हिमाचल के पूर्व CM और BJP नेता शांता कुमार ने राजनीति को कहा ‘अलविदा’

शांता कुमार दो बार हिमाचल के सीएम रहे हैं.

शांता कुमार दो बार हिमाचल के सीएम रहे हैं.

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह खाद वह उपभोक्ता मामले के मंत्री बने. साल 1999 से 2002 तक वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के मंत्री भी शांता कुमार को बनाया गया. मौजूदा समय में भी कांगड़ा लोकसभा सीट के सांसद हैं. 2008 में राज्य सभा में उन्हें राज्यसभा के लिए भी चुना गया था.

  • Share this:

दो बार हिमाचल के सीएम रहे भाजपा के सीनियर नेता शांता कुमार ने आखिकार राजनीति को अलविदा कह दिया है. मंगलवार को कांगड़ा के धर्मशाला में एक कार्यक्रम में शांता ने अपनी राजनीतिक पारी से सन्यास लेने की घोषणा की.

इस दौरान शान्ता कुमार के दिल का दर्द मंच से छलका. उन्होंने कहा कि आज आप लोग विजय का उत्सव मनाएंगे और मैं विदाई का उत्सव मनाऊंगा.

कार्यक्रम में शांता कुमार ने कहा कि मैं बेहद खुश हूं और आज राजनीति से विदाई का उत्सव मना रहा हूं. आज देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सही दिशा में अग्रसर है.



बता दें कि इस बार 85 साल के शांता कुमार ने कांगड़ा सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था. भाजपा ने इस सीट से हिमाचल सरकार में खाद्य आपूर्ति मंत्री किशन कपूर को टिकट दिया है.
कौन हैं शांता कुमार

पंच के चुनाव से राजनीति की शुरुआत की. शांता कुमार ने 1963 में पहली बार गढ़जमूला पंचायत से जीते थे. उसके बाद वह पंचायत समिति के भवारनां से सदस्य नियुक्त किए गए. बाद में 1965 से 1970 तक कांगड़ा जिला परिषद के भी अध्यक्ष रहे.

शिक्षा: प्रांरभिक शिक्षा के बाद जेबीटी की पढ़ाई की और एक स्कूल में टीचर लग गए. लेकिन आरएएस में मन लगने की वजह से दिल्ली चले गए. वहां जाकर संघ का काम किया और ओपन यूनिवसर्सिटी से वकालत की डिग्री की.

जेल गए और लड़ा चुनाव

सत्याग्रह और जनसंघ के आंदोलन में भी शांता कुमार ने भाग लिया और जेल की हवा भी खाई. 1971 में शांता कुमार ने पालमपुर विधानसभा से पहला चुनाव लड़ा और कुंज बिहारी से करीबी अंतर् से हार गए. एक साल बाद प्रदेश को पूर्णराज्य का दर्जा मिल गया और 1972 में फिर चुनाव हुए शांता कुमार खेरा से विधानसभा पहुंचे.

आपातकाल का दौर

साल 1977 में आपातकाल के बाद जब विधानसभा चुनाव हुए तो जनसंघ की सरकार बनी और शांता कुमार ने कांगडा के सुलह विधानसभा से चुनाव लड़ा और फिर प्रदेश के मुखिया बने. लेकिन सरकार का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके. इसके बाद 1979 में पहली बार काँगड़ा लोकसभा के चुनाव जीते और सांसद बने. साल 1990 में वह फिर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने, लेकिन 1992 में बाबरी मस्जिद घटना के बाद शांता कुमार एक बार फिर अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर सके.

केंद्र में रहे मंत्री

अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में वह खाद वह उपभोक्ता मामले के मंत्री बने. साल 1999 से 2002 तक वाजपेयी सरकार में ग्रामीण विकास मंत्रालय के मंत्री भी शांता कुमार को बनाया गया. मौजूदा समय में भी कांगड़ा लोकसभा सीट के सांसद हैं. 2008 में राज्य सभा में उन्हें राज्यसभा के लिए भी चुना गया था.

ये भी पढ़ें : हिमाचल की सियासत के ‘चाणक्य’: दो दशकों में 4 बार पार्टियां बदल चुके हैं सुखराम

पिता-बेटे के कांग्रेस में जाने पर बोले मंत्री अनिल शर्मा-BJP में ही रहूंगा, कांग्रेस में नहीं जाऊंगा

त्रियुंड से लापता दिल्ली का युवक सुरक्षित मिला, 8 दिन पानी पीकर रहा जिंदा

जीत को लेकर BJP सांसद अनुराग ठाकुर आश्वस्त, बोले-जीत का चौका लगाऊंगा

मंत्री अनिल शर्मा के इस्तीफे के बारे में हाईकमान से ली जाएगी सलाह : सीएम

70 साल बाद भी सड़क को तरस रहे पलगोट के बाशिंदे, लोस चुनाव में दबाएंगे NOTA!

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज