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OPINION: मैदान में पसीना महिला खिलाड़ी भी बहाती हैं फिर उन्हें कम मेहनताना क्यों?

OPINION: मैदान में पसीना महिला खिलाड़ी भी बहाती हैं फिर उन्हें कम मेहनताना क्यों?

FILE PHOTO: नूरपुर के MLA राकेश पठानिया कबड्डी प्रतियोगिता की विजेता टीम को सम्मानित करते हुए

FILE PHOTO: नूरपुर के MLA राकेश पठानिया कबड्डी प्रतियोगिता की विजेता टीम को सम्मानित करते हुए

भारत ही नहीं पूरी दुनिया में खेल के मैदान में पुरुष खिलाड़ियों की तरह ही महिला खिलाड़ी भी पसीना बहाती हैं और जीत हासिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाती हैं, लेकिन जब मेहनताने की बात आती है तो वह पुरुषों के मुकाबले बहुत कम दी जाती है.

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    हाल ही में हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर के भडवार में कबड्डी प्रतियोगिता आयोजित की गई. इस प्रतियोगिता में पुरुषों की 18 टीम के साथ महिला कबड्डी टीम ने भी हिस्सा लिया. कबड्डी के इस आयोजन को लेकर स्थानीय निवासियों में भी काफी उत्साह देखने को मिला और यहां काफी संख्या में दर्शक इन मैचों का आनंद लेने भी पहुंचे. महिला वर्ग की टीमों में हिमाचल प्रदेश की टीमों के साथ पंजाब के गुरदासपुर की टीम भी हिस्सा लेने पहुंची थी. महिला वर्ग में फाइनल मैच नूरपुर स्पोर्ट्स क्लब और गुरदासपुर की टीम के मध्य हुआ. कांटे की इस टक्कर में अंत में गुरदासपुर की महिला टीम विजयी रही. गुरदासपुर की विजयी टीम को नूरपूर के विधायक राकेश पठानिया ने स्मृति चिन्ह और छः हजार की नकद राशि के साथ सम्मानित किया. वहीं, पुरुषों का फाइनल मैच हिमाचल प्रदेश के नूरपूर के सद्वां पंचायत की ही दो टीमों के मध्य हुआ. इसमें विजयी टीम को 21 हजार की नकद राशि और चमचमाती ट्राफी के साथ सम्मानित किया गया. अब सवाल यह उठता है कि मैदान पर पसीना बहाकर खेल जीतने वाली महिला और पुरुष दो टीमों के बीच पुरस्कार राशि में इतना फर्क क्यों रखा जाता है? एक तरफ हम बेटियां पढ़ें, बेटियां आगे बढ़े जैसे नारे गढ़ते हैं, पर जब व्यवहार की जमीन पर इसे उतारना हो तब हम इस बारे में क्यों सोचना, समझना और इसे उतारना छोड़ देते हैं?

    महिलाओं को पुरुषों के मुकाबले कमतर आंकने का सिलसिला यूँ तो हर फील्ड में आपको बहुत आसानी से देखने को मिल जाएगा, लेकिन खेल के मैदान में तो यह महिलाओं की जर्सी और जूतों को देखकर ही पता लग जाता है कि उन्हें पुरुषों के मुकाबले बहुत नीचे का दर्जा दिया गया है.

    भारत में लगभग सभी आउटडोर और इनडोर खेलों में पुरुष और महिलाओं के खेलों से सालाना आय में अंतर को देखें तो यह अंतर करीब 27 फीसदी का है. इस अंतर को भारतीय क्रिकेट कण्ट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के आंकड़ों में देखना चाहें तब हमें बहुत निराशा हो सकती है. आइये, हम एक नज़र बीसीसीआई के आंकड़ों पर डालते हैं.

    ग्रेड         पुरुष                 महिला (सालाना)

    ए प्लस-      07 करोड़       जानकारी उपलब्ध नहीं है

    ए-            05 करोड़         50 लाख

    बी-           03 करोड़         30 लाख

    सी-          01 करोड़         10 लाख

    वर्ष 2017 में महिला क्रिकेट खिलाडियों की सुविधा में इजाफा किया गया, लेकिन उनके सालाना कॉन्ट्रेक्ट राशि में कोई ख़ास फर्क नहीं आया. महिला क्रिकेट वर्ल्ड कप से पहले उनकी सुविधाओं में बढ़ोतरी के नाम पर दैनिक भत्ते में वृद्धि की गई और हवाई जहाज में उन्हें बिज़नेस क्लास में यात्रा का लाभ दिया गया.

    फुटबॉल में हम महिला खिलाड़ियों के प्रति दोयम दर्जे का व्यवहार करते रहे हैं. अचरज की बात है कि महिला टीम का विश्व फुटबॉल में 56वां रैंक है, जबकि पुरुष टीम टॉप 100 में शामिल हो पाई है. भारतीय फुटबॉल टीम में जगह बनाने वाले पुरुष खिलाड़ी को सालाना 65-70 लाख रूपये सालाना मिलता है, जबकि महिलाओं को 05-10 लाख रुपये सालाना मिलते हैं.

    भारतीय पुरुष और महिला हॉकी टीम के खिलाड़ियों को सालाना मिलने वाली राशी में 10 गुने से ज्यादा का फर्क है.

    जब दीपिका ने जताया विरोध तो बदली तस्वीर

    पुरुषों और महिला खिलाड़ियों के बीच इनामी राशि की बराबरी को लेकर स्क्वॉश की वर्ल्ड चैंपियन दीपिका पल्लिकल ने बगावत करते हुए राष्ट्रीय खेल में भाग लेने से मना कर दिया. दीपिका राष्ट्रीय प्रतियोगिता से पांच साल दूर रहीं. आयोजकों ने जब पुरुष और महिला खिलाडी को इनाम राशि बराबर यानि 1.25 लाख रुपये देने की बात की तब दीपिका ने राष्ट्रीय खेलों में भाग लेना शुरू किया. उसने, 2016 के बाद कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जीत दर्ज की.

    खेल में महिला और पुरुष खिलाड़ियों के बीच यह भेद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बहुत ज्यादा रहा है. दुनिया की 100 शीर्ष अमीर खिलाडियों की सूची में सिर्फ एक महिला टेनिस खिलाडी सेरेना विलियम ही जगह बना पाई.

    देश के नीति निर्माताओं और खेल जगत से जुड़े पदाधिकारियों को विचार करना चाहिए और महिला और पुरुष वर्ग के बीच मेहनताने के अंतर को जल्द से जल्द से दूर करना चाहिए.

    Tags: Dharamshala, Himachal pradesh, Indian sports, Sports

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