कांगड़ा वायरल फोटो: टांडा अस्पताल ने भी महिला को भर्ती करने से किया था इंकार

कांगड़ा का युवक वीर सिंह.

Kangra Viral Photos: कांगड़ा के जिलाधीश राकेश प्रजापति ने इस पर संज्ञान लेते हुये कांगड़ा के SDM से वर्चुअल मीटिंग करते हुये घटना की हर जानकारी ली. उसके बाद अपनी स्टेटमेंट जारी करते हुये कहा, कि ये वाकया बेहद शर्मसार कर देने वाला है. हम सब की मानसिकता पर ये कलंक के काले टीके की तरह है, जिसके दाग बेहद गहरे होंगे जिन्हें किसी वाशिंग पाउडर से नहीं धोया जा सकता. मगर इस घटना से सबक जरूर लिया जा सकता है.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में ग्रामीणों के इंकार के बाद मां के शव को अकेले श्मशानघाट (Graveyard) ले जाने के मामले में अहम खुलासे हुए हैं. बताया जा रहा है कि इससे पहले, टांडा मेडिकल कॉलेज (Tanda Medical College) ने भी महिला को अस्पताल में भर्ती करने से इंकार कर दिया था. महिला (Women) को इसके बाद घर ले जाया गया, जहां 24 घंटे में गुरुवार को महिला की मौत हो गई. इस मामले की फोटो सोशल मीडिया (Social Media) पर वायरल हुई है और पूरा मामला हिमाचल में चर्चा का विषय बन गया है.

क्या है मामला
दरअसल, कांगड़ा के रानीताल के भंगवार पंचायत का यह मामला है. बताया जा रहा है कि पूरे गांव में दो ही दलित परिवार हैं. वीर सिंह भी उन्हीं में से एक हैं. वीर सिंह की मां का गुरुवार को कोरोना संक्रमण की वजह से घर पर ही मौत हो गई थी और जब उनकी मां को श्मशान घाट तक पहुंचाने के लिये सरकार-प्रशासन और समाज की ओर से कोई आगे नहीं आया तो उसने ख़ुद को संभालते हुये अकेले ही मां को कंधे पर रखकर श्मशान घाट की ओर निकल गया.

बेटे ने कंधे पर उठाया शव
बताया जा रहा है कि युवक की रिश्तेदारों ने भी मदद नहीं की तो परेशान और निराशा में वह शव कंधे पर उठाकर चल दिया. वीर सिंह के घर से श्मशान घाट की दूरी महज एक किमी थी. हालाकिं, गांव के कुछ लोग पहले ही आगे लकड़ियां एकत्र करने के लिए चले गए थे. वहीं, प्रधान को मामले की सूचना दी गई थी, लेकिन वह खुद कोरोना संक्रमित थे. उन्होंने हालांकि, ट्रैक्टर चालकों को मदद के लिए कहा था, लेकिन चालक ने इंकार कर दिया था. बाद में पूरा मामला सीएम तक भी पहुंचा था.

क्या बोले डीसी कांगड़ा
घटनाक्रम के सामने आने के बाद कांगड़ा के जिलाधीश राकेश प्रजापति ने इस पर संज्ञान लेते हुये कांगड़ा के SDM से वर्चुअल मीटिंग करते हुये घटना की हर जानकारी ली. उसके बाद अपनी स्टेटमेंट जारी करते हुये कहा, कि ये वाकया बेहद शर्मसार कर देने वाला है. हम सब की मानसिकता पर ये कलंक के काले टीके की तरह है, जिसके दाग बेहद गहरे होंगे जिन्हें किसी वाशिंग पाउडर से नहीं धोया जा सकता. मगर इस घटना से सबक जरूर लिया जा सकता है. उन्होंने कहा कि इससे पहले भी 90 फ़ीसदी कोरोना संक्रमित मरीजों की मौतों के बाद प्रशासन की ओर से ही प्रोटोकाल के तहत अंतिम संस्कार किया गया है, मगर अब प्रशासन ने ये फ़ैसला ले लिया है कि घर पर भी अगर किसी की मौत होती है तो वहां भी प्रशासन ही कोरोना प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार करेगा. अब चाहे उसमें DC या SP को भी ही क्यों न जाना पड़े, भविष्य में ऐसी कोई तस्वीर सामने न आये इस दिशा में वो जरूर कठोर कदम उठाएंगे. उन्होंने कहा कि समाज को भी सोचना चाहिये कि वो भी आज के दौर में इतने असंवेदनशील न बनें कि हम किसी की अंतिम यात्रा में भी अपना योगदान न दे पाएं.
सोशल मीडिया पर बवाल
पूरा मामला सामने आने पर सोशल मीडिया में फोटो वायरल हो गई. हर कोई सवाल उठाने लगा कि ग्रामीणों ने ऐसा क्यों किया. कोई क्यों युवक की मदद के लिए सामने नहीं आया. रिश्तेदारों ने भी क्यों मुंह मोड़ दिया. घटना को लेकर सोशल मीडिया में लोगों ने रोष जताया और सरकार को कोसा.