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राजा कांगड़ा से जुड़ा है पांवटा साहिब के श्री देईजी साहिबा मंदिर का इतिहास

राजा कांगड़ा से जुड़ा है पांवटा साहिब के श्री देईजी साहिबा मंदिर का इतिहास

पांवटा साहिब में यमुना किनारे बना ऐतिहासिक देईजी साहिबा "श्री रघुनाथ मंदिर"

पांवटा साहिब में यमुना किनारे बना ऐतिहासिक देईजी साहिबा "श्री रघुनाथ मंदिर"

हिमाचल उत्तराखंड के प्रवेश द्वार पांवटा साहिब में यमुना किनारे बना एतिहासिक देईजी साहिबा "श्री रघुनाथ मंदिर" ऐतिहासिक यादों को संजोए रखे हुए है. वर्षों से अनदेखी का शिकार हुआ यह मंदिर एक बार फिर से जीर्णोद्वार की उम्मीद में है. यदि जिला प्रशासन की नज़रे इनायत हुई तो धार्मिक पर्यटन को भी यहां बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.

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हिमाचल उत्तराखंड के प्रवेश द्वार पांवटा साहिब में यमुना किनारे बना एतिहासिक देईजी साहिबा "श्री रघुनाथ मंदिर" ऐतिहासिक यादों को संजोए रखे हुए है. वर्षों से अनदेखी का शिकार हुआ यह मंदिर एक बार फिर से जीर्णोद्वार की उम्मीद में है. यदि जिला प्रशासन की नज़रे इनायत हुई तो धार्मिक पर्यटन को भी यहां बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. ऐतिहासिक व धार्मिक नगरी पांवटा साहिब बीते समय की कई महान घटनाओं को संजोए हुए है. श्री देईजी साहिबा रघुनाथ मंदिर का लगभग 130 वर्षों का इतिहास है. यहां पर प्रशासन की लापरवाही के चलते कांगड़ा शैली की पेटिंग खराब हो चुकी है.

ऐतिहासिक श्री देई जी साहिबा मंदिर का निर्माण 21 फरवरी 1889 ई0 को सिरमौर रियासत काल में रानी साहिबा कांगडा श्री देईजी साहिबा ने अपने भाई महाराजा शमशेर प्रकाश बहादुर की मदद से अपने पति व लम्बागांव (कांगडा) के राजा प्रताप चन्द बहादुर की याद में करवाया था. यह रघुनाथ मंदिर महाराजा सिरमौर  शमशेर प्रकाश बहादुर द्वारा उनकी बहन के अनुरोध पर बनवाया था. राजकुमारी सिरमौर जिसे प्यार व आदर से देईजी साहिबा पुकारा जाता था की शादी लम्बागांव (कांगडा) के राजा प्रताप चन्द बहादुर से हुई थी.

दुर्भाग्यवश देईजी साहिबा छोटी आयु में ही विधवा हो गईं. वह वापस सिरमौर आ गई थीं. महाराजा सिरमौर ने इस मंदिर के साथ सराय का निर्माण भी करवाया.  मंदिर की व्यवस्था चलाने हेतू इसके साथ लगते तीन गांव, जिनकी कुल भूमि 2400 बिघा थी, मंदिर को दान स्वरुप दे दी थी.रियासत काल में बने इस मंदिर में भगवान श्री राम, माता सीता व लक्ष्मण जी की मूर्तियां स्थापित हैं.रघुनाथ मंदिर के साथ ही बजरंगबली श्री हनुमान जी तथा शिवजी के छोटे मंदिर भी स्थापित किए गए हैं. श्री देईजी साहिबा मंदिर की दीवारों पर कांगड़ा पेंटिग भी बनाई गई है, जो अब काफी पुरानी हो चुकी है.

अब इंटेक ने मंदिर के जीर्णोद्धार का काफी कार्य कर इसकी पुरानी पेंटिंग व शैली को संवारा है. हाल ही में जिला उद्योग विभाग की टीम ने इस मंदिर की खाली जमीन में सुन्दर पार्क तैयार करने का जिम्मा लिया है. वर्षों से अनदेखी का शिकार हुए इस मंदिर में भविष्य में भक्तों की भीड़ जुटनी शुरू होने की सम्भावनाएं हैं. मंदिर के साथ पार्क के निर्माण से यहां धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. सन् 1989-90 में इस मंदिर का रखरखाव सरकार ने अपने अधीन ले लिया, जिसके अन्तर्गत एक न्यास गठित किया गया है.

इस न्यास के आयुक्त, उपायुक्त सिरमौर, सह आयुक्त, एसडीएम पांवटा व मंदिर अधिकारी तहसीलदार पांवटा साहिब स्थाई नियुक्त किए गए हैं. इस न्यास में कुछ सरकारी व गैर सरकारी सदस्य भी 5-5 साल के लिए नियुक्त किए जाते रहे हैं. यमुना नदी व आसपास का विहंगम दृष्य इस मंदिर के प्रांगण से बखूबी नजर आता है. इस मंदिर में पूजा पाठ के अलावा समय-2 पर धार्मिक अनुष्ठान, यज्ञ व भण्डारे आदि का आयोजन भी होता रहता है.

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Tags: Dharamshala

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