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हिमाचल: 80 परिवार दरकिनार, BJP संगठन मंत्री के घर के लिए PWD ने निकाली नई सड़क

सांकेतिक तस्वीर.
सांकेतिक तस्वीर.

आरोप है कि भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा को लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल सरकार ने सर्वे को पलट दिया. वहीं, अब संगठन मंत्री के घर के सामने पुल व सड़क बनाई जा रही है.

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ब्रजेश्वर साकी

ज्वालामुखी. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कांगड़ा (Kangra) जिले में भाजपा नेता (BJP Leader) का फायदा पहुंचाने के लिए नई स़ड़क निकाल दी गई. ग्रामीणों ने पीडब्ल्यूडी (PWD) पर आरोप लगाए हैं.मामला ज्वालामुखी (Jawalamukhi) उपमंडल का है.

जानकारी के अनुसार, लगडू गांव में लोक निर्माण विभाग ने दबंगई से वन भूमि से ही नई सड़क का निर्माण किया है और  दर्जनों चीड़ के पेड़ों की इसके लिए बलि दी गई. वन विभाग इन्हें खजूर के पेड़ बता रहा है. लेकिन न तो विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं. दोनों विभागों के अधिकारी अपनी अपनी नौकरी बचाने के चक्कर में हैं. यहां निर्माण बाबा बडोह से लगडू तक नई सड़क का हो रहा है.



कई सवाल उठे
सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि आखिर सड़क बनाने की एनओसी किसने जारी की? अगर एनओसी नहीं है तो यह सड़क कैसे बनी. ग्रामीणों द्वारा यह भी बताया जा रहा है की यह सड़क भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा के घर से होकर जाती है, इसलिए इतनी जल्दी नियमों को दरकिनार करते हुए सड़क व पुल का निर्माण हो गया. वहीं दूसरी तरफ, खफा ग्रामीण बुजुर्ग ने तो यहां तक कह दिया कि वह यहां काले पानी की सजा काटने को मजबूर है और जिला कांगड़ा के ज्वालामुखी विधानसभा क्षेत्र में लोग राजनीति का शिकार हो रहे हैं.

क्यों नाराज हैं लोग

इस पूरे प्रकरण में लगडू के ही तली व खड़ियाना गांव के लोग भी प्रदेश सरकार से नाराज हो गए हैं. दरअसल, यहां 1998 से प्रस्तावित सड़क व पुल का निर्माण न करते हुए पीडब्ल्यूडी ने नया रोड़ निकाल दिया, जिससे लगभग 80 परिवारों को फायदा पहुंचाने वाला रोड़ न बनाकर विभाग ने सिर्फ एक परिवार को फायदा पहुंचाने के लिए दर्जनों पेड़ों को काट डाला. अब इस पूरे प्रकरण को ज्वालामुखी भाजपा विवाद से भी जोड़कर देखा जा रहा है. यह भी कहा जा रहा है कि तली व खरियाना गांव के लोग विधायक रमेश धवाला के समर्थक हैं, इसलिए उनको यह खामियाजा भुगतना पड़ा. रमेश धवाला और पवन राणा के बीच की जंग को आज पूरे तीन साल हो गए. वहीं राणा समर्थक भी धवाला को जनविरोधी बता रहे हैं. इधर, धवाला भी चुप है तो उधर राणा भी मौन धारण किए हुए हैं। लेकिन अब वाद विवाद आपस में समर्थक कर रहे हैं.

क्या कहते है लोग

78 वर्षीय बुजुर्ग ने बताया कि सड़क के बिना हमें बहुत ज्यादा समस्या है. यहां डिलीवरी केस हो तो सड़क के बिना चल नहीं सकते हैं. उन्होंने कहा कि कोई भी सरकार हमारी सड़क बनाने के लिए सुनवाई नहीं करती है. बुजुर्ग ने कहा कि मेरे पास बहुत ज्यादा कागज पड़े हैं, जिनपर मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री को लेटर भेजे गए हैं। लेकिन आजदिन तक किसी ने भी कोई सुनवाई नहीं की. बुजुर्ग ने बताया कि हमारे रोड़ को छोड़कर दूसरा रोड़ बना दिया, जिसका हमें कोई फायदा नहीं होगा. बुजुर्ग ने कहा कि उन्हें एक आदमी कह गया है कि यह सड़क कभी नहीं बनेगी जो पवन राणा कहेगा, वही होगा. खड़ियाना की महिला ने बताया कि सड़क और पुल न होने की बजह से बच्चों को बरसात के दिनों में स्कूल भेजने में काफी दिक्कत होती है. कुछ लोग बोल रहे हैं कि यह सड़क इसलिए नहीं बनाई की फारेस्ट में आती है, लेकिन जो दूसरी सड़क बनाई, वो भी वन भूमि है, वहां सड़क कैसे बन गई?

एक व्यक्ति के लिए करोड़ो खर्च?

आरएसएस कार्यकर्ता सुशील शर्मा ने हिमाचल प्रदेश सरकार को आड़े हाथों लिया है. उन्होंने कहा कि यूं तो सरकार बजट का रोना रोती है. उन्होंने कहा कि यहां सरकार ने केवल एक व्यक्ति के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर दिए. उन्होंने कहा कि जो सड़क बडोह से बन रही है यह खड़ियाना गांव से होकर जाएगी और सड़क व पुल का सर्वे भी पुराना हो चुका था. सुशील शर्मा ने आरोप है कि भाजपा के संगठन मंत्री पवन राणा को लाभ पहुंचाने के लिए हिमाचल सरकार ने सर्वे को पलट दिया. वहीं, अब संगठन मंत्री के घर के सामने पुल व सड़क बनाई जा रही है. वहीं दूसरी तरफ 80 परिवारों के गांव को दरकिनार कर दिया. एक परिवार को लाभ पहुंचाने के लिए सड़क व पुल भी बदल दिया गया. वहीं सुशील ने नई बन रही सड़क में सैंकड़ों चीड़ के पेड़ काटे जाने का दावा भी किया है.
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