. हालांकि उसके बाद उन्हें भाजपा ने टिकट नहीं दी और वो पार्टी में हाशिये पर चले गये उसके बाद खराब स्वास्थ्य के कारण वो सक्रिय राजनीति से भी दूर होते चले गये. अंततः आज उन्होंने कांगड़ा के एक निजी हॉस्पीटल में अंतिम सांस ली. पण्डित तुलसी राम को बाबू तुलसी राम के नाम से भी उनके विधानसभा क्षेत्र ने प्यार दिया. हालांकि अब वो और उनका परिवार कांगड़ा के पालमपुर में ही बस चुका है बावजूद इसके उनकी अंतिम इच्छा थी कि उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव भरमौर में ही किया जाये, जिसका पालन उनके चाहने वालों और परिजनों ने बाखूबी किया है. पण्डित तुलसी राम की पार्थिव देह को अब चम्बा के भरमौर ले जाया गया है जहां उन्हें पंचतत्व में विलीन कर दिया गया है.
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