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Youth Day: धर्मशाला की हरी कोठी में 11 दिन तक क्यों रहे थे स्वामी विवेकानंद?

Youth Day: धर्मशाला की हरी कोठी में 11 दिन तक क्यों रहे थे स्वामी विवेकानंद?

स्वामी विवेकानन्द की हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 11 दिन स्वास्थ्य लाभ लिया था.

स्वामी विवेकानन्द की हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला में 11 दिन स्वास्थ्य लाभ लिया था.

Youth Day and Swami Vivekanand: बताया जाता है कि सोहन बख्शी नाम के शख्स से इस हरी कोठी को कुटलैहड़ रियासत के राजपरिवार ने बाद में खरीदा. रियासत के आगे के राजा रूपेंद्र पाल का परिवार अब चंडीगढ़ में रहता है और गर्मियों में इसी कोठी में रुकता है. वहीं आज नेहरू युवा केंद्र की ओर से युवा दिवस का आयोजन किया जाना था, बावजूद इसके कोविड ने उनके मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है.

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धर्मशाला. हर साल स्वामी विवेकानंद जी के जन्मोत्सव पर 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन स्वामी विवेकानन्द की हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के धर्मशाला से जुड़ी यादें भी तरोताज़ा हो उठती हैं. यहां उन्होंने अपने जीवन के करीब 11 दिन एक हरि सी कोठी में बिताए थे, जो कि अप्पर धर्मशाला का एक हिस्सा है. जिस कोठी में स्वामी विवेकानंद ठहरे थे उस कोठी का नाम अब हरी कोठी ही हो गया है और यह कोठी प्राचीन शैली में ही बनी हुई है. भूकंप रोधी यह कोठी खड़ा डंडा रोड पर कोतवाली बाजार से थोड़ी ही दूरी पर बनी हुई है.

कोठी के अंदर अब बाहरी लोगों के प्रवेश पर इसके मालिकों ने पूर्णतः रोक लगा रखी है, इसलिये क्योंकि यहां पर स्वामी विवेकानंद की यादों को संजोया गया है. इतना ही नहीं, यहां एक शिला भी स्थापित की गई है, जिसमें लिखा गया है कि कब से लेकर कब तक स्वामी विवेकानंद इस कोठी में रुके थे और क्यों रुके थे.

हालांकि, शिला में स्थापित साल को लेकर कई विरोधाभास भी सामने आते हैं. उस वक्त के लोगों व जानने वालों ने जिक्र किया है कि स्वामी विवेकानंद यहां पर 1897 में आए थे, जबकि शिला में उल्लेख 1887 का है. बताया जाता है कि स्वामी विवेकानंद का स्वास्थ्य बिगड़ गया था तो स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए उन्हें पहाड़ी जलवायु में रहने का परामर्श दिया गया था और वो स्वास्थ्‍य लाभ के लिए ही धर्मशाला स्थित इस कोठी में 11 दिन तक रहे थे.

कोठी में जाने की इजाजत नहीं

कई लोग हरी कोठी के अंदर जाने की इच्छा जताते हैं, बावजूद इसके कोठी मालिक इसकी किसी को भी इजाज़त नहीं देते और बाहर के लोगों के लिए इसे बंद कर रखा है. कोठी की देखभाल के लिए नियुक्त किये गए केयरटेकर भी अपने मालिकों के आदेशों का यथावत तरीके से पालन करते हैं. ऐसे में जो लोग कोठी के अंदर जाकर स्वामी विवेकानंद को याद करना चाहते हैं उन्हें भी मन मसोट कर रह जाना पड़ता है. मालिक व उनके मित्र कभी गर्मियों में कुछ समय बिताने यहां पर आते हैं. बताया जाता है कि सोहन बख्शी नाम के शख्स से इस हरी कोठी को कुटलैहड़ रियासत के राजपरिवार ने बाद में खरीदा. रियासत के आगे के राजा रूपेंद्र पाल का परिवार अब चंडीगढ़ में रहता है और गर्मियों में इसी कोठी में रुकता है.  वहीं आज नेहरू युवा केंद्र की ओर से युवा दिवस का आयोजन किया जाना था, बावजूद इसके कोविड ने उनके मंसूबों पर भी पानी फेर दिया है.

कोरोना की वजह से आयोजन नहीं

दरअसल नवाईकेएस हर साल 12 जनवरी को युवा दिवस का आयोजन करता है और शहीद स्मारक के ऊपर की तरफ स्वामी विवेकानंद के पार्क में पहुंचकर उन्हें माल्यर्पण किया जाता है और युवाओं को स्वामी विवेकानंद की शिक्षाओं व उनके प्रवास के बारे में बताने के लिए यहां से लेकर हरी कोठी तक जागरूकता रैली निकाली जाती है. मगर इस बार कोविड-19 महामारी के चलते के न तो रैली का आयोजन हो रहा है और न ही अन्य कोई बड़ा आयोजन किया जा रहा. अब जो कुछ भी होगा, वो सब ऑनलाइन ही किया जायेगा. नेहरू युवा केंद्र की लेखाकार नीलम चौधरी ने बताया कि कोविड-19 के कारण आनलाइन कार्यक्रम होंगे. भीड़ को एकत्रित न होने देने के लिए फिजिकल कार्यक्रम नहीं होगा. विवेकानंद पार्क में सिर्फ कुछ लोग कोविड-19 प्रोटोकाल के साथ माल्यार्पण करेंगे.

Tags: Himachal pradesh, Kangra Valley, Shimla Tourism, Swami vivekananda

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