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हमीरपुर: लॉकडाउन में 21 साल के युवक ने चुनी खेती, स्ट्रॉबेरी लगाकर कर रहा कमाई

हमीरपुर में अब प्राकृतिक तौर 
 लगाई स्ट्रॉबेरी (Strawberry) भी खाने को मिल रही है.

हमीरपुर में अब प्राकृतिक तौर लगाई स्ट्रॉबेरी (Strawberry) भी खाने को मिल रही है.

Strawberry production in Hamirpur: युवा लखनपाल ने बताया कि पायलट प्र्रोजेक्ट के तहत स्ट्रॉबेरी के प्लांट मगंवाए थे और वातावरण के अनुकूल होने के चलते स्ट्रॉबेरी के पौधों पर फल मिलना शुरू हुआ है.

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हमीरपुर. कोविड माहमारी के दौरान नौकरी (Jobs) की लालसा को दरकिनार करते हुए हिमाचल के हमीरपुर (Hamirpur) के एक नौजवान युवक ने स्ट्रॉबेरी को सफलतापूर्वक उगाया और पैसा कमाया है. हमीरपुर के साथ लगते विकास नगर में युवा लखनपाल ने खाली भूमि पर साफ सफाई करके एक हजार स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए. अब इन पौधों से अच्छी आमदन हो रही है.

हमीरपुर में अब प्राकृतिक तौर तरीके से स्ट्रॉबेरी (Strawberry) भी खाने को मिल रही है. अब तक एक क्विंटल तक स्ट्रॉबेरी की पैदावार होने पर खेतीबाडी में दिलचस्पी रखने वाले युवक भी बेहद खुश हैं. प्राकृत लखनपाल ने बैगलोर से स्ट्रॉबेरी के एक हजार पौधे मंगवाए थे. सही ढंग से देखभाल करने के बाद अब पौधे अच्छी आमदन दे रहे है. मार्च से स्ट्रॉबेरी के पौधों पर फल लगना शुरू हुए है और रोजाना 5 से दस किलो स्ट्राबेरी मिल रही है, जिसे सब्जी मंडी में भी सौ रूपये प्रतिकिलो के हिसाब से बेचा जा रहा है.

पायलट प्रोजेक्ट लगाया था
युवा लखनपाल ने बताया कि पायलट प्र्रोजेक्ट के तहत स्ट्रॉबेरी के प्लांट मगंवाए थे और वातावरण के अनुकूल होने के चलते स्ट्रॉबेरी के पौधों पर फल मिलना शुरू हुआ है. उन्होंने बताया कि महंगे पौधे खरीदे थे, ताकि बाद में मुनाफा भी हो सके. उन्होंने बताया कि पूरी तरह से देखदेख करते हुए जैविक तरीके से पौधों की देखभाल की है और अब अच्छा उत्पादन मिल रहा है.
21 वर्षीय प्राकत ने बताया कि शौकीय तौर पर स्ट्राबेरी लगाई थी और बेचने का कोई मकसद नहीं था. लेकिन फिर भी अच्छा उत्पादन होने पर इसे सब्जी मंडी में बेचा जा रहा है. लोग भी स्ट्रॉबेरी को पंसद कर रहे हैं. स्थानीय निवासी मदन लाल ने बताया कि स्ट्रॉबेरी बाहर से ही हिमाचल आती है, लेकिन प्राकृत ने अच्छा प्रयास किया जिससे स्ट्राबेरी अच्छी लग रही है.
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