देवभूमि हिमाचल में बढ़ रहा अपराध का ग्राफ, जेलों में कैदियों के लिए कम पड़ रही जगह

हिमाचल की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा हो गई है.
हिमाचल की जेलों में कैदियों की संख्या क्षमता से ज्यादा हो गई है.

हिमाचल (Himachal) में अपराध (Crime) और अपराधियों का आंकड़ा बड़ी तेजी से बढ़ रहा है. पुलिस (Police) अपराधियों को पकड़ कर जेल (Jail) भेज रही हैं, वहीं कोर्ट भी सजा सुना रहे हैं. ऐसे में हिमाचल की जेलों में कैदियों (Prisoners) की संख्या एक दम से बढ़ गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 1, 2020, 6:49 PM IST
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शिमला. देवभूमि हिमाचल (Himachal) में अपराध का ग्राफ लगातार बढ़ता जा रहा है और यहां की जेलों (Jails) में कैदियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है. इस वक्त हिमाचल की जेलों में बंद कैदियों (Prisoners) की संख्या 2350 से भी ज्यादा है. जेल विभाग (Jail Department) के महानिदेशक सोमेश गोयल के मुताबिक कुछ ही वर्षों के भीतर हिमाचल में बंदियों की संख्या में करीब 10 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है.

नालागढ़ और कल्पा ने जल्द ही नए कारागार बनकर तैयार होने वाले हैं. इसके अलावा कुल्लू और मंडी की जेलों का भी विस्तार किया जा रहा है. हालांकि पूरे देश में जेल सुधार में हिमाचल का नाम अग्रिम पंक्ति में है. डीजी जेल का मानना है कि नए कारागार बनाने के पीछे कई कारण हैं.

डीजी जेल सोमेश गोयल ने कहा कि जब वो पुलिस महानिदेशक के पद पर तैनात थे, उस वक्त ही इसकी जरूरत महसूस की गई थी. सोलन जिले का नालागढ़ क्षेत्र अपराध का एक बड़ा हब है. नालागढ़ से हर साल करीब 500 कैदी सोलन जेल में लाए जाते हैं. इसके अलावा पेशी के लिए एक कैदी के साथ कम से कम दो पुलिसकर्मियों को आना पड़ता है. इसके चलते परोक्ष रूप से सरकार को अतिरिक्त खर्चा करना पड़ता है. यही स्थिति रामपुर की है. शिमला से रामपुर पेशी के लिए कैदियों को लाने और लेकर जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, कई बार कैदी फरार भी हो जाते हैं.



नालागढ़ में जनवरी 2021 में कारागार बनकर तैयार हो जाएगा. किन्नौर के कल्पा में जल्द ही जेल बन जाएगी और रामपुर में कार्य प्रगति पर है. उन्होंने कहा कि रामपुर में जेल बनने से किन्नौर, स्पिती, कुल्लू के आनी, निरमंड और रामपुर के बहुत बड़े इलाके को संभालने में सरकार आसानी हो जाएगी और खर्च भी बचेगा.
नई जेलों में डरावनी दीवार नहीं होगी
सोमेश गोयल ने बताया कि नई जेल बिलकुल अत्याधुनिक होंगी. कैदियों के अलावा जेल स्टाफ को भी बेहतर सुविधाएं मिलेंगी और इन जेलों में डरा देने वाली दीवार नहीं लगाई जाएगी. नेल्सन मंडेला रूल के हिसाब से जेल बन रही हैं. जहां तक सुरक्षा की बात है तो अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षा चाक-चौबंद होगी. उन्होंने कहा कि कारागारों को लेकर एक ऐसे विजन से कार्य कर रहे हैं जिससे आने वाले 20 सालों तक परेशानी नहीं होगी.

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पिछले 10 सालों में हुई अपराध में बढ़ोतरी
प्रदेश में दर्ज होने वाले केसों का अध्ययन करें तो आंकड़े काफी चौंकाने वाले हैं. आईपीसी, सीआरपीसी, एनडीपीएस और कानून की अन्य धाराओं के तहत थानों में मामले दर्ज होते हैं. हिमाचल पुलिस की रिपोर्ट के अनुसार साल 2010 में प्रदेशभर में 16 हजार 809 मामले दर्ज हुए थे. इनकी संख्या 2019 में बढ़कर 19 हजार 924 जा पहुंची. इस बीच, कमी केवल वर्ष 2013 में देखी गई,उस साल 15 हजार 733 मामले दर्ज हुए थे. इस वर्ष की बात करें तो साल 2020 के शुरूआती 9 महीनों में प्रदेशभर के थानों में 16 हजार 108 केस दर्ज हो चुके हैं. कनविक्शन रेट वैसे भी कम है, ऐसे में ये रेट बढ़ेगा तो जेलों में भीड़ और बढ़ जाएगी.

नशे के मामलों में बढ़ा ग्राफ
एनसीआरबी की साल 2018 की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश में अपराध के अलग-अलग हैड्स हिमाचल का रैंक बहुत कम है लेकिन नशे के मामलों में देशभर में तीसरे स्थान पर था. नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉफिक सबस्टांसिंज एक्ट यानि एनडीपीएस एक्ट के मामलों में पंजाब और केरल के बाद तीसरे स्थान पर था. 2018 में 1342 मामले थे, 2019 में 1439 मामले दर्ज हुए और इस साल के 9 महीनों के भीतर 1138 मामले दर्ज हो चुके हैं.  इस साल अब तक 3.65 किलो ग्राम चिट्टा, 31.63 ग्राम स्मैक 221.15 किलो ग्राम चरस, 26.36 किलोग्राम गांजा, 2483 किलोग्राम चूरा-पोस्त, 15.52 किलो ग्राम अफीम सहित अन्य नशे की सामग्री पकड़ी गई है और सैकड़ों लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं.

अपराध पर ये बोले डीजी
कारा विभाग के महा निदेशक सोमेश गोयल का कहना है कि हमारा देश एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. जाहिर सी बात है कि विकासशील देश की अपनी दिक्कतें होती हैं, समाज की अपनी परेशानियां है, ऐसे में आपराधिक घटनाएं बढ़ती हैं लेकिन सरकार का पूरा प्रयास है कि हमारा देश और प्रदेश जल्द ही अपराध मुक्त हो. उन्होंने कहा कि जैसे जैसे देश आगे बढ़ता जाएगा और हम विकसित होते जाएंगे तो क्राइम रेट में कमी आती जाएगी.

हिमाचल में हैं 14 जेल
प्रदेश में वर्तमान में 2 केंद्रीय कारागार हैं, 2 जिला कारागार, 8 सब जेल, एक बोर्सट्ल स्कूल और एक ओपन जेल हैं.
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