कांगड़ा: गर्भवती को पहले 7 घंटे अस्पताल में रखा, फिर किया रेफर, गाड़ी में हुई डिलीवरी

कांगड़ा का ज्वालामुखी अस्पताल.

कांगड़ा का ज्वालामुखी अस्पताल.

खंड चिकित्सा अधिकारी ज्वालामुखी प्रवीण कुमार ने कहा कि ये मामला उनके ध्यान में नहीं है. यदि अस्पताल में ये घटना पेश आई है तो इसकी जानकारी जुटाई जाएगी. जो भी इसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

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ब्रजेश्वर साकी

ज्वालामुखी. हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा (Kangra) जिला स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है. कोरोना काल (Corona Virus) के बीच कांगड़ा के ज्वालामुखी अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं. यहां एक गर्भवती महिला को पहले यह कहकर 7 घण्टे तक अस्पताल में रखा गया कि शाम तक आराम से डिलीवरी हो जाएगी. लेकिन बाद में एमरजेंसी केस बताकर टांडा मेडिकल क़ॉलेज (TMC Kangra) और अस्पताल भेज दिया. महिला के परिजनों सहित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला गौसेवा प्रमुख देशराज भारती ने अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं.

महिला और बच्चे की जान पर खतरा

साथ ही आरोप लगाया है कि उनकी बजह से एक महिला और उसके बच्चे की जान तक खतरे में आ पहुंची थी, जिसका जिम्मेदार कौन होता? उन्होंने आरोप लगाया कि कोरोनाकाल के बीच ज्वालामुखी अस्पताल इलाज़ के नाम पर सिर्फ लोगों को दर्द दे रहा है. ऐसे में आपातकालीन स्तिथि में गरीब आदमी कहां जाए.
क्या है पूरा मामला

दरअसल, मामला 24 मई का है. बदोली पंचायत के एक गांव की महिला अनीता पत्नी वीरेंद्र को प्रसव पीड़ा के चलते ज्वालाजी अस्पताल लाया गया. परिजनों का कहना है कि इस बीच अस्पताल में मौजूद वरिष्ठ चिकित्सक ने उन्हें कहा कि घबराने की कोई जरूरत नहीं है ओर महिला की शाम तक डिलीवरी हो जाएगी.  परिजनों का आरोप है कि इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने अनीता को यहां दाखिल करवा लिया, लेकिन 7 घंटे बीत जाने के बाद यहां पहले मौजूद डॉक्टर की ड्यूटी खत्म होने के चलते दूसरी शिफ्ट में अस्पताल पहुंचे अन्य डॉक्टर ने एमरजेंसी केस बताकर उन्हें टांडा अस्पताल जाने की सलाह दी.

अपनी गाड़ी का किया इंतजाम



परिजनों का कहना है कि बिना देरी किये उन्होंने प्राइवेट गाड़ी का इंतज़ाम किया और उसे लेकर टांडा अस्पताल की ओर चल पड़े. अनीता के पति वीरेंद्र बताते हैं कि इस दौरान ज्वालामुखी से लगभग 20 किलोमीटर दूर पहुंचने के बाद बाथू पुल के समीप उनकी पत्नी की हालत एकाएक खराब हो गई और उसने अपनी आंखें तक बंद कर दी. अनीता के पति वीरेंद्र के अनुसार, जैसे-तैसे उनकी सास ने हिम्मत कर महिला का प्रसव उसी समय करवाया. उसने एक बच्ची को जन्म दिया. परिजनों के अनुसार ज्वालामुखी में ही यदि अनिता का समय रहते प्रसव करवा दिया जाता तो उन्हें इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़ता.  उनका कहना है कि सुबह साढ़े 11 बजे से वह अस्पताल में पहुंचे थे और 7 बजे उन्हें टांडा भेज दिया गया, जबकि उसके पौने घंटे के बाद ही महिला का गाड़ी में ही प्रसव हो गया.

निजी अस्पताल ने मांगी कोविड रिपोर्ट

अनीता के पति वीरेंद्र का कहना है कि गाड़ी में उनकी पत्नी का प्रसव होने के बाद वह वापिस ज्वालामुखी की तरफ आ गए. बच्चा कमजोर होने के चलते उसे दिखाने के लिए एक निजी अस्पताल लेकर पहुंचे. उनके अनुसार यहां निजी अस्पताल ने सबसे पहले उनकी पत्नी की कोविड रिपोर्ट मांगी व रिपोर्ट न होने के चलते उन्होंने बच्ची व पत्नी दोनों को देखने से इंकार कर दिया, जिसके चलते वह सीधे घर की तरफ ही वापिस आ गए. अनीता के पति का कहना है कि कोविड में जब डॉक्टर ही मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार करेंगे तो आम आदमी किसके पास जाकर अपना दुखड़ा रोए.

क्या कहते हैं अधिकारी

खंड चिकित्सा अधिकारी ज्वालामुखी प्रवीण कुमार ने कहा कि ये मामला उनके ध्यान में नहीं है. यदि अस्पताल में ये घटना पेश आई है तो इसकी जानकारी जुटाई जाएगी. जो भी इसमें दोषी होगा उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी.

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