हिमाचल सरकार पर सवाल: कांगड़ा में गौशाला में बच्चों संग गुजर-बसर कर रही लाचार मां

कांगड़ा की महिला बच्चों के साथ गौशाला में रहती है.
कांगड़ा की महिला बच्चों के साथ गौशाला में रहती है.

मीरा देवी की मानें तो साल 2018 में उसने वेलफेयर विभाग में मकान बनाने के लिए अर्जी दी थी, जिसका नंबर 900 है.

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धर्मशाला. मासूम बच्चों (Children) के सिर से पिता का साया उठ चुका है. हालात यह हैं कि अब मां के साथ गौशाला में रहने को मजबूर हैं. मामला हिमाचल के कांग़ड़ा जिले का है. यहां एक महिला (Women) अपने बच्चों के साथ गौशाला में रहती है. सिर पर छत न होने की वजह से गौशाला (Cowshed) में शरण लेनी पड़ी है.

पति की मौत हो चुकी है

दरअसल, मीरा देवी धीरा की भदरोल पंचायत की रहने वाली है और कुछ साल पहले अधेड़ आयु में ही उसके पति की मौत हो गई. उसके बाद घर की तमाम जिम्मेदारियों का बोझ मीरा देवी के कन्धों पर आ गया. मीरा देवी के पास ख़ुद की छत भी नहीं है और लाचारी में वो किसी दूसरों द्वारा रहने कब लिये दी गई गौशाला में जीवन यापन कर रही है. हैरत की बात तो ये है कि जिस गौशाला में मीरा अपने जवान बच्चों के साथ गुजर बसर कर रही है. वहां सरकार द्वारा मुहैया करवाई जाने वाली BPL जैसी योजनाओं का हलफनामा भी चस्पा किया गया है.



बोर्ड चिपकाया लेकिन घर नहीं
गौशाला की दीवार के बाहर पीले बोर्ड पर काली स्याही से मीरा कुमारी गरीब है और बीपीएल में आती है, ऐसा सरकारी बाबुओं द्वारा लिखा दिया गया है, मगर उन बाबुओं ने सामाजिक सरोकार नाम की चीज़ और इंसानियत तक को निभाना मुनासिब नहीं समझा कि कैसे एक लाचार और जवान बच्चों की मां को गौशाला की बजाय सरकारी धन राशि के ज़रिए मकान मुहैया करवाने के बारे में अवगत करवाया जाए. उसे प्रधानमंत्री आवास योजना के जरिये छत दिलाई जाए.

मकान के लिए दी है अर्जी

ख़ैर, आज मीरा देवी की लाचार हालत और बेबसी को मद्देनजर रखते हुये समाजसेवक यशवीर ने मदद के हाथ आगे बढ़ाए हैं और बेटियों को स्कूल तक ले जाने की बात कही है. बावजूद इसके, अगर मीरा देवी की मानें तो साल 2018 में उसने वेलफेयर विभाग में मकान बनाने के लिए अर्जी दी थी, जिसका नंबर 900 है, मगर आज दिन तक उस अर्जी पर सरकारी महकमें ने कोई प्रावधान नहीं किया जिसका उन्हें बेहद मलाल है.
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