पुलिस भर्ती : मुन्नाभाइयों को काबू करने पर पुलिस अपनी पीठ थपथपाए या नए विवादों का रोना रोए

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: August 16, 2019, 6:49 PM IST
पुलिस भर्ती : मुन्नाभाइयों को काबू करने पर पुलिस अपनी पीठ थपथपाए या नए विवादों का रोना रोए
पीड़ित कर्ण सिंह की माने तो मौका मिलना तो दूर ग्राउंड में जो चैस्ट और आईडी नंबर उन्हें दिया गया था, उस पर किसी और के ही नाम रोल नंबर जारी कर दिया गया.

प्रदेश पुलिस भर्ती में कांगड़ा डे-वन से विवादों में घिरा हुआ है. आए दिन किसी न किसी की गिरफ्तारियां हो ही रही हैं. फिलहाल जहां गिरफ्तारियों का आंकड़ा 20 पार कर चुका है, वहीं परीक्षा से पहले नंबरों की अदला-बदली ने इस भर्ती में एक और विवाद को जन्म दे दिया है.

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प्रदेश पुलिस भर्ती में कांगड़ा डे-वन से विवादों में घिरा हुआ है. इसी साल मई-जून में लिए गए ऑनलाइन आवेदनों से शुरू हुई इस पूरी पुलिस भर्ती प्रक्रिया का अंत बड़े भंडाफोड़ के साथ हुआ जिसमें आए दिन किसी न किसी की गिरफ्तारियां हो ही रही हैं. फिलहाल जहां गिरफ्तारियों का आंकड़ा 20 पार कर चुका है, वहीं परीक्षा से पहले नंबरों की अदला-बदली ने इस भर्ती में एक और विवाद को जन्म दे दिया है. प्रदेश पुलिस द्वारा हाल ही में आयोजित करवाई गई भर्ती प्रक्रिया पूरी तर विवादों में है. पहली मर्तबा इस महकमे ने भर्ती प्रक्रिया को डिजिटलाइजेशन के तहत ऑनलाईन करवाने का बीड़ा उठाया था. लेकिन इसी ऑनलाइन टेक्नोलॉजी ने शुरू से लेकर अंत तक इस पूरी भर्ती प्रक्रिया का कबाड़ा करवा दिया.

दरअसल कुछ पदों के लिए होने वाली इस पुलिस भर्ती में हजारों युवाओं ने आवेदन किया. इसमें कई आवेदनकर्ताओं की ऑनलाइन फीस भी जमा हो गई. लेकिन ग्राउंड के लिए एडमिट कार्ड ही नहीं मिले. नतीजतन सैकड़ों युवाओं ने पुलिस अधीक्षक कांगड़ा का दरवाजा खटखटाया. बावजूद इसके उन्हें मिलने वाला आखिरी मौका भी उनके हाथ से जाता रहा.

मामला विवादित हो गया जब ... 

मामला उस वक्त भी बेहद विवादित हो गया जब कुछ युवाओं ने ग्राउंड पास होने के बावजूद रोल नंबर नहीं मिलने की शिकायतें दर्ज करवाई और वीडियोग्राफी को दोबारा चेक करवाकर परीक्षा में बैठने का मौका मांगा. लेकिन पीड़ित कर्ण सिंह की माने तो मौका मिलना तो दूर ग्राउंड में जो चैस्ट और आईडी नंबर उन्हें दिया गया था, उस पर किसी और के ही नाम रोल नंबर जारी कर दिया गया.

हद तो तब हो गई जब हजारों युवाओं के लिए महज़ एक ही परीक्षा हॉल का इंतजाम किया गया, जहां पहुंचने में अभ्यर्थियों को कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा. इससे पहले कि परीक्षा पूरी होती मुन्नाभाइयों के पकड़े जाने के खुलासे के बाद पूरी भर्ती प्रक्रिया का ढांचा ही मटियामेट हो गया. फिलहाल अब तक इसमें 20 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और अभी छापेमारी जारी है.

पहली मर्तबा डिजिटलाइजेशन के जरिये भर्ती प्रक्रिया करवाने वाली हिमाचल पुलिस की पूरी तरह से भद्द पिट गई है.


काबिलेगौर है कि पहली मर्तबा डिजिटलाइजेशन के जरिये भर्ती प्रक्रिया करवाने वाली हिमाचल पुलिस की पूरी तरह से भद्द पिट गई है. पहले फीस तक जमा करवाने के बाद ग्राउंड में एंट्री न मिलना, सैकड़ों युवाओं का अंतिम मौके से वंचित हो जाना, फिर ग्राउंड पास होने के बाद आईडी नंबरों का हेर-फेर हो जाना, फिर अंत में डिजिटलाइजेशन का सहारा लेने वाले मुन्नाभाइयों का भांडाफोड़ करने के बाद लिखित परीक्षा को ही रद्द करना, अपने आप में बहुत बड़ा गड़बड़झाला नज़र आ रहा है. डिजिटल के फेर में फंसा पुलिस महकमा ये समझ ही नहीं पा रहा कि इस पूरी प्रक्रिया में मुन्नाभाइयों को काबू करने की सफलता से अपनी पीठ थपथपाए या शुरू से लेकर अंत तक पनपते नए-नए विवादों का रोना रोए.
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First published: August 16, 2019, 6:49 PM IST
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