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विस चुनाव : आखिर क्यों कांगड़ा से ही होकर गुजरती है विधानसभा की ‘डगर’

प्रतीकात्मक तस्वीर.
प्रतीकात्मक तस्वीर.

हिमाचल विधानसभा के लिए कांगड़ा जिले से 15 सीटें हैं. इसके बाद मंडी जिले में विधानसभा की 10 सीटें हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 25, 2017, 4:13 PM IST
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हिमाचल प्रदेश में विधानसभा तक का सफर तय करने के लिए कांग्रेस और भाजपा एड़ी और चोटी का जोर लगा रही है. लेकिन एक बात तो तय है कि विधानसभा की राह कांगड़ा जिले से ही होकर गुजरती है. यहां से जिस पार्टी को बढ़त मिलती है, उस पार्टी को चुनाव जीतने और सरकार बनाने में आसानी होती है.

दरअसल, हिमाचल विधानसभा के लिए कांगड़ा जिले से 15 सीटें हैं. इसके बाद मंडी जिले में विधानसभा की 10 सीटें हैं.

सरकार बनाने में कांगड़ा अहम
बता दें कि कि बीते विधानसभा चुनाव में कांगड़ा से कांग्रेस ने आठ सीटों पर जीत हासिल की थी. इसके अलावा, भाजपा के खाते में तीन सीटें गई थी.
भाजपा की अगर बात की जाए तो 1977,1990,1998 और 2007 में भाजपा में सरकार बनाई थी.



इस दौरान कांगड़ा ने ही शिमला तक भाजपा का सफर सुगम बनाने में अहम योगदान दिया. 2012 के चुनाव में भाजपा की आपसी लड़ाई के चलते कांगड़ा उनके हाथ से खिसक गया.

कई कद्दावर नेता यहां से लड़ते हैं चुनाव
कांगड़ा जिले से ही कांग्रेस और भाजपा, दोनों पार्टियों के कई कद्दावर नेता चुनाव लड़ते हैं. परिवहन मंत्री जीएस बाली इसी जिले से आते हैं. इसके अलावा, मौजूदा कांग्रेस सरकार में धर्मशाला से सुधीर शर्मा और फतेहपुर से सुजान सिंह पठानिया मंत्री हैं. इसके अलावा भाजपा की सरवीण चौधरी, रमेश ध्वाला और पूर्व मंत्री किशन कपूर भी यहीं से आते हैं. शांता कुमार भी इसी जिले से संबंध रखते हैं.

शाह ने भी इसलिए की थी यहां से रैली
बता दें कि 23 सितंबर को ही कांगड़ा के नगर परिषद मैदान में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने रैली कर चुनाव बिगुल बजाया था. भाजपा ने यहां एक बड़ी रैली की थी, जिसे युवाओं को ध्यान में रखते हुए आयोजित किया गया था.

शिमला जिले में आठ विधानसभा क्षेत्र
बता दें कि शिमला जिला विधानसभा सीटों के मामले में तीसरे नम्बर पर है. यहां पर आठ सीटें हैं. सीएम भी यहीं चुनाव लड़ते हैं.
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