हिमाचली बेटी सीमा ने लांघीं सरहदें, अब अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक में लेगी हिस्सा

डीसी कांगड़ा संदीप कुमार ने उपायुक्त कार्यालय में बैंकॉक से रजत पदक जीतकर लौटी सीमा को सम्मानित किया. इस दौरान सीमा के कोच केहर सिंह पटियाल को भी सम्मानित किया गया.


Updated: July 11, 2018, 3:06 PM IST
हिमाचली बेटी सीमा ने लांघीं सरहदें, अब अर्जेंटीना में यूथ ओलंपिक में लेगी हिस्सा
कांगड़ा के डीसी सीमा को सम्मानित करते हुए.

Updated: July 11, 2018, 3:06 PM IST
अगर सबकुछ ठीकठाक चलता रहा, देश-प्रदेश की सरकारों का सहयोग मिलता रहा, तो जल्द ही हिमाचल देश को एक ऐसी उड़नपरी दे सकता है, जिसकी कामना आज हर देशवासी कर रहा है. हाल ही में शिकागो में यूथ एशियन क्वालिफायर्स प्रतियोगिता हुई. इसमें सिल्वर मेडल हासिल करने के बाद हिमाचल की बेटी सीमा धर्मशाला पहुंची.

सर पर पिता का साया नहीं, घर की माली हालत खराब
सीमा चम्बा के अति दुर्गम गांव रेटा की रहने वाली है. बेटी के सर पर पिता का साया नहीं है, घर की माली हालत ऐसी कि खेल के लिए तो दूर दो जून की रोटी का जुगाड़ भी बामुश्किल होता है, लेकिन कहते हैं न कि उगते हुए सूरज को बादल आखिर कब तक ढक कर रख पाएंगे. आज सीमा अपनी प्रतिभा के बलबूते साल 2015 से स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साईं) के साए में है और तब से लेकर अब तक 16 पदक जीत चुकी है, जिसमें से दो अंतर्राष्ट्रीय और 11 राष्ट्रीय स्तर के हैं.

अब अर्जेंटीना जाएगी सीमा

सीमा अक्टूबर में अर्जेंटीना में होने वाली यूथ ओलंपिक प्रतियोगिता के लिए चुनी गई हैं. उसे जूनियर स्तर पर हिमाचल की पहली उड़नपरी बनने का गौरव हासिल है, जिसने विदेशी धरती पर 3 हजार मीटर की 9 मिनट 55 सैकेंड में रेस पूरी कर सिल्वर पदक हासिल किया. इससे पहले, हिमाचल की सुमन रावत ने साल 1986 में सीनियर स्तर पर ब्रांज मेडल हासिल किया था.

सीमा के कोच केएस पटियाल की मानें तो उनकी पारखी नजरों की बदौलत ही अभावों में रहने वाली सीमा साईं हॉस्टल धर्मशाला पहुंची और उसके बाद एक से बढ़कर एक आयाम हासिल करती गईं. सीमा की सखियां भी चाहती हैं कि वो भी अपनी सहेली की तरह ब्लू जर्सी पहन कर देश को विदेशी धरा पर रिप्रजेंट करने का गौरव हासिल कर सकें.

सरकार की बेरुखी, डीसी कांगड़ा ने किया सम्मानित
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काबिलेगौर है कि जहां प्रदेश और देश स्तर पर मेडल जीतने वालों के स्वागत सत्कार के लिए कुछ राज्यों की सरकारें बांछे फैलाए रहती हैं. धन-दौलत से तोल देती है. वहीं, हिमाचल भी एक ऐसा राज्य है जहां खिलाड़ी बेसक दुनिया फतेह करके भी लौटे, उसे आर्थिक मदद तो दूर, उसका सम्मान सत्कार तक करने के लिए कोई आगे नहीं आता.

सोमवार को डीसी कांगड़ा संदीप कुमार ने उपायुक्त कार्यालय में बैंकॉक से रजत पदक जीतकर लौटी सीमा को सम्मानित किया. इस दौरान सीमा के कोच केहर सिंह पटियाल को भी सम्मानित किया गया.
(धर्मशाला से बिचित्र शर्मा की रिपोर्ट)
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