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मिलिये, हिमाचल की मोटर मेकेनिक बेटी से, जो करती है वाहनों की ‘तसल्ली बख्श मरम्मत’
Dharamsala News in Hindi

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: January 7, 2020, 5:12 PM IST
मिलिये, हिमाचल की मोटर मेकेनिक बेटी से, जो करती है वाहनों की ‘तसल्ली बख्श मरम्मत’
टॉप क्लास कंपनी में बतौर मोटर मेकेनिक काम कर रही है. स्नेहलता.

Women Motar Mechanic in Kangra: नामी कंपनी के गैराज़ में आज स्नेहलता के हाथ बड़ी मशीनरी और टूल्स के बीच में इस कदर घूमते हैं कि पुरुष प्रधान मैकेनिक समाज में आज हर कोई इस इकलौती महिला मैकेनिक का कायल हो जाता है.

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धर्मशाला. किसी शायर ने क्या खूब कहा है कि मुश्किलें दिल का हौंसला आजमाती हैं, ख्वाबों को आंखों पर से हटाती हैं, पर हार मत मानना-ए-मुसाफिर, आखिर यही ठोकरें इंसान को चलना सिखाती हैं.

कांगड़ा (Kangra) की बेटी स्नेहलता पर यह लाइनें स्टीक बैठती है. यह अनाथ बेटी तमाम मुश्किलों के बावजूद देश की टॉप क्लास कंपनी में बतौर मोटर मेकेनिक काम कर रही है. स्नेहलता (Kangra Motor Mechanic Girl Snehalata) ने घर की चारदिवारी में खुद को कैद करने की बजाय दुनियादारी में अपनी मेहनत से सर उठाकर जीना चुना है.

चार साल की उम्र में माता पिता का देहांत
स्नेहलता जब महज 4 साल की थी तो उसके सिर से उसके मां-बाप का साया उठ गया था. स्नेहलता के 8 भाई-बहन हैं, जिसमें वो चौथे नंबर की है. असहज हालात में बेरुख जिंदगी की डगर पर चलते हुए स्नेहलता ने बामुश्किल अपनी स्कूलिंग पूरी की. बड़े भाई ने भाई होने का फर्ज इतना अदा किया कि बहन अपने पैरों पर खड़ी हो सके, उसे शाहपुर आईटीआई में दाखिला दिलवा दिया आईटीआई शाहपुर में बतौर इलैक्ट्रिशियन स्नेहलता ने अपनी प्रतिभा के जौहर से डिप्लोमा हासिल किया और कई जगहों में बतौर इलैक्ट्रिशियन कामकाज भी करना शुरू कर दिया.



कांगड़ा में एक गैराज में काम करती हैं स्नेहलता.
कांगड़ा में एक गैराज में काम करती हैं स्नेहलता.


कई जगह किया काम
स्नेहलता की मेहनत का ही नतीजा था कि वह जहां भी काम करती है, सबका दिल जीत लेती है. बावजूद इसके उसे अभी भी अपने काम से संतुष्टि नहीं मिली.उसने अपने इस काम से हटकर बड़ी गाड़ियों की मुरम्मत करने का सपना संजोया और कई मोटर मेकेनिकों के पास जाकर काम भी सीखने लग गई. स्नेहलता जहां गाड़ियों और इमारतों में अपने इलेक्ट्रिकल काम के लिए प्रखर थी. वहीं मैकेनिकल काम में भी उसकी दिलचस्पी ने उसे नई राह दिखा दी. स्नेहलता के मजबूत इरादों को उस वक्त पंख लग गए, जब आईटीआई शाहपुर में कैंपस प्लेसमेंट हुई और स्नेहलता की प्रतिभा को एक नामी कंपनी ने पहचानते हुए उसे अपने कुनबे में शामिल कर लिया. नगरोटा बंगवा स्थित इस नामी कंपनी के गैराज़ में आज स्नेहलता के हाथ बड़ी मशीनरी और टूल्स के बीच में इस कदर घूमते हैं कि पुरुष प्रधान मैकेनिक समाज में आज हर कोई इस इकलौती महिला मैकेनिक का कायल हो जाता है.

स्नेहलता के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी.
स्नेहलता के माता-पिता की बचपन में ही मौत हो गई थी.


दूसरों को प्ररेणा मिलेगी
खुद कंपनी अब स्नेहलता की मेहनत, प्रतिभा और जज्बे को सलाम करते हुए और दूसरी महिलाओं को इस दिशा में मौका देना चाह रही है. इतना ही नहीं, कंपनी की एचआर की मानें तो उन्होंने स्नेहलता को अपने गैराज में नौकरी देकर कोई गलत कदम नहीं उठाया, बल्कि दूसरी महिलाओं के लिए भी मैकेनिक्ल के क्षेत्र में अपना जौहर दिखाने का रास्ता खोल दिया है.

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First published: January 7, 2020, 4:31 PM IST
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