कांगड़ा: पंचायत पासू पंतेहड़ को विभाजित करने के लिए मंत्री से मिले MLA नैहरिया
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कांगड़ा: पंचायत पासू पंतेहड़ को विभाजित करने के लिए मंत्री से मिले MLA नैहरिया
मंत्री से मुलाकात करते हुए नैहरिया.

गौर रहे कि ग्राम पंचायत पासू पंतेहड़ करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी आबादी 3000 के लगभग है. इस पंचायत में 1600 के करीब मतदाता हैं.

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धर्मशाला. भले ही मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर (CM Jairam Thakur) और पंचायती राज विभाग की ओर से प्रदेश में फ़िलहाल नई पंचायतों के गठन पर रोक लगाने की बात कह दी हो, मगर भाजपा सरकार के धर्मशाला से उप चुनावों में चुने गये नये नवेले विधायक विशाल नैहरिया (Vishal Nehria) ने मुख्यमंत्री जयराम और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर (Virender Kanwar) से मुलाक़ात कर अपनी ही सरकार को सकते में डाल दिया है.

दरअसल, विकास खंड धर्मशाला के तहत आने वाली ग्राम पंचायत पासू पंतेहड़ को विभाजित कर दो पंचायतें बनाने के लिए ग्रामीणों की ओर से दिए गए प्रस्ताव को लेकर विधायक विशाल नैहरिया शिमला में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पंचायतीराज मंत्री वीरेंद्र कंवर से मिले हैं. इस दौरान उन्होंने पंचायत की वास्तुस्थिति से उन्हें अवगत करवाया. साथ ही बड़े क्षेत्र में फैली पंचायत को विभाजित कर दो पंचायतें बनाने की मांग की, ताकि क्षेत्र में चल रहे विकास कार्यों को और बढ़ावा मिल सके.

विधायक विशाल नैहरिया ने हाल ही में धर्मशाला विकास खंड के तहत नई बनाई गई पंचायतों टंग नरवाणा और उथड़ाग्राम के लिए भी मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और पंचायती राज मंत्री वीरेंद्र कंवर का धन्यवाद किया. उन्होंने बताया कि इन पंचायतों को अलग करके अब क्षेत्र में अधिक विकास कार्य करवाए जा सकेंगे. वहीं उन्होंने ग्राम पंचायत पासू पंतेहड़ को भी विभाजित करने की मांग रखी.




आबादी तीन हजार के करीब

गौर रहे कि ग्राम पंचायत पासू पंतेहड़ करीब चार किलोमीटर क्षेत्र में फैली हुई है और इसकी आबादी 3000 के लगभग है. इस पंचायत में 1600 के करीब मतदाता हैं. इतने बड़े क्षेत्र में फैली पंचायत को लेकर ग्रामीणों ने पासू पंतेहड़ पंचायत को दो पंचायत में विभाजित करने के लिए प्रस्ताव डाला था, ताकि क्षेत्र में विकासकार्यों को और गति मिल सके. विधायक विशाल नैहरिया ने की मानें तो पासू पंतेहड़ पंचायत के विभाजन को लेकर मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री ने उन्हें आश्वस्त किया है. इससे सवाल ये उठता है कि जब ख़ुद मुख्यमंत्री और पंचायती राज मंत्री अब नई पंचायतों का गठन न करने का हवाला दे चुके हैं तो फ़िर अपने विधायक को नई पंचायत का दोबारा गठन करने का इतनी जल्दी आश्वासन कैसे दे सकते हैं. अगर मुख्यमंत्री ऐसा करते हैं तो वो एक बार फिर जनता की रडार पर बार-बार फैसलों को बदलने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर आ जाएंगे.
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