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'न्यूगल' पर हजारों खर्च कर पुल बनाते ग्रामीण, सरकार सुनती नहीं, बरसात बहा ले जाती है
Dharamsala News in Hindi

Bichitar Sharma | News18 Himachal Pradesh
Updated: December 7, 2019, 2:38 PM IST
'न्यूगल' पर हजारों खर्च कर पुल बनाते ग्रामीण, सरकार सुनती नहीं, बरसात बहा ले जाती है
पंचायत के लोगों का कहना है कि न्यूगल नदी पर स्थायी पुल के निर्माण की मांग ग्रामीण काफी वर्षों से सरकार से कर रहे है, परन्तु उनकी मांग अबतक पूरी नही हुई है.

कांगड़ा जिले (Kangra District) के कोना पंचायत (Kona Panchayat) के लोग हर साल न्यूगल नदी (Neugal River) पर लोहे और लकड़ी का पुलिया (Bridge) बनाने में लगभग 25-30 हजार रुपये खर्च कर देते हैं. बरसात के दिनो में पुलिया बह जाती हैं.

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धर्मशाला. जिला कांगड़ा और सुलह विधानसभा (Sulah Assembly Seat) की कोना पंचायत (Kona Panchayat) के वाशिंदों को आने-जाने के लिए न्यूगल नदी (Neugal River) पर पुल (Bridge) नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में काफी दिक्कतो का सामना करना पड़ता है. स्कूल जाने वाले बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बीमार-बुजुर्ग को समस्या को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही न्यूगल नदी पर 20 मीटर लंबा लोहे और लकड़ी का पुल बनाया है. इससे अब वह एक घंटे की दूरी महज 10 मिनट में तय कर लेते हैं.

पुलिया बनने से पांच किलोमीटर कम हो जाती है यात्रा

कोना पंचायत के वाशिंदें वर्षों से न्यूगल नदी पर स्थायी पुल की मांग कर रहे हैं. न्यूगल नदी पर लोहे और लकड़ी का पुल बनाने में लगभग हर साल 25 —30 हजार रुपये का खर्च आ जाता है. गांव के लोग खुद ही इस खर्च को हर साल उठाते हैं. स्थानीय निवासी अमित कुमार का कहना है कि यह पुल हर साल नदी में बरसात के दिनों में बह जाता है. इस लकड़ी और लोहे की पुलिया से रोजाना बड़ी तादाद में लोग नदी पार अपने कार्य क्षेत्र व अन्य काम से जाते हैं. स्वामी दास बताते हैं सैकड़ों छात्र भी रोजाना जान जोखिम में डालकर नदी पारकर दूसरी ओर जाते हैं. बरसात के दिनों में इस लोहे एवं लकड़ी के पुल बह जाने पर अक्सर ग्रामीणों को बस स्टॉप तक जाने के लिए ग्रामीणों को 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है.

बरसात में बह जाती है पुलिया

पंचायत के लोगों का कहना है कि न्यूगल नदी पर स्थायी पुल के निर्माण की मांग ग्रामीण काफी वर्षों से सरकार से कर रहे है, परन्तु उनकी मांग अबतक पूरी नही हुई है. कांगड़ा जिले के कोना पंचायत के लोग हर साल न्यूगल नदी पर लोहे और लकड़ी का पुलिया बनाने में लगभग 25—30 हजार रुपये खर्च कर देते हैं. बरसात के दिनो में पुलिया बह जाती हैं जिस कारण ग्रामीणों को बस पकड़ने के लिए ग्रामीणों को 5 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ता है. यह रास्ता जंगल से होकर जाता है, जो खतरे से भरा है.



ग्रामीणों ने की मुख्यमंत्री से यहां स्थायी पुल के निर्माण की मांगसमीर अवस्थी ने बताया कि कोना पंयायत के लोगों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री से यहां स्थायी पुल के निर्माण की मांग करते हुए कहा कि पुल बन जाने से उन्हे आने जाने की अच्छी सुविधा हो जाएगी और लगभग आधे दर्जन गांवों के लोगों को लाभ होगा.

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First published: December 7, 2019, 2:19 PM IST
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