पांच महीने बाद डाउट क्लियरिंग के लिए खुले निजी और सरकारी स्कूल, नहीं पहुंचा एक भी स्टूडेंट

पहले दिन स्कूल खुलने पर क्लास में बैठीं दो टीचर.
पहले दिन स्कूल खुलने पर क्लास में बैठीं दो टीचर.

कोरोना महामारी (Corona epidemic) के दौरान पांच महीने बाद खुले स्कूलों में एक भी स्टूडेंट (Student) नहीं पहुंचा. इसके चलते टीचर (Teacher) स्कूल में खाली बैठ दिखे.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 21, 2020, 3:11 PM IST
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ऊना. कोरोना महामारी (Corona epidemic) के दौरान पांच महीने से बंद निजी और सरकारी स्कूलों (Private and government schools) को सरकार के आदेश के बाद डाउट्स क्लियरिंग (Doutes clearing) के लिए खोला गया, लेकिन स्कूल में एक आज भी स्टू़डेंट (Students) नहीं पहुंचा. ऐसे में टीचर खाली बैठे नजर आए. सरकार के आदेश के बाद सोमवार को पांच महीने बाद पहली बार स्कूलों को खोला गया, जिसमें स्टूडेंट्स को डाउट्स क्लियर करने के लिए स्कूल में आना था.

कोविड-19 के चलते लंबे लॉकडाउन के बाद सोमवार को स्कूल खोलने के आदेशों पर अमल हुआ, लेकिन सरकारी और निजी स्कूलों में छात्रों की उपस्थिति पहले दिन शून्य रही है. कोविड-19 के खतरे को भांपते हुए अभिभावकों ने अपने बच्चों को संस्थानों से दूर रखने का फैसला लिया. जिला मुख्यालय के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक कन्या विद्यालय में सोमवार को उप प्रधानाचार्य समेत करीब आधा स्टाफ मौजूद रहा, लेकिन इस दौरान कोई भी छात्रा स्कूल नहीं पहुंची. कुछ ऐसे ही स्थिति जिला मुख्यालय के समीपवर्ती रक्कड़ कॉलोनी स्थित निजी स्कूल रॉकफोर्ड में भी देखने को मिली. जिला मुख्यालय से कुछ दूरी पर स्थित टक्का पंचायत के सीनियर सेकेंडरी स्कूल में भी शिक्षक छात्रों की बाट जोहते नजर आए.

स्कूलों में 50 फीसदी स्टाफ रहा मौजूद
कोरोना वायरस के साये में स्कूलों को खोलने के आदेशों पर सोमवार को अमल हुआ है. सरकार द्वारा जारी गाइडलाइंस के मुताबिक स्कूलों में केवल 50 फीसदी स्टाफ ही मौजूद रहा. हालांकि स्कूलों में 9वीं से लेकर 12वीं तक के छात्रों को आने की अनुमति दे दी गई थी, लेकिन उन्हें भी अपने अभिभावकों से इस संबंध में लिखित अनुमति लेकर स्कूल आना होगा. हालांकि इससे पूर्व ऑनलाइन पढ़ाई चल रही थी. लेकिन शैक्षणिक पाठ्यक्रम में कुछ ऐसे विषय भी हैं, जिन्हें छात्र ऑनलाइन क्लियर नहीं कर पा रहे थे. इसी के चलते जिन विषयों में छात्रों को कठिनाई पेश आ रही थी, उनकी समस्या के समाधान के लिए स्कूलों को खोलने का निर्णय लिया गया है, जिसके लिए कई तरह की गाइडलाइंस जारी की गई है. जिसके तहत स्कूलों में मात्र आधा स्टाफ मौजूद रहेगा.
वहीं स्कूल आने वाले छात्रों के लिए अपने अभिभावकों से लिखित अनुमति लेकर आना अनिवार्य किया गया है. स्कूलों में कोविड-19 महामारी को लेकर जारी की गई तमाम गाइडलाइन और एसओपी का पालन किया जा रहा है. बच्चों को स्कूल आने के लिए जहां अपने अभिभावकों की अनुमति आवश्यक होगी. वहीं उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना होगा. स्कूल आने पर बच्चों को अनिवार्य रूप से मास्क भी पहनना होगा.
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