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ISIS सरगना बगदादी की मौत के ‘ऑपरेशन कायाला मूलर’ का हिमाचल कनेक्शन!

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: October 29, 2019, 4:06 PM IST
ISIS सरगना बगदादी की मौत के ‘ऑपरेशन कायाला मूलर’ का हिमाचल कनेक्शन!
कायाला मूलर के नाम पर मिशन का नाम रखा गया था. (FILE PHOTO)

14 अगस्त 1988 को प्रेसकोट एरिजोना में जन्मीं कायाला मूलर की हत्या 6 फरवरी 2015 को हो गई थी. कायाला अमेरिका की रहने वाली थी और नोर्दन एरिजोना यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की थी.

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धर्मशाला. अमेरिका ने आईएसआईएस (ISIS) के कुख्यात सरगना अबु अल बक्कर उर्फ बगदादी को खत्म करके एक बार फिर से अपने वैश्विक रसूख और पावर का दुनिया को आभास करवाया है, लेकिन बगदादी (Bagdadi) के खात्मे के लिए अमेरिका ने जिस युवती के नाम पर मिशन का नाम रखा, उसने एक बार फिर से दुनिया को रुआंसा होने पर मजबूर कर दिया. युवती का हिमाचल से भी कनेक्शन है.

आतंक के सरगना और आईएस के कुख्यात मुखिया के खात्मे के लिए आमेरिका ने “ऑपरेशन कायाला मूलर” चलाया. दरअसल, कायाला मूलर अमेरिका की वह बेटी थी, जिसने महज़ छोटी सी उम्र में ह्यूमन राइट्स की लड़ाई लड़नी शुरू कर दी थी.

धर्मशाला आई थी कायला मूलर
साल 2010 में कायला मूलर का हिंदोस्तान से भी कनेक्शन रहा. दरअसल, साल 2010 में वह धर्मशाला आई और यहां निर्वासित तिब्बितयों के लिए लड़ाई लड़नी शुरू कर दी. मूलर ने यहां दलाईलामा कार्यालय से निकलने वाली कॉन्टेक्ट मैगजीन के लिए लेख लिखने शुरू किए. चीन को तिब्बती अधिकारों का हनन न करने की सलाह देते हुए निर्वासित तिब्बतियों की आवाज़ बुलंद की. दलाईलामा से भी विश्व शांति की प्रेरणा ली. उसके बाद जब वह साल 2013 में सीरीया गई और एक अस्पताल में पीड़ितों की मदद कर रही थी तो उस दौरान उसे आईएस के लड़ाकों ने किडनैप कर लिया था. उसे अबु अल बक्र बगदादी के हवाले कर दिया गया.

कायाला मूलर. (FILE PHOTO)
कायाला मूलर. (FILE PHOTO)


2015 में कर दी थी हत्या
येसी फुंत्सोक, डिप्टी स्पीकर, निर्वासित तिब्बती सरकार ने बताया कि साल 2013 और 15 के बीच कायाला मूलर के कुछ संदेश भी सोशल मीडिया पर वायरल हुए, जिसमें उसने आईएस की गिरफ्त में नारकीय जीवन जीने की कहानी बयां की थी और सहयोग की मांग की. साथ ही अपने साथ आईएस सरगना बगदादी द्वारा किए जाने वाले अमानवीय अत्याचारों की कहानी भी बयां की. अमेरिका कायाला मूलर को बचा नहीं सका और साल 2015 में उसकी हत्या कर दी गई. इसका दुनियाभर के कई देशों ने शोक मनाया जिसमें निर्वासित तिब्बतियन भी शामिल थे.
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कायाला को याद दिया
अमेरिका भले ही कायाला मूलर को नहीं बचा सका, लेकिन बीते कल कायाला मूलर के नाम से ऑपरेशन का संचालन कर 4 साल के बाद मूलर का बदला लेने में ज़रूर कामयाब हो गया है. बगदादी के खात्मे के बाद निर्वासित तिब्बतियों में जहां खुशी की लहर है, वहीं उन्हें आज भी कायाला मूलर अपने बीच में ही नज़र आ रही है और तिब्बतियन के लिए मूलर के दिए गए यादगार पलों के योगदान को याद किया जा रहा है. मूलर की मौत महज़ 26 साल की उम्र में ही हो गई थी.

ये खिताब भी मिला था
14 अगस्त 1988 को प्रेसकोट एरिजोना में जन्मीं कायाला मूलर की हत्या 6 फरवरी 2015 को हो गई थी. कायाला अमेरिका की रहने वाली थी और नोर्दन एरिजोना यूनिवर्सिटी से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई की थी. कायाला शुरू से ही ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट पेशे से जुड़ी हुई थी और इन्हें ह्यूमेनिटेरियन एंड वर्कर का भी खिताब हासिल था.

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First published: October 29, 2019, 3:55 PM IST
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