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पौंग बांध विस्थापन: आमरण अनशन पर बैठे कांगड़ा के 70 वर्षीय बुजुर्ग
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News18 Himachal Pradesh
Updated: March 3, 2020, 5:10 PM IST
पौंग बांध विस्थापन: आमरण अनशन पर बैठे कांगड़ा के 70 वर्षीय बुजुर्ग
कांगड़ा के 70 साल के बुजुर्ग ने फिर से धरना शुरू किया है.

5418 विस्थापितों को अब तक जमीन नहीं मिल पाई है. इसके अलावा जहां कुछ लोगों को मुरब्बे आवंटित हुए हैं तो वहां मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं.

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देहरा (कांगड़ा). हिमाचल प्रदेश के जिला कांगड़ा के पौंग डैम (Pong Dam) विस्थापन का दर्द झले रहे लोगों का सब्र का बांध टूट चुका है. देहरा हरिपुर के डोला मोहारा से पौंग बांध विस्थापित अश्विनी अवस्थी ने राजस्थान की तहसील घड़साना में एक बार फिर आमरण अनशन शुरू कर दिया है. अश्विनी अवस्थी पौंग डैम विस्थापित हैं और पिछले कई सालों से राजस्थान सरकार के साथ अपने हक के लिए लड़ाई लड़ रहे हैं.

पहले भी किया था अनशन
अभी एक महीना पहले भी उन्होंने अनशन किया था, जिसे राजस्थान सरकार के स्थानीय प्रशासन के आश्वासन के बाद उन्होंने तोड़ दिया था. एक महीना बीतने के बाद भी उनकी समस्या का कोई समाधान सरकार की ओर से नहीं किया गया तो वह फिर से 2 मार्च से आमरण अनशन पर बैठ गए हैं. बता दें कि पिछले 50 वर्षों से पौंग डैम विस्थापित दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर हैं. ना तो उनकी सुनवाई हिमाचल सरकार कर रही है और ना ही राजस्थान में समस्या का हल निकल पाया है.

कांगड़ा के बुजुर्ग राजस्थान में धरना दे रहे हैं.
कांगड़ा के बुजुर्ग राजस्थान में धरना दे रहे हैं.




ये है मामला


वर्ष 1960 में 360 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के निर्माण के लिए कांगड़ा में ब्यास नदी पर पौंग बांध की आधारशिला रखी गई थी. यहां से राजस्थान पानी गया. बांध निर्माण के बाद 1972 में जलभराव के कारण कांगड़ा जिले की तहसील देहरा के 339 गांवों के करीब 30 हजार परिवार बेघर हो गए. विस्थापितों के पुनर्वास के लिए राजस्थान के श्रीगंगानगर में 2.20 हजार एकड़ भूमि आरक्षित की गई और इसके अलावा 30 हजार एकड़ भूमि केंद्र सरकार ने केंद्रीय राज्य फार्म जेतसर राजस्थान में दी. कुल 20,722 पौंग विस्थापितों में से 16,352 को राजस्थान सरकार ने 1966 से 1980 तक श्रीगंगानगर में आवंटन किए. इसके अलावा, 5418 विस्थापितों को अब तक जमीन नहीं मिल पाई है. इसके अलावा जहां कुछ लोगों को मुरब्बे आवंटित हुए हैं तो वहां मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं.

होशियार सिंह ने उठाया विधानसभा में मुद्दा

देहरा से निर्दलीय विधायक होशियार सिंह ने भी सदन में राजस्थान में पौंग बांध विस्थापितों के साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई. शिमला में बजट सत्र चल रहा है. इस दौरान विधायक ने हरिपुर के डोला मोहारा से पौंग बांध विस्थापित अश्विनी अवस्थी के राजस्थान की तहसील घड़साना में एक बार फिर आमरण अनशन की बात को उठाया. उन्होंने सदन में कहा कि कब तक कांगड़ा जिला के पौंग बांध विस्थापित किसानों को मुसीबतों का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि देश को खुशहाल जीवन देने वाले पौंग बांध विस्थापित आज रूखी सुखी रोटी खाने को मजबूर हैं. उन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार को हस्तक्षेप करने का आग्रह किया है.

(देहरा से ब्रजेश्वर साकी की रिपोर्ट)

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First published: March 3, 2020, 12:39 PM IST
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