सावधान! हिमाचल में मॉनसून सीजन में बढ़ने लगे सर्पदंश के मामले, ये एहतियात बरतें
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सावधान! हिमाचल में मॉनसून सीजन में बढ़ने लगे सर्पदंश के मामले, ये एहतियात बरतें
हिमाचल में सांप के काटने के मामले. (सांकेतिक तस्वीर)

Snake byte Cases in Himachal: बरसात के दिनों में चूहों का शिकार करने के लिए सांप घर के अंदर पहुंचते हैं, घर के सभी सुराख बंद रखने चाहिए. घर में सांप होने की स्थिति में वाइल्ड लाइफ विभाग के दूरभाष नंबर 01892-224939 व फोरेस्ट ऑफिस 01892-224959 पर संपर्क कर सकते हैं.

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धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश में बरसात के दिनों में प्रदेश भर सहित जिला कांगड़ा के मैदानी इलाकों सहित अब पहाड़ी क्षेत्रों में भी सांप काटने (Snake Byte) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में बरसात के दिनों में लोगों को अधिक जागरूक व सावधान रहने की जरूरत है. अधिक बारिश के दौरान चूहों का शिकार करने व बिलों में पानी भरने के कारण सांप (Snake) घरों के अंदर तक भी पहुंच रहे हैं.

इस दौरान ही अधिकतर लोगों को सांप द्वारा काटे जाने के मामले सामने आ रहे हैं, जिसके चलते अब स्वास्थय विभाग और वाइल्ड लाइफ डिपार्टमेंट (Wild life Department) ने भी लोगों को सजग रहने की हिदायत दी है. इसमें घरों में प्रवेश के खुले सभी स्थानों को पूरी तरह बंद करने, आस-पास सामान इकठ्ठा न करने और सफाई रखने की भी सलाह दी है.

इन नंबरों पर करें संपर्क
बरसात के दिनों में चूहों का शिकार करने के लिए सांप घर के अंदर पहुंचते हैं, घर के सभी सुराख बंद रखने चाहिए. घर में सांप होने की स्थिति में वाइल्ड लाइफ विभाग के दूरभाष नंबर 01892-224939 व फोरेस्ट ऑफिस 01892-224959 पर संपर्क कर सकते हैं.
घर से मिल रहे हैं सांप


इतना ही नहीं कई घरों में सांप के घुसने से भी लोगों में दहशत बनी हुई है, लोगों को अपने ही घर में रहने का डर सता रहा है. देश भर में हर वर्ष 60 हज़ार से दो लाख के बीच, जबकि पहाड़ी राज्य हिमाचल में सैंकड़ों लोगों की मृत्यु हर वर्ष सांपों के काटने से होती है. मैदानी क्षेत्रों में लगातार सांप के डसने के मामले सामने आ रहे हैं. हाल ही में कांगड़ा व हमीरपुर में छोटे-छोटे नौनिहाल घरों में ही सांप के काटने का शिकार हुए हैं. बड़ी बात यह है कि सांप के काटने से सभी इंडोर सुविधा वाले अस्प्तालों में वैक्सीन तो उपलब्ध है, लेकिन संस्थानों में वेटिलेंटर की व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण स्थिति अधिक गंभीर बनती है. मात्र आईसीयू वाले अस्पतालों में ही अब तक वेटिलेंटर की व्यवस्था है. यह भी पहाड़ी राज्य में सांप के काटने से अधिक मौतें होने का कारण बनती है.

क्या बोला वन विभाग
धर्मशाला हेडक्वार्टर डीएफओ वाइल्ड लाइफ देवेंद्र सिंह डढ़वाल ने बताया कि लोगों को अपने घर के सभी ओपन स्पेश को बंद कर देना चाहिए, ताकि किसी भी रास्ते से सांप घर में प्रवेश न कर सकें. सांप के काटने के अधिकतर मामले घरों के अंदर ही सामने आते हैं. उन्होंने बताया कि घर के आसपास व दिवार के साथ पत्थर, लकड़ी व कूड़े-कचरे के ढ़ेर भी एकत्रित नहीं होने देने चाहिए. वहीं अंधेरे वाले स्थानों में बिना टॉर्च और रोशनी के भी नहीं जाना चाहिए. सर्पदंश पर बिना घबराए 108 एम्बुलैंस में फोन करना चाहिए, साथ ही जल्द से जल्द अस्पताल में पहुंचना चाहिए.

ये चार सांप कांगड़ा में सबसे जहरीले
हिमाचल में अधिकतर सांप अधिक जहरीले नहीं है, लेकिन उनकी सही पहचान आम लोगों को नहीं है. ऐसे में जल्द से जल्द अस्पताल में उपचार के लिए पहुंचना चाहिए. हिमाचल में सबसे अधिक जहरीले सांप बिग फोर कोबरा, केरेट, सॉ-स्केल वाइपर व रश्ल वाइपर (घुग) शामिल है. भारत में सबसे अधिक मौतें रश्ल वाइपर (घुग) के काटने से होती है. प्रदेश में आम धारणा बनी हुई है कि रश्ल वाइपर (घुग) अधिक खतरनाक नहीं होता है, जबकि वह दिन व रात दोनों समय सक्रिय रहने वाला सांप है, जिसके कारण अधिक संपर्दश का शिकार होते हैं।

बरसात में बचने को अपनाए ये उपाय
वाइल्ड लाईफ डीएफओ एवं सांपों के विशेषज्ञ डीएस डढ़वाल ने बताया कि बरसात में संपदर्श की घटनाओं से बचने के लिए अलर्ट रहना जरूरी है. इसमें घर के प्रवेश करने वाले सभी स्थानों को बंद करना चाहिए, जिसमें किचन व बाथरूम से पानी निकासी के रास्ते को भी बंद करना जरूरी है. लकडिय़ां, पत्थर व गंदगी दिवारों के साथ न रखें, घर में नीचे न सोएं, बेडशीट को भी बैड में नीचे नहीं लटकाना चाहिए, अंधेरे वाले स्थान में बिना रोशनी के न जाए और घास व अधिक पत्तियों में भी संभल कर चलें.

सांप के काटने पर ये करें
सांप के काटने पर बिना घबराएं हुए पीड़ित को अपने शरीर को अधिक हिलाना नहीं चाहिए, जिसमें संपदर्श वाले स्थान को बिल्कुल शांत रखना चाहिए. सबसे पहले 108 एम्बुलैंस को फोन करना चाहिए, साथ ही जितना जल्दी हो सके, इंडोर अस्पताल में मरीज को एडमिट किया जा सकता है, उस अस्पताल में पहुंचना चाहिए. प्रदेश में इंडोर अस्पतालों में ही एंटी स्नैक विनम वैक्सीन की सुविधा रखी गई है. ये सुविधा एम्बुलैंस 108 में भी प्रदान की गई है. साथ ही पीड़ित को इस दौरान कुछ भी खिलाना-पिलाना नहीं चाहिए. जिला के सभी इंडोर अस्पतालों मेडिकल कॉलेज, जोनल, सिविल व सीएचसी में एंटी स्नैक विनम वैक्सीन रखी गई है. साथ ही आईसीयू की सुविधा वाले स्थानों में वेंटिलेटर की व्यवस्था रहती है.
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