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हिमाचल: पहाड़ों पर चमचमाती बर्फ यहां के लोगों की जिंदगी में हर साल तबाही लाती है

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 18, 2020, 3:41 PM IST
हिमाचल: पहाड़ों पर चमचमाती बर्फ यहां के लोगों की जिंदगी में हर साल तबाही लाती है
पीने का पानी बर्फ पिघलाकर मिलता है.

हिमाचल प्रदेश में इम्तिहान (Examination) का दौर शुरू होने वाला है. हर छात्र इस वक्त अपने उज्जवल भविष्य के लिए दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जनजातीय क्षेत्र भरमौर (Bharmaur) में ऐसा नहीं है. यहां की ज्यादातर पंचायतें बर्फबारी (Snowfall) के आगोश में हैं.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश में इम्तिहान (Examination) का दौर शुरू होने वाला है. हर छात्र इस वक्त अपने उज्जवल भविष्य के लिए दिन-रात पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन जनजातीय क्षेत्र भरमौर (Bharmaur) में ऐसा नहीं है. यहां की ज्यादातर पंचायतें बर्फबारी (Snowfall) के आगोश में हैं.  इससे भी इतर यहां मूलभूत सुविधाएं भी चरमरा चुकी हैं. जिन बच्चों के हाथों में किताबें होनी चाहिए, वे पेयजल के लिए बर्फ पिघला रहे हैं. मवेशियों के लिए चारे-पानी का जुगाड़ कर रहे हैं ताकि कुदरत की इस आफ़त का वे भी कहीं शिकार न हो जाएं.

पावर प्रोजेक्ट देश के दूसरे हिस्सों को करते हैं रोशन

बर्फबारी के बाद यहां के लोग सूरज की रोशनी में दिन का उजाला तो देखते हैं, लेकिन शाम ढलते ही रोशनी क्या होती है ये उनके घरों में जलने वाले चिराग ही बताते हैं. बिजली तो महज़ यहां के लोगों के साथ आंखमिचौली खेलने के लिए ही नजर आती है. विडंबना यह है कि जो जनजातीय क्षेत्र भरमौर अपने 50 से ज्यादा छोटे-बड़े पावर प्रोजेक्ट से प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों को रोशन करता है, उसकी खुद की हकीकत बेहद स्याह है. इससकी सुध ना कोई सरकार और ना ही सरकार का कोई नुमाइंदा लेना चाहता है.

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भरमौर अपने 50 से ज्यादा छोटे-बड़े पावर प्रोजेक्ट से प्रदेश और देश के दूसरे हिस्सों को रोशन करता है.


बर्फ पिघलाकर पानी पाते हैं, सौर उर्जा से चिरागों को रोशन करते हैं

स्थानीय लोगों की मानें तो जैसे ही सर्दियों का वक्त शुरू होता है उनके लिए उनके इलाके दोज़ख़ में तब्दील हो जाते हैं. उन्हें दिसंबर से लेकर अप्रैल तक मूलभूत सुविधाओं तक से महरूम रहना पड़ता है. बिजली, पानी सड़क और स्वास्थ्य के नाम पर उनके पास अगर कुछ होता है तो कुदरत की बख्शी नेमतें. बर्फ से वो पानी पिघलाते हैं, सौर उर्जा से वो चिराग जलाते हैं. बीमार होने पर भगवान पर आस रखते हैं. आवाजही के लिए जान हथेली पर लेकर चलते हैं. इसके अलावा शासन-प्रशासन की कोई हेल्पलाइन उनके इलाकों में काम नहीं करती है.

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First published: January 18, 2020, 3:38 PM IST
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