Kangra: अस्पताल के लिए भूख हड़ताल पर बैठे लोग, भजन-कीर्तन कर ‘भगवान’ की तैनाती की मांग

आंदोलन में बैठी महिलाएं.

आंदोलन में बैठी महिलाएं.

Protest in Kangra: कांगड़ा जिले में लोग स्वास्थ्य केंद्र में बेहतर सुविधाओं के लिए धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिले में शाहपुर की तियारा पंचायत में इन दिनों भड़ियाड़ा वार्ड के जिला पार्षद पंकज कुमार की अगुवाई में बेहद अनोखा आंदोलन चल रहा है. दरअसल, ये आंदोलन तियारा में बनाए गए उपस्वास्थ्य केंद्र (Health Center) को लेकर चल रहा है. स्थानीय लोग अलग-अलग पंचायतों के प्रतिनिधि और महिलाएं हर रोज यहां आकर इस आंदोलन में शरीक हो रही हैं. इनका मानना है कि यहां मनकोटिया परिवार की ओर से बड़ा हॉस्पिटल बनाने के लिये करीब 100 कनाल ज़मीन सरकार को दान में दे दी गई थी, बावजूद इसके आज यहां उपस्वास्थ्य केंद्र तो बनाया गया है लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने यहां के लोगों की भावनाओं से खिलवाड़ करते हुए इसे कबाड़ केंद्र बना दिया है.

जमीन अधिक होने और कस्बे से थोड़ा हटकर होने के चलते यहां 35 के करीब खराब एम्बुलेंस को पार्क कर दिया गया है, जो कि अब धीरे धीरे जंग खा रही है. वहीं, यहां PHC में स्टाफ और डॉक्टर की भी प्रॉपर तैनाती नहीं है, जिसकी वजह से यहां की सैकड़ों की आबादी को ज़्यादा किराया भाड़ा खर्च कर या तो टांडा मेडिकल कॉलेज में जाना पड़ता है या फिर जोनल हॉस्पिटल धर्मशाला का जाकर इलाज करवाना पड़ता है. ऐसे में 100 कनाल ज़मीन देकर यहां बड़ा हॉस्पिटल का सपना संजोने वाले लोग आज ख़ुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं.

कांगड़ा में अस्पताल में सुविधाओं के लिए धरना.


भजन-कीर्तन कर रहे लोग
भड़ियाडा वार्ड से ताल्लुक रखने वाले जिला पार्षद पंकज कुमार ने कहा कि उनकी ओर से तियारा की इस PHC को अब CHC यानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने, यहां स्वास्थ्य सम्बन्धी स्टाफ़ की प्रॉपर तैनाती करवाने, एम्बुलेंस की भी प्रॉपर व्यवस्था करवाने समेत स्वास्थ्य महकमे द्वारा बनाए गए कबाड़खाने को हटाने के लिये आंदोलन किया जा रहा है और इस आंदोलन की खासियत ये है कि यहां बैठने वाले लोग भूख हड़ताल कर भजन कीर्तन कर रहे हैं, ताकि शांतिपूर्वक उनकी आवाज़ सरकार के कानों तक पहुंच सके. पंकज कुमार ने कहा कि उनका मकसद सरकार की ख़िलाफ़त करना नहीं है, अपितु सरकार से अपनी समस्याओं को सुलझाने का एकमात्र ये प्रयास है और अगर सरकार ने उनके इस प्रयास पर गौर नहीं किया तो बहुत जल्दी वो आमरण अनशन पर भी बैठेंगे, क्योंकि मांगें तो सरकार को माननी ही पड़ेगी.
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