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मॉरीशस के PM जुगनाथ पत्नी के साथ पहुंचे कांगड़ा के बगलामुखी मंदिर, करवाया अनुष्ठान

News18 Himachal Pradesh
Updated: December 4, 2019, 2:47 PM IST
मॉरीशस के PM जुगनाथ पत्नी के साथ पहुंचे कांगड़ा के बगलामुखी मंदिर, करवाया अनुष्ठान
मॉरीशस के प्रधानमंत्री कांगड़ा के बगलामुखी मंदिर में पहुंचे.

Mauritius Prime Minister in Kangra : भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो क्रमशः दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं.

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देहरा (कांगड़ा). मॉरीशस (Mauritius) के प्रधानमंत्री (Prime Minister) प्रविंद जुगनाथ अपनी पत्नी के साथ बुधवार को हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में शत्रुनाशिनी देवी माँ बगलामुखी मंदिर (Baglamukhi Temple, Kangra) पहुंचे. यहां उन्होंने तांत्रिक पूजा और हवन करवाया. इस दौरान सुरक्षा की दृष्टि से मंदिर छावनी में तब्दील कर दिया गया. किसी को भी मंदिर जाने की अनुमति नहीं दी गई. यह पीएम का निजी दौरा बताया जा रहा है. प्रविंद जुगनाथ (Pravind Jugnath) ने राजनीतिक पूजा करवाई है. इस पूजा से अपने प्रतिद्वंद्वी से जीत निश्चित हो जाती है. मंदिर के महंत रजत गिरी ने भी इसकी पुष्टि की है.

मंदिर में दो घंटे रुके
बुधवार सुबह 9 बजे से पहुंचे शत्रुनाशिनी देवी माँ बगलामुखी मंदिर पहुंच कर मॉरीशस के पीएम प्रविंद जुगनाथ ने करीब दो घंटे मंदिर में बिताए और अपनी पत्नी के साथ पूजा में व्यस्त रहे. अभी हाल ही में दो महीने पहले ही 22 सितम्बर को बगलामुखी मंदिर में मॉरीशस के प्रधानमंत्री की पत्नी कोबिता जुगनाथ ने शीश नवाया था. उन्होंने ने ही आम चुनावों में अपने पति प्रविंद जुगनाथ की जीत के लिए राजनीतिक अनुष्ठान करवाया था. आज मॉरीशस के पुनः प्रधानमंत्री बनने पर अपनी पत्नी के साथ माँ बगलामुखी का धन्यवाद करने पहुंचे हैं.
डीसी ने किया स्वागत

कांगड़ा के गगल स्थित एयरपोर्ट पर उनका स्‍वागत प्रशासन की तरफ से डीसी राकेश प्रजापति और एसपी विमुक्‍त रंजन ने किया. उसके बाद गगल एयरपोर्ट से वे बनखंडी स्थित मां बगलामुखी के मंदिर पहुंचे. बुधवार शाम को उनका दिल्ली लौटने का कार्यक्रम है.
यूपी में पैतृक गांव
मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ का पैतृक गांव यूपी के गाजीपुर में औड़िहार कोतवाली क्षेत्र सैदपुर के खोजनपुर ग्राम पुरवा बलुआ बताया जा रहा है. पीएम पिछले साल दिसम्बर 2018 में पहली बार आये थे. मॉरिशस के निवर्तमान प्रधानमंत्री प्रविंद जुगनाथ ने 12 नवम्बर को एक बार फिर पीएम पद की शपथ ली थी. उनके गठबंधन को हालिया संसदीय चुनावों में जीत मिली है। जगन्नाथ (57) ने 2017 में अपने पिता से पदभार ग्रहण किया था और इस चुनाव में उनके गठबंधन को मिली निर्णायक जीत से उनकी स्वीकार्यता को मजबूती मिली है.
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कई हस्तियां आती हैं यहां
अपने कार्यकाल में 15 मार्च 2015 को पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भी अपने राष्ट्रपति शासन के कार्यकाल में माँ बगलामुखी मंदिर में दर्शनों उपरांत हवन अनुष्ठान करवाया, जिसके बाद से ये मंदिर पूरे भारत में सुर्खियों में आया. सन 1977 में चुनावों में हार के बाद पूर्व प्रधानमन्त्री इंदिरा गाँधी ने भी प्रदेश के इस प्राचीन मन्दिर में अनुष्ठान करवाया. उसके बाद वहह फिर दोबारा सत्ता में आई और 1980 में देश की प्रधानमंत्री बनी.

बगलामुखी मंदिर में पूजा करते मॉरिशस के पीएम.
बगलामुखी मंदिर में पूजा करते मॉरिशस के पीएम.


ये भी पहुंचे थे
इससे पहले भी इस मन्दिर में कई नामी हस्तियाँ हाजिरी भर चुकी हैं. इनमें नोट फॉर वोट मामले में फंसे सांसद अमर सिंह, उनके साथ आई सांसद जया प्रदा, आतंकवादी विरोधी फ्रंट के अध्यक्ष मनमिंदर सिंह बिट्टा, कोंग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर, उत्तर प्रदेश के कांग्रेस सांसद राज बब्बर की पत्नी नादिरा बब्बर के नाम सुर्ख़ियों में रहे. गोविंदा और गुरदास मान जैसी जाने-माने चेहरे यहां आए हैं. कांगड़ा के देहरा से मात्र 8 किलोमीटर कि दूरी पर स्थित मां बगलामुखी मंदिर हजारों साल पुराना है.

देशभर में तीन ही मंदिर
भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर हैं, जो क्रमशः दतिया (मध्यप्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा नलखेड़ा (मध्यप्रदेश) में हैं. तीन मुखों वाली त्रिशक्ति माता बगलामुखी का एक मंदिर आगरमालवा जिला में नलखेड़ा में लखुंदर नदी के किनारे है. मां बगलामुखी भगवान राम की कुल देवी व रावण की ईष्टदेवी हैं.

ऐसे पड़ा बगुलामुखी नाम
मां बगलामुखी को नौ देवियों में 8वां स्थान प्राप्त है. मां की उत्पत्ति ब्रह्मा द्वारा आराधना करने की बाद हुई थी. ऐसी मान्यता है कि एक राक्षस ने ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया कि उसे जल में कोई मनुष्य या देवता न मार सके. इसके बाद वह ब्रह्मा जी की पुस्तिका ले कर भाग रहा था. तभी ब्रह्मा ने मां भगवती का जाप किया. मां बगलामुखी ने राक्षस का पीछा किया तो राक्षस पानी मे छिप गया. इसके बाद माता ने बगुले का रूप धारण किया और जल के अंदर ही राक्षस का वध कर दिया. त्रेतायुग में मां बगला मुखी को रावण की ईष्ट देवी के रूप में भी पूजा जाता है. त्रेतायुग में रावण ने विश्व पर विजय प्राप्त करने के लिए मां की पूजा की. मंदिर की हर चीज पीले रंग की है. यहां तक कि प्रसाद भी पीले रंग ही चढ़ाया जाता है.

(रिपोर्ट- ब्रजेश्वर साकी)

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First published: December 4, 2019, 2:47 PM IST
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