कोरोना संकट ने भारत के विकास की कलई भी खोल दी: शांता कुमार
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कोरोना संकट ने भारत के विकास की कलई भी खोल दी: शांता कुमार
हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार.

हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार ने कहा कि यह एक कठोर और कड़वी सच्चाई है कि भारत में विकास हुआ, पर सामाजिक न्याय नही हुआ. विकास के साथ आर्थिक विषमता भी बढ़ती गई

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के पूर्व सीएम और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता एवं शांता कुमार (Shanta Kumar) ने कोरोना से लगातार हो रही मौतों पर दुख जताया है.

कांगड़ा से पूर्व सांसद शांता कुमार ने कहा है कि कोरोना महामारी से प्रतिदिन बढ़ते रोगियों और मरने वालों की संख्या बहुत अधिक दुखी करती है, परन्तु यह सोच कर कि पूरी दुनिया इसे झेल रही है, इससे मन कुछ ठहर जाता है.

टीवी देखकर रूह छटपटाने लगती है



शांता ने कहा कि कहा है कि पूरी दुनिया कोरोना के संकट को सह रही है, लेकिन कहीं किसी देश में ऐसे शर्मनाक दृष्य नहीं है, जैसे केवल भारत में है. सड़कों पर और स्टेशन के बाहर गरीब और भूखे भारत का दृष्य. हजारों गरीब प्रवासी सिर पर सामान, गोद में बच्चे लेकर निराश-हताश और बदहवास, कहीं सड़कों पर पैदल चलते, रेल की पटरी पर सोते और मरते, घंटों इन्तजार से परेशान हैं. कुछ ऐसे भी जो मकान छोड़ आये, रात हो गई तो जाएं तो जाए कहां? शांता ने कहा कि टीवी  पर ऐसा दृष्य देखकर शर्म ही नहीं आती, दिल ही नहीं दहलता, बल्कि रूह भी छटपटाने लगती है. कानों में एक सवाल गूंजता है, क्या यही है वह भारत, जिसके लिए लाखों शहीद हुए?



चार भारत बन गए

शांता कुमार ने कहा कि दुर्भाग्य से 72 साल की आजादी के बाद एक खुशहाल भारत नहीं चार भारत बन गए. पहला लूटने वालों का मालामाल भारत. नीरव मोदी जैसे 65 लुटरे विदेशों में ऐश कर रहे है. दूसरा खुशहाल भारत अपने महलों में आराम कर रहा है. तीसरा सामान्य भारत संघर्ष में जीवन व्यतीत कर रहा है और चौथा गरीब और भूखा भारत. उन्होने कहा कि कोरोना संकट ने भारत के विकास की रही-सही कलई भी खोल दी है. इसलिए हंगर इंडेक्स ने कहा था कि 19 करोड़ लोग आज भी लगभग भूखे पेट रात को सोते हैं.

भारत में विकास हुआ, लेकिन समाजिक न्याय नहीं

हिमाचल के पूर्व सीएम शांता कुमार ने कहा कि यह एक कठोर और कड़वी सच्चाई है कि भारत में विकास हुआ, पर सामाजिक न्याय नही हुआ. विकास के साथ आर्थिक विषमता भी बढ़ती गई. आज संसार में सबसे अधिक आर्थिक विषमता भारत में है, इसीलिए जो शर्मनाक दृष्य भारत की सड़कों पर दिखाई दे रहा है, वह दुनिया के किसी भी देश में नहीं है. कोरोना के बाद स्थिति सामान्य होने पर भारत को प्रथम प्राथमिकता के आधार पर दो काम करने होंगे. जनसंख्या विस्फोट रोकने के लिए,‘हम दो- हमारे दो’ और अब सबके भी दो“ और साथ ही एक अलग अन्त्योदय मंत्रालय बना कर सबसे पहले इन 19 करोड़ अति गरीब लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर लाना होगा.

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First published: May 28, 2020, 10:53 AM IST
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