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पुलवामा हमला: शहीद तिलक राज के नाम पर ना सड़क निकली, ना स्कूल प्रमोट हुआ

पुलवामा हमले के शहीद तिलक राज. (FILE PHOTO)

पुलवामा हमले के शहीद तिलक राज. (FILE PHOTO)

Pulwama Terror Attack: कांगड़ा के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के गांव धेवा जन्दरोंह का शहीद तिलक राज लोगों के दिलों में छाया हुआ है.

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    धर्मशाला. जम्मू-कश्मीर के पुलवामा (Pulwama Terror Attack) में हुए आतंकी हमले को शुक्रवार को एक साल पूरा हो गया है. इस हमले में देश के 40 सीआरपीएफ (CRFP) जवानों ने शहादत पाई थी. हमले में हिमाचल के कांगड़ा जिले के जवान तिलक राज (CRFP Jawan Tilak Raj) भी शहीद हो गए थे.

    हमले के दौरान सरकारों ने कई वादे और घोषणाएं शहीद (Martyred) के परिवार से की, लेकिन वह अब तक अधूरी हैं. केवल शहीद तिलक राज की पत्नी को सरकारी नौकरी मिली है, जबकि उनके नाम पर ना सड़क बनी ना स्कूल प्रमोट हुआ है. वहीं, स्थानीय गांव के श्मशानघाट को भी बेहतर बनाने का वादा अधूरा है. स्थानीय विधायक भी खास मौके पर आते हैं और अपनी सियासी रोटियां सेंक कर निकल जाते हैं.

    अपने गानों में जिंदा हैं तिलक
    कांगड़ा के ज्वाली विधानसभा क्षेत्र के गांव धेवा जन्दरोंह का शहीद तिलक राज लोगों के दिलों में छाया हुआ है. शहीद के गाए पहाड़ी आज भी शादी समारोह में बजते हैं और लोग उन पर नाचते हैं. तिलक राज का पहाड़ी गाना ‘मेरा सिद्धू शराबी’ आज भी विवाह व अन्य समारोहों में धूम मचाए हुए हैं. बता दें कि तिलक राज पहाड़ी गायक भी थे. वह जब भी छुट्टी आते थे तो लोक गीत गाते और शूट करते थे. ग्रामीणों का कहना है कि शहीद के घर से निकलने वाली प्रस्तावित सड़क अगर बन जाये तो शहीद के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी.

    पुलवामा हमले में शहीद हुए तिलक राज (FILE PHOTO)
    पुलवामा हमले में शहीद हुए तिलक राज (FILE PHOTO)


    पति की शहादत पर फ्रक
    शहीद तिलक राज की पत्नी सावित्री देवी ने भरी हुई नम आंखों से कहा कि उन्हें अपने पति की शहादत पर फक्र है. उन्होंने कहा कि मेरा परिवार अगली पीढ़ी ऐसे ही देश की रक्षा करेगा. उन्होंने युवा पीढ़ी को भी कहा कि सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा करें.

    पत्नी के साथ तिलक राज. (FILE PHOTO)
    पत्नी के साथ तिलक राज. (FILE PHOTO)


    उन्होंने कहा कि मेरे पति की शहादत को युगों-युगों तक नहीं भुलाया जा सकता. सावित्री बताया कि उनके पति जब भी छुट्टी आते थे तो पहाड़ी और कांगड़ी गानों की शूटिंग में व्यस्त रहकर कांगड़ा की संस्कृति की सुरक्षा में भी लगे रहते थे. उनका आखिरी गाना ‘मेरा सिद्दू शराबी’ आज भी जब विवाह समारोहों में बजता है तो उसकी याद एकदम ताजी हो जाती है. युवाओं में तिलक राज को ‘तिलक शान’ के नाम से पहचाना जाता था.

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