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20 क्विंटल मक्खन से मां बज्रेश्वरी देवी का श्रृंगार, बैजनाथ में नाग देव संग विराजमान हुए भोले बाबा
Dharamsala News in Hindi

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 17, 2020, 5:56 PM IST
20 क्विंटल मक्खन से मां बज्रेश्वरी देवी का श्रृंगार, बैजनाथ में नाग देव संग विराजमान हुए भोले बाबा
कांगड़ा के बैजनाथ में है भोले का मंदिर.

मान्यता है कि इस मक्खन रूपी प्रसाद से चर्म रोगों से निदान मिलता है. घृत मंडल पर्व के संबंध में कहा जाता है कि जालंधर दैत्य को मारते समय मां बज्रेश्वरी देवी के शरीर पर कई चोटें आई थीं तथा देवताओं ने माता के शरीर पर घृत का लेप किया था.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) के कांगड़ा (Kangra) को देवी-देवताओं की धरती माना जाता है.यहां धार्मिक टूरिज्म काफी ज्यादा होता है. बैजनाथ (Baijnath) के ऐतिहासिक शिव मंदिर में इस बार घृतमंडल पर्व पर नाग देव के साथ भोले नाथ विराजमान हुए. साढ़े तीन क्विंटल माखनरूपी घी से बने पेड़ों से तैयार लगभग 5 फ़िट ऊँचे घृत को कई साल बाद एक अलग रूप दिया गया. मंगलवार दोपहर पावन पिंडी का जलाभिषेक और आरती करने के बाद घृत को बनाने का काम शुरू हुआ.

21 जनवरी को बंटेगा प्रसाद
इस विशालकाय घृत मंडल के निर्माण कार्य को पूरा करने के लिए काँगड़ा वज्रेश्वरी मंदिर से आए पुजारियों पंडित उमा शंकर, अजय शर्मा, दिवाकर शर्मा व बैजनाथ मंदिर के पुजारी पंडित धर्मेंद्र शर्मा, आचार्य सुरेंद्र शर्मा, शांति स्वरूप, मनोज सुग्गा ने सहयोग किया. उन्होंने बताया क़ि घृत को अगले सात दिनो तक पावन पिंडी पर रखा जाएगा. 21 जनवरी के दिन इसे पिंडी से उतारकर प्रसाद के रूप में बाँटा जाएगा.

यह बोले पुजारी

पुजारी सुरिन्द्र आचार्य ने बताया कि घृत चर्म रोगों के लिए अति लाभकारी होता है. यही कारण है कि इसे लेने के लिए दूर-दूर से भक्तजन यहाँ आते हैं. घृतमंडल बनाने के साथ साथ भक्तों ने शिव महिमा का गुणगान किया. मकर सक्रांति पर्व पर बैजनाथ में अगले सात दिन बाद घृत पर्व सम्पन होगा. इसके अलावा, संसाल मुकुट नाथ मंदिर, महाकाल मंदिर, पूठे चरण मंदिर व पालिकेश्वर में भी घृतमंडल बनाकर यह पर्व बडी धूमधाम से मनाया जा रहा है.

मां की पिंडी का श्रृंगार
शक्तिपीठ श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर में सात दिवसीय घृत मंडल पर्व शुरू हो गया. करीब 20 क्विंटल मक्खन से मां की पिंडी का श्रृंगार किया गया है और इस धार्मिक आयोजन को देखने के लिए देशभर से श्रद्धालु कांगड़ा पहुंचे हैं. 20 जनवरी को मक्खन मां की पिंडी से उतारा जाएगा और इसे श्रद्धालुओं में प्रसाद स्वरूप बांटा जाएगा.यह है मान्यता
मान्यता है कि इस मक्खन रूपी प्रसाद से चर्म रोगों से निदान मिलता है. घृत मंडल पर्व के संबंध में कहा जाता है कि जालंधर दैत्य को मारते समय मां बज्रेश्वरी देवी के शरीर पर कई चोटें आई थीं तथा देवताओं ने माता के शरीर पर घृत का लेप किया था. इसी परंपरा के अनुसार देसी घी को एक सौ एक बार शीतल जल से धोकर उसका मक्खन बनाकर मां की पिंडी पर चढ़ाया जाता है. साथ ही मेवों और फलों की मालाएं भी चढ़ाई जाती हैं. देर रात तक मां की पिंडी पर लेप लगाने का कार्य जारी रहा.

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First published: January 17, 2020, 5:32 PM IST
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