‘धर्मगुरु दलाई लामा के अनुयायी हैं जो बाइडन’, निवार्सित तिब्बतियों की वतन वापसी की उम्मीदें बढ़ीं

तिब्बती सरकार के डिप्टी स्पीकर यशी फुंत्सोक.
तिब्बती सरकार के डिप्टी स्पीकर यशी फुंत्सोक.

यशी फुंत्सोक ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और भारतीय मूल की उपराष्ट्रपति कमला हैरिश को सयुंक्त राष्ट्र का राष्ट्रपति बनने पर बधाई भी दी है.

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धर्मशाला. अमेरिका में हुये राष्ट्रपति चुनाव (US President Elections) के बाद निवार्सित तिब्बतियों (Exile) का मनोबल दिन दोगुना रात चौगुना हो गया है. निवार्सित तिब्बतियों के इस बढ़े हुये मनोबल के पीछे अमेरिका के नवनिर्वाचित 46वें राष्ट्रपति जो बाइडन का हिज़ होलिनेस दलाईलामा का अनुयायी होना बताया जा रहा है.

दरअसल, जो बाइडन न केवल दलाईलामा के अनुयायी हैं, बल्कि वो कई बार उनसे मिल भी चुके हैं और हमेशा मिलने की आशा भी व्यक्त कर चुके हैं और ये तो जगज़ाहिर है कि दलाईलामा इन दिनों ख़ुद भारत में शरणार्थियों की ज़िंदगी जी रहे हैं और अमेरिका हमेशा से इन्हें इनके वतन भेजने के लिये अपनी सीनेट में प्रस्ताव पारित करता रहा है, मगर पहली मर्तबा उन्हें जो बाइडन के रूप में अमेरिका को मिले राष्ट्रपति से उम्मीदें कुछ ज़्यादा ही बढ़ गई हैं.

डिप्टी स्पीकर यशी फुंत्सोक का बयान



तिब्बती सरकार के डिप्टी स्पीकर यशी फुंत्सोक की मानें तो वो जो बाइडन ही हैं जो उन्हें उनके स्वदेश भिजवा सकते हैं, इसलिये भी क्योंकि दुनिया में एक अमेरिका ही है, जो सुपर पावर है और इस सुपर पावर को अगर आज की तारीख में किसी ने हिला कर रखा है तो वो है कोरोना और कोरोना की उतपति चीन से हुई है. वो चीन ही है, जिसने न केवल पूरी दुनिया को कोरोना दिया, बल्कि तीसरे वर्ल्ड वार में धकेलने की तैयारियां भी कर रहा है. चीन की नीति हमेशा विस्तारवादी रही है. चीन ने मित्र देशों को पहले बहलाया-फुसलाया फिर उनपर हुकूमत करनी शुरू कर दी और वतन के बफ़ादारों को उनके देश से बाहर भगा दिया, जिन्हें अब शरणार्थी होकर दूसरे देशों में जीवन यापन करना पड़ रहा है.


अमेरिका से उम्मीदें

ऐसे में इस देश पर अगर कोई अंकुश लगा सकता है तो वो सिर्फ़ अमेरिका है, और वो उम्मीद करते हैं कि जो बाइडन तिब्बतियों का सहयोग करेंगे. यशी फुंत्सोक ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन और भारतीय मूल की उपराष्ट्रपति कमला हैरिश को सयुंक्त राष्ट्र का राष्ट्रपति बनने पर बधाई भी दी है.
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